पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?

पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?

‘पैसा ना कौड़ी, बीच बाजार में दौड़ा-दौड़ी’- क्या आपने कभी ये कहावत सुनी है? इस कहावत का ठीक-ठीक अर्थ समझना हो तो इस बार के अंतरिम बजट की एक खास घोषणा को गौर से पढ़िये!

घोषणा हुई है कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को सालाना आमदनी-सहायता के रुप में छह हजारे मिलेंगे, रुपया सीधा किसानों के बैंक-खाते में जायेगा.

लेकिन क्या आपने अंतरिम वित्तमंत्री के अंतरिम बजट के हिसाब किताब पर गौर किया कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों की तादाद कितनी है और उनके लिए सरकार ने कितना रुपया आबंटित किया है ?

 बजट भाषण में वित्तमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि योजना के तहत जो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान परिवारों को 6000 रुपये की आमदनी-सहायता 2000 रुपये चौमाहे के हिसाब से दी जायेगी. वित्तमंत्री के मुताबिक योजना से लगभग 12 करोड़ किसान-परिवारों को फायदा होगा. आइए, पहले मंत्री के इसी दावे की परीक्षा करें :

नवीनतम कृषि जनगणना में दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान-परिवारों की तादाद 12.56 करोड़ (कुल 12,56,35,000) बतायी गई है. पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत अगर घोषणा के मुताबिक कुल 12.56 करोड़ किसान-परिवारों में से प्रत्येक को हर चौमाही 2000 रुपये बैंक-खाते में दिये जाते हैं तो सरकारी खजाने में इस मद में वितवर्ष 2018-19 में लगभग 25 हजार करोड़ (25127,00,00,00) रुपये होने चाहिए.(ध्यान रहे कि योजना 2018 के दिसंबर से लागू की जा रही है). लेकिन अंतरिम बजट में पीएम-किसान योजना को वित्तवर्ष 2018-19 ( आर.ई-संशोधित अनुमान)  में मात्र 20 हजार करोड़ रुपये आबंटित किये गये हैं. अब खुद हिसाब लगाइए कि पहली चौमाही में 2 हैक्टेयर की जोत वाले कितने किसान-परिवार को 2000 रुपये की आमदनी-सहायता से वंचित रहना पड़ सकता है ?

लेकिन मुश्किल इतनी भर नहीं कि 2 हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान-परिवारों की तादाद की तुलना में कम राशि आबंटित की गई है, एक पेंच यह भी है कि आखिर लाभार्थी किसान-परिवारों की पहचान कैसे हो ?

इस मुश्किल का रिश्ता कृषि-जनगणना और नेशनल सैम्पल सर्वे के तथ्यों से है. कृषि-गणना में 2 हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान-परिवारों की संख्या 12.56 करोड़ बतायी गई है. बात को आसान बनाने के गरज से हम यहां इन 12.56 करोड़ परिवारों को काश्तकार किसान-परिवार का नाम दे सकते हैं. लेकिन नेशनल सैम्पल सर्वे की रिपोर्ट (संख्या 571,70वां दौर) में 2 हैक्टेयर तक की जोत वाले किसान-परिवारों की संख्या 13.33 करोड़ (कुल 13,32,83,300) बतायी गई है. सुविधा के लिए आप इन्हें भूस्वामी किसान-परिवार का नाम दे सकते हैं.

मुश्किल ये है कि पीएम-किसान योजना में काश्तकार किसान-परिवार और भूस्वामी किसान-परिवार के बीच अन्तर नहीं किया गया और अन्तर ना करने से योजना का अमल खटाई में पड़ सकता है. 

काश्तकार किसान-परिवारों की कृषि-भूमि को कृषि-जनगणना में तकनीकी तौर पर ‘ऑपरेशनल होल्डिंग’ का नाम दिया गया है. ऑपरेशन होल्डिंग के मायने हुये ऐसी जमीन जिसका इस्तेमाल अंशतः या पूर्णतः खेती-बाड़ी के लिए होता है, यह इस्तेमाल चाहे कोई व्यक्ति कर रहा हो या फिर एक से ज्यादा व्यक्ति साथ मिलकर कर रहे हों- ऑपरेशनल होल्डिंग की गणना में इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता कि खेती की जमीन कहां है, किसकी मिल्कियत में है, उसकी वैधानिक स्थिति क्या है. मतलब, ऑपरेशनल होल्डिंग के अंतर्गत किसी किसान-परिवार के पास अपने स्वामित्व की जमीन भी हो सकती है और विभिन्न प्रकार के अनुबंधों के तहत प्राप्त कोई और जमीन(जैसे पट्टेदारी पर प्राप्त) भी.

लेकिन भूस्वामी किसान-परिवारों के जोतों की गणना का आधार कुछ और है. ऐसे परिवारों के जोतों को ओनरशिप होल्डिंग का नाम दिया गया है और नेशनल सैंपल सर्वे की रिपोर्ट संख्या 571(इसका नाम है हाउसहोल्ड ओनरशिप एंड ऑपरेशनल होल्डिंग्स इन इंडिया) में परिभाषा करते हुये कहा गया है कि जमीन का प्लॉट किसी परिवार के स्वामित्वाधिकार में गिना जायेगा अगर उसपर पुश्तैनी अधिकार परिवार के किसी एक या एक से अधिक व्यक्ति का चला आ रहा हो. ओनरशिप होल्डिंग में वैसे प्लाट की भी गिनती की जाती है जो लंबी अवधि के लिये पट्टे पर ली गई हो. 

कृषि मामलों के कुछ विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों को शंका है कि किसानों को दी जा रही आम-सहायता की योजना में भूमिहीन किसान, पट्टेदार किसान तथा बटाईदार किसान शामिल हैं भी या नहीं. गौरतलब है कि ऐसे किसानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिला किसानों की तादाद ज्यादा है. कृषि-जनगणना(2015-16) के मुताबिक सीमांत किसानों की तादाद 9,98,58,000 (लगभग 9.99 crore) और छोटी जोत के किसान-परिवारों की संख्या 2,57,77,000 (लगभग 2.58 करोड़) है. 

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. प्रभात पटनायक के मुताबिक चूंकि वित्तमंत्री के भाषण से ये स्पष्ट नहीं होता कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों का अर्थ भूस्वामी किसानों से लिया जाय या फिर काश्तकार किसानों से और वित्तमंत्री के भाषण से यह भी स्पष्ट नहीं है कि कृषि-परिवारों के जोत के अंतर्गत घराड़ी(होम-स्टीड) की जमीन शामिल है या नहीं सो बेहतर यही होगा कि ऐसे किसान-परिवारों को छोड़ते हुए जिनके पास सिर्फ घराड़ी भर की जमीन है, भू-स्वामी किसान परिवारों को आय-सहायता कार्यक्रम का संभावित लाभार्थी परिवार माना जाय. 0.002 से 2.000 हैक्टेयर जोत के ऐसे परिवारों की संख्या नेशनल सैंपल सर्वे की रिपोर्ट संख्या 571 में 13,32,83,300(लगभग 13.33 करोड़ बतायी गई है). प्रोफेसर पटनायक के मुताबिक 0.002 हैक्टेयर से कम जोत के भू-स्वामित्व को घराड़ी की जमीन माना जा सकता है और ऐसी जोत वाले परिवारों को भूमिहीन के अंतर्गत रखा गया है.

पीएम-किसान सम्मान निधि योजना में कृषि-परिवारों की तादाद में स्पष्टता ना होने के कारण सहायता के रुप में दी जा रही जरुरतमंद किसान-परिवारों तक पहुंचा पाना मुश्किल होगा. मिसाल के लिए, किसी आदिवासी परिवार के पास खेती-बाड़ी की जमीन परंपरागत जनजातीय नियमों के हिसाब से हो सकती है, जमीन की मिल्कियत बहुत संभव है जनजाति के मुखिया या फिर, गांव या जिला-परिषद् के पास हो. संभव है, किसी किसान-परिवार ने पट्टे पर जमीन ली हो और जमीन का स्वामित्व उसके समुदाय में निहित हो. इन दोनों ही मामलों में भू-स्वामित्व व्यावहारिक तौर पर काश्तकार के पास ना होने के कारण आय-सहायता के लिए उसे लक्षित करना मुश्किल होगा.
 
इस कथा के विस्तार के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक चटकायें:
 

NSS Report No. 571: Household Ownership and Operational Holdings in India, NSS 70th Round, January-December, 2013, please click here to access  

Agriculture Census 2015-16 (Phase-I): All India Report on Number and Area of Operational Holdings, Provisional Results, Agriculture Census Division, Ministry of Agriculture & Farmers' Welfare, please click here to access   

Notes on Demands for Grants 2019-20 for the Department of Agriculture, Cooperation and Farmers' Welfare, please click here to access 

Union Interim Budget Speech 2019-20 that was delivered by Shri Piyush Goyal on 1st February, 2019, please click here to access

 

Outlay on Major Schemes, Union Interim Budget 2019-20, please click here to access 

 

Manual of Schedules and Instructions for Data Collection, Agriculture Census 2015-16, please click here to access 

 

Marginal & holdings saw increased fragmentation & contracted size between 2010-11 and 2015-16, indicates latest Agriculture Census, News alert by Inclusive Media for Change dated 13th December, 2018, please click here to access  

The boundaries of welfare -Prabhat Patnaik, The Indian Express, 4 February, 2019, please click here to access  

Prof. Abhijit Sen, a former member of the erstwhile Planning Commission, interviewed by Asit Ranjan Mishra (Livemint.com), Livemint.com, 4 February, 2019, please click here to access  

Budget 2019: Farmer payout Rs 6,000 won’t cost much but won’t mean much either -Harish Damodaran, The Indian Express, 2 February, 2019, please click here to access  

Will the budget actually benefit farmers? -Jayati Ghosh, The Telegraph, 2 February, 2019, please click here to access  

 

Budget 2019: Behind Chest Thumping, Cuts in Welfare and Silence on Jobs -Subodh Varma, Newsclick.in, 1 February, 2019, please click here to access  

Modi Launches a Startling Pre-Election Budget, Massaged by Creative Accounting -Jayati Ghosh, TheWire.in, 1 February, 2019, please click hereto access  

Will farm loan waiver go the way of the property tax repeal? -Indira Rajaraman, Livemint.com, 4 January, 2019, please click here to access 

Press release by Swaraj Abhiyan and others on Interim Budget 2019, dated 1st February, 2019, please click here to access 



Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later