साक्षात्कार

‘श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाया गया संशोधन आरटीआई क़ानून को बर्बाद कर देगा’‘श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाया गया संशोधन आरटीआई क़ानून को बर्बाद कर देगा’

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. मदाभूषनम श्रीधर आचार्युलु आरटीआई और पारदर्शिता के मुद्दे पर अपने बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में अपने एक फैसले में उन्होंने राज्यसभा के अध्यक्ष और लोकसभा के स्पीकर से सिफारिश की है कि सांसद निधि के धन का उचित उपयोग करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाया जाए. आचार्युलु उन कुछ चुनिंदा आयुक्तों में एक हैं जो पद पर रहते हुए भी आरटीआई से संबंधीत सरकार के फैसलों का खुला विरोध किया है. बीते जुलाई महीने में आचार्युलु ने आयोग के सभी सूचना आयुक्तों को पत्र लिख कर सरकार द्वारा प्रस्तावित आरटीआई संशोधन वापस लेने की मांग की थी. आचार्युलु हैदराबाद के नालसर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं और 22 नवंबर 2013 को केंद्रीय सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए थे. 21 नवंबर को आचार्युलु रिटायर हो रहे हैं और उन्होंने हाल ही में जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाए गए आरटीआई संशोधन

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उच्च जातियों को भी मिलना चाहिए 15 फीसदी आरक्षण: केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान नरेंद्र मोदी सरकार में दलित चेहरा हैं। बिहार से आने वाले और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष राम विलास पासवान ने हमारे सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के कुमार उत्तम से एससी/एसटी एक्ट पर मार्च में सु्प्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार द्वारा किए गए बदलाव, पदोन्नति में आरक्षण और उच्च जातियों को आरक्षण आदि के मुद्दों पर बातचीत की। पढ़ें इंटरव्यू: सवाल- एससी/एसटी अधिनियम और पदोन्नति में आरक्षण पर सरकार की स्थिति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। क्या यह सरकार के लिए चिंता का विषय है? जवाब- बिल्कुल भी नहीं। छह महीने पहले, हमें कई प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा था। मंत्रियों को आना जाना मुश्किल पड़ने लगा था। मोदी सरकार को लोग 'एंटी दलित' और 'एंटी बैकवर्ड' कहने लगे थे। लोगों ने मुझसे पूछा कि, 'पासवान जी, आप दलितों के मसीहा हैं, इस मुद्दे पर शांत क्यों हैं? बहुत

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प्रभात खबर से खास बातचीत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, किसानों से किये गये सभी वायदे हुए हैं पूरेप्रभात खबर से खास बातचीत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, किसानों से किये गये सभी वायदे हुए हैं पूरे

छात्र जीवन से ही विद्यार्थी परिषद, जनसंघ काल में ही राजनीति से जुड़े आरएसएस के स्वयंसेवक राधा मोहन सिंह बिहार के पूर्वी चंपारण से पांच बार सांसद चुने गये हैं. वह ‍भाजपा के संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके हैं. किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में लक्ष्य तय करने, देश में मौजूदा समय में कृषि के समक्ष चुनौतियों, किसानों की आय दोगुनी करने तथा कृषि से जुड़े अन्य विषयों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह की राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख अंजनी कुमार सिंह से बातचीत के मुख्य अंश... Qबीते चार सालों में आपके मंत्रालय की क्या उपलब्धियां रही हैं? सरकार की ओर से किसानों के हित में ऐसा क्या किया गया, जिससे यह पता चले कि यूपीए सरकार की तुलना में आपकी सरकार बेहतर काम कर रही है? देश में कृषि क्षेत्र के आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि के

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झारखंड: बोले पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी- राज्य में मानवीय विकास की स्थिति दयनीय हैझारखंड: बोले पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी- राज्य में मानवीय विकास की स्थिति दयनीय है

पूर्व मुख्यमंत्री सह झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देश में सामाजिक उथल-पुथल की स्थिति है. हर आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. जगह-जगह सांप्रदायिक हिंसा दिखायी पड़ रही है. स्वतंत्रता के बाद पहली बार देश बंटा हुआ दिख रहा है. मानवीय विकास के पैमाने पर ही राज्य का विकास देखा जाता है. राज्य में मानवीय विकास की स्थिति दयनीय है. यही वजह है कि लोग भूखे मर रहे हैं. पत्थलगड़ी की समस्या क्यों उत्पन्न हुई, इसे समझने की जरूरत है. नीति गलत होगी, तो सिस्टम फेल होगा ही. सुनने में खराब लगता हो, लेकिन सच्चाई यह है कि जब आप कुछ नहीं कर रहे हैं, तो वो आपको क्यों घुसने देगा? जब तक भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (3) के तहत स्थानीय नीति नहीं बनती है, तब तक लक्ष्य की पूर्ति नहीं होगी. आप कैसे बाहर से आने वाले लोगों को रोकेंगे? श्री मरांडी

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मजदूर दिवस पर बोले ज्यां द्रेज़- NREGA को जिंदा रखने के लिए मजदूरी दर बढ़ाना जरूरीमजदूर दिवस पर बोले ज्यां द्रेज़- NREGA को जिंदा रखने के लिए मजदूरी दर बढ़ाना जरूरी

मजदूर दिवस यानी मे डे के मौके पर सरकार कई दावे कर रही है. सरकारी आंकड़ों में कहा जा रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उच्च दर से बढ़ रही है. लेकिन, जाने-माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि वास्तव में विकास की दर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार यह तय करती है कि देश कितनी तरक्की कर रहा है. ज्यां द्रेज़ सोनिया गांधी के राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ( एनएसी)के सदस्य भी रह चुके हैं. उन्होंने राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) लाने में अहम भूमिका निभाई. उनका कहना है कि 'स्वच्छ भारत मिशन' को छोड़ दिया जाए, तो पिछले चार साल के दौरान मोदी सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया. पढ़ें, ज्यां द्रेज़ से हुई बातचीत के खास अंश... नोटबंदी के बाद देश ने एक के बाद कई दिक्कतें देखी. आपको क्या लगता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका क्या

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