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निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कवरेज भी घटा !निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कवरेज भी घटा !
March 18, 2019

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बजट-आबंटन अंतरिम बजट (2019-20) में घट गया है. एक तथ्य यह भी है कि फसल बीमा योजना पिछले दो सालों से अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम रही है. बजट-आबंटन घटने की एक वजह यह भी हो सकती है.   साल 2017-18 की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति बताने वाले दस्तावेज में कहा गया था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना(पीएमएफबीवाय) की कवरेज सकल फसलित क्षेत्र का 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत कर दी जायेगी. गौरतलब है कि साल 2016-17 में फसल बीमा योजना का कवरेज सकल फसलित क्षेत्र का 30 प्रतिशत था.   लेकिन लोकसभा में दिए गए कृषि मंत्रालय के राज्यमंत्री के जवाब(अतारांकित प्रश्न संख्या 3398) से पता चलता है कि विभिन्न फसलों की बुवाई का 29 प्रतिशत हिस्सा ही साल 2016-17 में पीएमएफबीवाय) की कवरेज में था और 2017-18 में यह कवरेज का दायरा घटकर 25.0 प्रतिशत रह गया. दूसरे शब्दों में कहें तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

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जम्मू-कश्मीर: हिंसा के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद सबसे ज्यादा तादादजम्मू-कश्मीर: हिंसा के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद सबसे ज्यादा तादाद
March 8, 2019

पाकिस्तान से बढ़ती सैन्य तनातनी और युद्ध की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की : ‘जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले नागरिकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा.' लेकिन क्या सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सचमुच आरक्षण का लाभ हासिल कर पाने की स्थिति में हैं ?   इस सवाल का उत्तर ढूंढ़ने के लिए इन तथ्यों पर गौर कीजिए : बीते साल जनवरी से जून महीने के दौरान संघर्ष और हिंसा की घटनाओं के कारण पूरी दुनिया में लगभग सवा पचास लाख लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर हुये. भारत में ऐसे लोगों की तादाद 2018 के पहले छह महीनों में 1 लाख 66 हजार रही और सबसे ज्यादा संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर में विस्थापित हुये. ये तथ्य इंटरनल डिस्प्लेस्मेंट मॉनिटरिंग सेंटर के हैं. संस्था की नई रिपोर्ट के मुताबिक 2018 के पूर्वाद्ध में संघर्ष और हिंसा के हालात के कारण जिन दस देशों में सबसे ज्यादा लोग विस्थापन के शिकार हुये, भारत ऐसे

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प्रति बूंद अधिक फसल योजना : दिन भर चले अढ़ाई कोस!प्रति बूंद अधिक फसल योजना : दिन भर चले अढ़ाई कोस!
March 5, 2019

दो में दो को जोड़ने से हमेशा चार ही आये यह जरुरी नहीं- वह पांच..सात..दस कुछ भी हो सकता है. बात विचित्र लगती हो प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चलाये जा रहे ‘प्रति बूंद अधिक फसल' के आंकड़ों पर गौर कीजिए.   प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के डैशबोर्ड पर दिख रहा आंकड़ा बताता है कि ‘प्रति बूंद-अधिक फसल' कार्यक्रम के तहत वित्तवर्ष 2017-18 में 11.25 लाख हेक्टेयर जमीन माइक्रो-सिंचाई के अंतर्गत लायी गई है.   लेकिन बीते 11 दिसंबर को लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न(संख्या-5) के जवाब में कहा गया कि प्रति बूंद अधिक फसल अभियान के तहत 10.48 लाख हेक्टेयर जमीन माइक्रो-सिंचाई सुविधा के दायरे में आ सकी है.   जाहिर है, साल 2017-18 में प्रति बूंद अधिक फसल के अंतर्गत माइक्रो-सिंचाई की सुविधा के दायरे में आयी जमीन को लेकर जो आंकड़ा संबंधित डैशबोर्ड पर दिखाया गया है वह लोकसभा में दिये गये जवाब से मेल नहीं खाता. ऐसे में सवाल उठेगा कि किस आंकड़े को सही

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पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?
February 8, 2019

‘पैसा ना कौड़ी, बीच बाजार में दौड़ा-दौड़ी’- क्या आपने कभी ये कहावत सुनी है? इस कहावत का ठीक-ठीक अर्थ समझना हो तो इस बार के अंतरिम बजट की एक खास घोषणा को गौर से पढ़िये! घोषणा हुई है कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को सालाना आमदनी-सहायता के रुप में छह हजारे मिलेंगे, रुपया सीधा किसानों के बैंक-खाते में जायेगा. लेकिन क्या आपने अंतरिम वित्तमंत्री के अंतरिम बजट के हिसाब किताब पर गौर किया कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों की तादाद कितनी है और उनके लिए सरकार ने कितना रुपया आबंटित किया है ?  बजट भाषण में वित्तमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि योजना के तहत जो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान परिवारों को 6000 रुपये की आमदनी-सहायता 2000 रुपये चौमाहे के हिसाब से दी जायेगी. वित्तमंत्री के मुताबिक योजना से लगभग 12 करोड़ किसान-परिवारों को फायदा होगा. आइए, पहले मंत्री के इसी दावे की परीक्षा करें : नवीनतम

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प्राथमिक शिक्षा : तीन सालों में डेढ़ गुणा से ज्यादा बढ़ी है ड्रॉपआउट रेटप्राथमिक शिक्षा : तीन सालों में डेढ़ गुणा से ज्यादा बढ़ी है ड्रॉपआउट रेट
January 28, 2019

छब्बीस जनवरी की परेड में रंग-बिरंगे कपड़ों में हिस्सेदारी करते स्कूली बच्चों की तस्वीरें जब आप टेलीविजन पर देख रहे होंगे तो देश में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के हालात बयान करती दो नई रिपोर्टस् सार्वजनिक जनपद में आ चुकी हैं. प्राथमिक स्तर की शिक्षा के सार्वीकरण के मोर्चे पर एक रिपोर्ट से अच्छी खबर निकलती है तो दूसरी रिपोर्ट से निकलते संकेत खतरे की घंटी हैं.   इस न्यूज एलर्ट में सबसे पहले गौर करते हैं खुशखबरी पर. हाल ही प्रकाशित एनुअल स्टेटस् ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट का एक निष्कर्ष है कि 2007 से अब तक के दस सालों से भी ज्यादा के अरसे में 6-14 साल के बच्चों के स्कूली नामांकन की दर 95 प्रतिशत से ज्यादा रही है. छह से चौदह साल के आयुवर्ग में अनामांकित बच्चों की तादाद 3 प्रतिशत से घटक 2018 में 2.8 प्रतिशत पर आ गई है.(देखें नीचे दी गई लिंक)   लेकिन क्या स्कूली नामांकन की इस

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