प्राथमिक शिक्षा : तीन सालों में डेढ़ गुणा से ज्यादा बढ़ी है ड्रॉपआउट रेट

प्राथमिक शिक्षा : तीन सालों में डेढ़ गुणा से ज्यादा बढ़ी है ड्रॉपआउट रेट

छब्बीस जनवरी की परेड में रंग-बिरंगे कपड़ों में हिस्सेदारी करते स्कूली बच्चों की तस्वीरें जब आप टेलीविजन पर देख रहे होंगे तो देश में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के हालात बयान करती दो नई रिपोर्टस् सार्वजनिक जनपद में आ चुकी हैं. प्राथमिक स्तर की शिक्षा के सार्वीकरण के मोर्चे पर एक रिपोर्ट से अच्छी खबर निकलती है तो दूसरी रिपोर्ट से निकलते संकेत खतरे की घंटी हैं.

 

इस न्यूज एलर्ट में सबसे पहले गौर करते हैं खुशखबरी पर. हाल ही प्रकाशित एनुअल स्टेटस् ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट का एक निष्कर्ष है कि 2007 से अब तक के दस सालों से भी ज्यादा के अरसे में 6-14 साल के बच्चों के स्कूली नामांकन की दर 95 प्रतिशत से ज्यादा रही है. छह से चौदह साल के आयुवर्ग में अनामांकित बच्चों की तादाद 3 प्रतिशत से घटक 2018 में 2.8 प्रतिशत पर आ गई है.(देखें नीचे दी गई लिंक)

 

लेकिन क्या स्कूली नामांकन की इस बढ़वार को हमारी शिक्षा-व्यवस्था आगे की कक्षाओं में बरकरार रखने में कामयाब हो पा रही है ? दूसरे शब्दों में, पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले क्या सभी बच्चे आठवीं दर्जे या इसके आगे(कम से कम 12वीं तक) की शिक्षा जारी रख पाते हैं ?

 

इस सवाल का जवाब एक जवाब मिलता है हाल ही में जारी स्कूल एजुकेशन इन इंडिया रिपोर्ट से. इस रिपोर्ट के मुताबिक बीते तीन सालों (2014-15 से 2016-17) में प्राथमिक स्तर पर स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की तादाद में लगभग डेढ़ गुणा की वृद्धि हुई है जबकि उच्च प्राथमिक स्तर(कक्षा पांच से आठ) पर बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की तादाद लगभग पौने दो गुणा बढ़ी है.(देखें नीचे दी गई लिंक)

 

यह रिपोर्ट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन(एनआईयूपीए) ने जारी की है. रिपोर्ट में देश भर के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के स्कूलों के 30 सितंबर 2016 तक के आंकड़ों का संकलन किया गया है.

 

एनआईएयूपीए की रिपोर्ट के अनुसार साल 2014-15 में प्राथमिक स्तर पर स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर(ड्राप आऊट रेट) 4.34 थी जो साल 2016-17 में बढ़कर 6.35 हो गई. इसी तरह अपर प्राइमरी स्तर पर स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर 2014-15 में 3.77 थी जो 2016-17 में बढ़कर 5.67 हो गई है. माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) पर भी स्कूली पर स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर बढ़ी है. तीन सालों में माध्यमिक स्तर पर यह दर 17.86 से बढ़कर 19.89 हो गई है.

 

सरकारी स्कूलों यानि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 6-14 साल के बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी निभा रहे स्कूलों में ड्रॉप-आऊट दर कहीं ज्यादा है. एनआईएयूपीए की उक्त रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में अखिल भारतीय स्तर पर सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट दर 6.34 थी जो साल 2016-17 में बढ़कर 7.43 हो गई है. इसी तरह अपर-प्राइमरी स्तर पर सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट दर तीन सालों में 11.53 से बढ़कर 12.97 पर पहुंची है.

 

आठ साल तक की शुरुआती पढ़ाई पूरी ना कर पाने वाले बच्चों में लड़कों की तुलना में लड़कियों, खासकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों की संख्या ज्यादा है. मिसाल के लिए, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के एजुकेशनल स्टैटिस्टिक्स ऐट ए ग्लांस 2018 के तथ्यों को देखा जा सकता है. इस रिपोर्ट के मुताबिक अपर प्राइमरी स्तर पर साल 2014-15 में लड़कों में 3.49 और लड़कियों में 4.60 थी लेकिन अनूसूचित जाति के लड़कों के लिए यही आंकड़ा 5.00 और लड़कियों के लिए 6.03 का था. मानव संसाधन मंत्रालय की इस रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में अपर प्राइमरी स्तर पर स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले लड़कों की दर 8.48 तथा लड़कियों में 8.71 थी.

 

सवाल उठता है, आठ साल की जरुरी पढ़ाई ना कर पाने वाले बच्चों की तादाद इतनी ज्यादा क्यों है ? इस सवाल के कई उत्तर दिये जाते हैं लेकिन एक सर्वेक्षण आधारित उत्तर मानव संसाधन मंत्रालय की उक्त रिपोर्ट में दर्ज है. एजुकेशनल स्टैटिस्टिक्स ऐट ए ग्लांस 2018 के मुताबिक स्कूली पढ़ाई छोड़ने की प्रमुख वजह है पढ़ाई में दिलचस्पी का ना होना (23.80 प्रतिशत लड़के और 15.60 प्रतिशत लड़कियां). दूसरी बड़ी वजह है आर्थिक बाधाएं(23.70 प्रतिशत लड़के और 15.20 प्रतिशत लड़कियां). लड़कियों(29.70 प्रतिशत) के मामले में घरेलू कामकाज और लड़कों के मामले में आमदनी जुटाने के कामों में लगा होना(31.00 प्रतिशत) भी पढ़ाई बीच में छोड़ने की बड़ी वजहों में एक है.(पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार इंडिया टुडे)

 

इस कथा के विस्तार के लिए निम्नलिखित लिंक चटकायें:

 

एनुअल स्टेटस् ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट

http://img.asercentre.org/docs/ASER%202018/Release%20Mater
ial/aserreport2018.pdf

 

असर(2018) प्रेस विज्ञप्ति http://img.asercentre.org/docs/ASER%202018/Release%20Mater
ial/aser2018pressreleasehindi.pdf

 

SCHOOL EDUCATION IN INDIA(2016-17)

http://udise.in/Downloads/Publications/Documents/Flash_Sta
tistics_on_School_Education-2016-17.pdf

 

EDUCATIONAL STATISTICS AT A GLANCE(2018)

http://mhrd.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/statistic
s/ESAG-2018.pdf

 

Trends in school enrolment and dropout levels

https://www.livemint.com/Education/k1ANVHwheaCFWCupY3jkFP/
Trends-in-school-enrolment-and-dropout-levels.html

 

Why students in India drop out

https://www.livemint.com/Opinion/h9bmbiINg0iH0BcrbZ7ggO/Wh
y-students-in-India-drop-out.html
 




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