साक्षात्कार

‘जम्मू कश्मीर की मीडिया को खुद नहीं पता कि राज्य में क्या हो रहा है’‘जम्मू कश्मीर की मीडिया को खुद नहीं पता कि राज्य में क्या हो रहा है’

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति के आदेश से 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने से एक दिन पहले 4 अगस्त से ही राज्य में मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट सहित संचार के सभी संसाधनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसके पहले वहां भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात कर दिया गया था. संचार माध्यमों पर रोक के साथ प्रदेश में अप्रत्याशित बंद का सामना कर रही जम्मू कश्मीर की मीडिया बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है. स्थानीय अख़बारों जैसे ग्रेटर कश्मीर, राइजिंग कश्मीर और कश्मीर रीडर की वेबसाइट्स 4 अगस्त से अपडेट नहीं हुई हैं. कश्मीर टाइम्स का जम्मू संस्करण छप रहा है और अपनी वेबसाइट को अपडेट करने में भी सफल रहा लेकिन उसका कश्मीर संस्करण पूरी तरह से ठप्प पड़ा हुआ है. राज्य में मीडिया की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए कश्मीर टाइम्स की

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‘मेरे पिता कहते थे कि जीवन में जितने बड़े विलेन आएंगे, तुम उतने ही बड़े हीरो बनोगे’

आपने वर्ष 1992 में रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स की शुरुआत की, जिसके जरिये बच्चों को कोचिंग देना शुरू किया तो ऐसे में 2002 में ‘सुपर 30' कोचिंग की शुरुआत करने का विचार कैसे आया? रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स 1992 में जब शुरू हुआ तो वह एक प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी, यह कोचिंग इंस्टिट्यूट नहीं था. यहां बच्चों से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती थी. हम मिलकर रामानुजम जयंती मनाते थे, उस समय मैं खुद भी एक छात्र था. आर्थिक दिक्कतों की वजह से 1994 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय नहीं जा पाया था तो घर का खर्चा निकालने के लिए पापड़ बेचता था. हमने 1997 में रामानुजम को दोबारा शुरू किया, नि:शुल्क शिक्षा शुरू की, जब धीरे-धीरे बच्चे उससे जुड़ने लगे तो हमने छात्रों के लिए एक साल 500 रुपये फीस रखी. उस समय एक वाकया यह हुआ कि एक छात्र ने कहा कि वह फीस नहीं भर सकता है, क्योंकि उसके घर

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जीरो बजट कृषि का विचार नोटबंदी की तरह घातक है- राजू शेट्टीजीरो बजट कृषि का विचार नोटबंदी की तरह घातक है- राजू शेट्टी

शून्य बजट प्राकृतिक कृषि को लेकर एक स्वाभाविक आकर्षण है क्योंकि यह कृषि जैसे मुश्किल व्यवसाय को सरलता से प्रकट करता है। शून्य बजट प्राकृतिक कृषि में जोखिम कम होता है और पूंजी की आवश्यकता नहीं के बराबर होती है। इसे विदर्भ के किसान नेता सुभाष पालेकर द्वारा गढ़ा गया है जिन्हें 2016 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। शून्य बजट प्राकृतिक कृषि को वैसा ही स्थान मिला है जैसा कि कौशल भारत को 2015 में मिला था। आर्थिक विकास के लिए भारत के नवीनतम मंत्र में शून्य बजट कृषि को लाने का श्रेय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को जाता है, जिन्होंने 5 जुलाई को अपने बजट भाषण में भारत के कृषि संकट को हल करने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए इसे रामबाण के रूप में बताया।   शून्य बजट प्राकृतिक कृषि क्या है? क्या यह भारत में दशकों पहले जैविक खेती या पारंपरिक कृषि पद्धति

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‘श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाया गया संशोधन आरटीआई क़ानून को बर्बाद कर देगा’‘श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाया गया संशोधन आरटीआई क़ानून को बर्बाद कर देगा’

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. मदाभूषनम श्रीधर आचार्युलु आरटीआई और पारदर्शिता के मुद्दे पर अपने बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में अपने एक फैसले में उन्होंने राज्यसभा के अध्यक्ष और लोकसभा के स्पीकर से सिफारिश की है कि सांसद निधि के धन का उचित उपयोग करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाया जाए. आचार्युलु उन कुछ चुनिंदा आयुक्तों में एक हैं जो पद पर रहते हुए भी आरटीआई से संबंधीत सरकार के फैसलों का खुला विरोध किया है. बीते जुलाई महीने में आचार्युलु ने आयोग के सभी सूचना आयुक्तों को पत्र लिख कर सरकार द्वारा प्रस्तावित आरटीआई संशोधन वापस लेने की मांग की थी. आचार्युलु हैदराबाद के नालसर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं और 22 नवंबर 2013 को केंद्रीय सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए थे. 21 नवंबर को आचार्युलु रिटायर हो रहे हैं और उन्होंने हाल ही में जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाए गए आरटीआई संशोधन

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उच्च जातियों को भी मिलना चाहिए 15 फीसदी आरक्षण: केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान नरेंद्र मोदी सरकार में दलित चेहरा हैं। बिहार से आने वाले और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष राम विलास पासवान ने हमारे सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के कुमार उत्तम से एससी/एसटी एक्ट पर मार्च में सु्प्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार द्वारा किए गए बदलाव, पदोन्नति में आरक्षण और उच्च जातियों को आरक्षण आदि के मुद्दों पर बातचीत की। पढ़ें इंटरव्यू: सवाल- एससी/एसटी अधिनियम और पदोन्नति में आरक्षण पर सरकार की स्थिति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। क्या यह सरकार के लिए चिंता का विषय है? जवाब- बिल्कुल भी नहीं। छह महीने पहले, हमें कई प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा था। मंत्रियों को आना जाना मुश्किल पड़ने लगा था। मोदी सरकार को लोग 'एंटी दलित' और 'एंटी बैकवर्ड' कहने लगे थे। लोगों ने मुझसे पूछा कि, 'पासवान जी, आप दलितों के मसीहा हैं, इस मुद्दे पर शांत क्यों हैं? बहुत

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