शोध और विकास

दूषित हवाओं पर ओइजॉम की नजरदूषित हवाओं पर ओइजॉम की नजर

हमारे आसपास ऐसी कई चीजें हैं जो दिखती नहीं हैं, लेकिन वे हानि पहुंचाती हैं. कुछ दिन पहले खबर आयी कि दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में 13 क्षेत्र भारत में हैं. यह बेहद चिंताजनक है. इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रख कर अहमदाबाद की एक तिकड़ी ने ओइजॉम नामक स्टार्टअप बनाया है, जो एयर क्वालिटी इंडिया एप्प की मदद से सामाजिक हित की दिशा में पूरी तरह से लगी हुई है.   जिस तिकड़ी ने ओइजॉम को शुरू किया, सबसे पहले बात करते हैं उनके बारे में. तीन नौजवानों की इस तिकड़ी में अंकित व्यास,सोहिल पटेल और व्रुषांक व्यास हैं. इसके को-फाउंडर और सीइओ अंकित व्यास ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एनआइडी से प्रोडक्ट डिजाइनिंग की डिग्री ली है. सोहिल पटेल मुख्य तकनीकी अधिकारी हैं. सोहिल ने निरमा विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर की पढ़ाई की है. उन्हें इंटरनेट ऑफ थिंग्स उत्पादों में चार साल का अनुभव है.     कंपनी के

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मेहनत और लगन के आगे उम्र बाधा नहीं, सारी जरूरतें पूरी करनेवाला अनूठा घरमेहनत और लगन के आगे उम्र बाधा नहीं, सारी जरूरतें पूरी करनेवाला अनूठा घर

चेन्नई निवासी 71 वर्षीय सुरेश ने एक असाधारण आशियाना बनाया है. एक ऐसा मकान, जो हवा, पानी, भोजन और गैस तक की सारी जरूरतें पूरी करता है. वह मानते हैं कि सरकार से हर समस्या का समाधान पाने की अपेक्षा करने से बेहतर है कि समाधान खोज कर सरकार और देश दोनों की मदद की जाये. पढ़िए एक प्रेरक रिपोर्ट. रिटायरमेंट के बाद भी चेन्नई के डी सुरेश के मन में कुछ अलग करने का, समाज के लिए कुछ बेहतर काम करने का जुनून बना रहा. उनके मन में वर्षों तक यह ख्याल छाया रहा कि एक ऐसा घर बनाया जाये, जो स्वनिर्भर हो. जब वे बरसों पहले जर्मनी यात्रा पर गये थे, तभी यह विचार उनके मन में आ गया था. वह अपने इस आइडिया के बारे में बताते हैं -“ यह सही-सही याद कर पाना मुश्किल है, कि कब मेरे मन में स्वनिर्भर घर बनाने का विचार आया, लेकिन

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रांची के डॉ मुखर्जी जो पांच रुपये में करते हैं मरीजों का ईलाज !रांची के डॉ मुखर्जी जो पांच रुपये में करते हैं मरीजों का ईलाज !

महंगे ईलाज के इस युग में कुछ फरिश्ते अभी भी है, जो भगवान बनकर गरीबों के ईलाज के लिए तत्पर है। इनके लिए डॉक्टर की उपाधि भगवान का दिया एक तोहफा है जो जरूरतमंदों की भलाई करने के लिए है, ना कि सिर्फ और सिर्फ कमाई करने के लिए। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही चिकित्सकों में से एक है जिन्होनें अपने पेशे के साथ- साथ सामाजिक कर्तव्य को आज भी जिंदा रखा है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी आज भी गरीब मरीजों से इलाज के लिए मात्र पांच रुपये फीस के रूप में लेते है। डॉ. मुख़र्जी अपने मरीजों से सिर्फ पांच रूपये ही फीस के तौर पर लेते है ऐसे चिकित्सक विरले ही है, जो आज के इस महंगे चिकित्सा सेवाओं के युग में भी रोजाना सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों को अपनी सेवाएं सिर्फ 5 रुपये में दे रहे हों। 80 साल के डॉ मुखर्जी 1966 से लेकर आज तक रांची में

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खुद के हुनर से किसानों की मददखुद के हुनर से किसानों की मदद

नहीं है कोई डिग्री, कर रहे किसानों की मुश्किलों को दूर गिरीश बद्रगोंड बीजापुर जिले के निवासी हैं. उन्हें मशीनों से लगाव है. लेकिन, मशीनों के संबंध में शोध करने की कोई डिग्री नहीं है. लिहाजा, वे छोटे-छोटे मशीनों का आविष्कार कर किसानों की मुश्किलों का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं. आज स्थिति यह है कि वे सैंटेप सिस्टम नामक कंपनी में पार्टनर हैं और कृषि तकनीक के उत्पादन में सहयोग कर रहे हैं. वर्ष 2006 में गिरीश बद्रगोंड जब काम के सिलसिले में बेंगलुरु गये, तो उनके पास पूंजी के नाम पर जेब में कुछ पैसे, एक लैपटॉप और वायरलेस राऊटर था. कुछ दिन वे अपने दोस्त के साथ रहे. बाद में उन्होंने उसके साथ रूम शेयर करना शुरू कर दिया. पैसे के अभाव में भोजन पर भी संकट दिखने लगा, तो पुराने डीटीएच एंटीना की मदद से राऊटर विकसित कर बेचना शुरू किया.  इसका बैंडविड्थ करीब 10

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प्याज बचाने के लिए किसान ने बनाया देसी कोल्ड स्टोरेज

इंदौर। जिस प्याज के गिरते-चढ़ते भावों से राजनीतिक दलों की कुर्सी हिलने लगती हैं और सरकार की सांसें ऊपर-नीचे होती हैं, उसी प्याज को सड़ने से बचाने के लिए एक आम किसान ने जुगाड़ का कोल्ड स्टोरेज बना डाला। करोड़ों के कोल्ड स्टोरेज से इतर यह देसी कोल्ड स्टोरेज मात्र 35 हजार स्र्पए में तैयार हो गया। मेड इन सेमलिया चाऊ।   इंदौर जिले के सेमलिया चाऊ गांव के युवा किसान रंजनजसिंह गौड़ की यह देसी ईजाद हजारों किसानों के लिए फायदे की है। अपने ही घर के तीन हॉल को उन्होंने कोल्ड स्टोरेज का रूप दे रखा है। दस साल से प्याज की खेती कर रहे रंजनसिंह को अक्सर यह मलाल रहता कि बाजार में कभी तो प्याज के भाव ऊंचे हो जाते और कभी बहुत गिर जाते। इससे अच्छी उपज के बावजूद कई बार घाटा हो जाता और स्टॉक करने पर प्याज सड़ जाती। आखिरकार उन्होंने देसी तरीके से प्याज को

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