सूचना का अधिकार

आरटीआइ के सहारे विस्थापन के खिलाफ जंग- पुष्यमित्र

आरटीआइ के जरिये बदलाव की कई कहानियां हमने देखी सुनी है और उनके जरिये इस अधिकार की ताकत को महसूस किया है. मगर इसके जरिये झारखंड में विस्थापन के खिलाफ जो जंग लड़ी गयी हैं, उसकी कोई मिसाल नहीं है. सदियों से विस्थापन का क्रूरतम शिकार रहे झारखंड के आदिवासियों के लिए आरटीआइ एक नयी ताकत बन कर उभरा है. चाहे अर्सेलर मित्तल के स्टील प्लांट का मसला हो या नगड़ी का भूमि विवाद इस कानून के जरिये फैसला लोगों के हक में हुआ और लोगों में नये आत्मविश्वास का संचार हुआ है. स्टील जाइंट की खिलाफत सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला झारखंड में विस्थापन के खिलाफ जंग का एक प्रमुख चेहरा हैं. उन्होंने ही सबसे पहले आर्सेलर मित्तल के स्टील प्लांट के खिलाफ विस्थापन विरोधी मुहिम के दौरान आरटीआइ का सहारा लिया था. वे बताती हैं कि आरटीआइ की ताकत से तो वे पहले से ही वाकिफ थीं और हमेशा इसका इस्तेमाल करती

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