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1. भीलवाड़ा (राजस्थान) में दूसरा राष्ट्रीय ग्रामीण युवा-महोत्सव(फरवरी 21-22, 2009)
इन्कूलिसिव मीडिया फॉर चेंज की टोली ने मजदूर किसान शक्ति संगठन,रोजगार व सुचना का अधिकार अभियान तथा लोकतंत्रशाला द्वारा आयोजित दो दिनी दूसरे ग्रामीण युवा महोत्सव में भाग लिया।महोत्सव का आयोजन 21 और 22 फरवरी (2009) के दिन दिल्ली से तकरीबन 505 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा स्थित सन्मति वाटिका में हुआ। महोत्सव शिरकत करने के लिए गांव से प्रतिभागी आये थे तो शहरों से भी और अमेरिका तथा जर्मनी से भी। सारे प्रतिभागियों का सरोकार एक था-गांव और उसकी समस्य़ाएं। महोत्सव में नामी-गिरामी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों मसलन लेडी श्रीराम कॉलेज, आईआईएम इंदौर और लंदन स्कूल ऑव इकॉनॉमिक्स के छात्रों ने भाग लिया तो राजस्थान के दूर देहात और दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के युवाओं ने भी। ऐसे में महोत्सव अपने आप में कई रंगों की छटा लिए खास आयोजन बन गया।
पूरे महोत्सव में आयोजन को कुल 12 सत्रों में विषयवार विभाजित किया गया था।हर सत्र के लिए नया विषय मसलन-सूचना का अधिकार और युवजन, आदिवासी और आप्रवासी मजदूर, चुनाव-पर्येवेक्षण, कानून,न्याय और पुलिस बल, शिक्षा का अधिकार, वनाधिकार, लैंगिक समानता, वैश्वीकरण, किसानी का संकट और विस्थापन, आजीविका, सुरक्षा, आतंकवाद, अल्पसंख्यक और मानवाधिकार, मीडिया, कठपुतली और मुखौटे, नाटक, फिल्म और फोटोग्राफी, कार्टून और पोस्टर, नृत्य और कराटे।
मीडिया पर आधारित कार्यशाला की बागडोर इंक्लूसिव मीडिया फॉर चेज की टोली से विपुल मुदगल और शंभु घटक ने थामी। इस कार्यशाला के प्रतिभागी थे भीलवाड़ा सहित राजस्थान के अन्य ग्रामीण अंचलों के रिपोर्टर और कुछ नागरिक-संगठनों के कार्यकर्ता। कार्यशाला की शुरुआत मीडिया और लोकतंत्र के रिश्ते से जुड़ी चर्चा से हुई और चर्चा के सिरे भारत की आंतरिक सुरक्षा से लेकर चुनाव तक जा पहुंचे।चर्चा धीरे-धीरे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के दायरे तक जा पहुंची। इस चर्चा में जनमत गढ़ने के उद्योग और जनसंपर्क का भी जिक्र आया। कार्यशाला में भँवर मेघवंशी और प्रमोद तिवारी ने भी अपनी प्रस्तुति की। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तरी की एक लंबी शृंखला से हुआ ।इसमें स्थानीय पत्रकारों और नागरिक-समूह के कार्यकर्ताओं ने अपने साथ पेश आ रही दिक्कतों की इंक्लूसिव मीडिया फॉर चेंज की टोली के साथ चर्चा की। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में एक नारा भी गढ़ा-मीडिया को खबर दें- मीडिया की खबर लें।
2.प्रथम के सहभागियों के साथ सोलन(हिमाचल प्रदेश) में मीडिया कार्यशाला (तारीख-21-22 जुलाई, 2009)
शिक्षा के मसले पर काम करने वाले स्वयंसेवी संगठन प्रथम की एक टोली एनुअल स्टेटस् ऑव एजुकेशन रिपोर्ट (असर) कहलाती है। इस टोली के कुछ सहभागी पूरे देश के ग्रामीण इलाकों में घूम-घूम कर यह जानने के लिए सर्वेक्षण करते हैं कि आखिर गांव के स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई की क्या दशा है। इसी टोली सर्वेक्षण पर निकले अपने सहभागियों के साथ एक सत्र बिताने के लिए इंक्लूसिव मीडिया फॉर चेंज की टोली को आमंत्रित किया था। असर की सर्वेक्षण पर आयी टोली में देश भर के कॉलेजों-विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नाकोत्तर के छात्र शामिल थे।
इंक्लूसिव मीडिया की टोली से विपुल मुदगल और चंदन श्रीवास्तव ने डाक्टर रुक्मिणी बनर्जी और वसुंधरा चौहान की अगुआई में हिमाचल प्रदेश के सोलन में आये असर के सहभागियों के साथ दो दिन व्यतीत किए। इंक्लूस्व मीडिया की टोली ने सोलन के प्रतिवेश में मौजूद स्कूलों का भी दौरा किया। मुख्य मीडिया कार्यशाला कई घंटों तक चली। इसमें इंक्लूसिव मीडिया की टोली ने अपनी प्रस्तुति दी और इसके तुरंत बाद प्रश्न-उत्तर का बड़ी जीवंत सिलसिला चल निकला। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों से कहा गया कि आप सर्वेक्षण के दौरान जितने लोगों से मिल रहे हैं उनमें अपनी कहानी के लिए किरदार ढूंढिए और उनके वास्तविक अनुभवों को दर्ज करते हुए सत्यकथा लिखिए ताकि कथाओं का एक ऐसा भंडार तैयार हो जिसे पढ़-सुन के समझा जा सके कि ग्रामीण अंचलों में भारी परेशानियों के बीच किस तरह कुछ लोग जिन्दगी को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहे हैं और सफल हो रहे हैं। इंक्लूसिव मीडिया की टोली को असर के वरिष्ठ साथियों ने पहले से कुछ लिखित सामग्री दे रखी थी। इस लिखित सामग्री पर भी इस बात को केंद्र में रखकर हुई कि क्या इसका इस्तेमाल ग्रामीण अंचलों में शिक्षा से जुड़े मुद्दों के प्रसार में किया जा सकता है। असर की टोली के साथ लगातार सक्रिय संपर्क बना हुआ है।
3. विविधा द्वारा तिलोनिया, अजमेर(राजस्थान) स्थित बेयरफूट कॉलेज में ग्रामीण रिपोर्टरों की कार्यशाला (तारीख-15-29 जुलाई, 2009)
ग्रामीण रिपोर्टरों के फैलोशिप कार्यक्रम को एक कार्यशाला की शक्ल में विविधा नामक फीचर एजेंसी ने यूएनडीपी, एमकेएसएस और आईएम फॉर चेंज के साथ मिलकर आयोजित किया। इंक्लूसिव मीडिया की टोली से विपुल मुदगल, चेदन श्रीवास्तव और शंभु घटक ने दो दिनों में विभाजित चार सत्रों इस कार्यशाला को संबोधित किया। इस कार्यशाला का जोर ग्रामीण अधिकारिता और सहस्राब्दि विकास लक्ष्य(एमडीजी)पर था।
कार्यशाला की अगुआई विविधा फीचर एजेंसी की मुखिया ममता जेटली ने की और कार्यशाला में एमकेएसएस की अरुणा रॉय और निखिल दे सहित बेयरफूट कॉलेज के श्रीनिवासन वासु और यूनिसेफ तथा यूएनडीपी की शिखा वाधवा और राधिका कौल ने भी प्रस्तुति की। इंक्लूसिव मीडिया की टोली अपने इस मकसद पर हर प्रस्तुति में अडिग रही कि प्रतिभागियों को विकास, लोकतंत्र में नागरिक की भागीदारी और हस्तक्षेप से जुड़ी न्यूज रिपोर्टिंग के विविध रुपों के बारे में यह समझाते हुए बताना है कि कैसे उन्हें पठनीय बनाया जाय और क्षेत्रीय संपादकों को उनका खरीदार बनाया जाय।कार्यशाला के अधिकतर प्रतिभागी किसी मीडिया या सामाजिक संगठन के साथ जुड़े नवप्रशिक्षु थे और उनके पास जन-आंदोलनों में भागीदारी का भरपूर अनुभव था।
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