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अन्य नीतिगत पहल

 ास बात •ेती किसानी के लिए दिया जाने वाला कर्ज साल २००३-०४ में ८७००० करोड़ रुपये था जो साल २००७-०८ में बढ़कर २५०००० ला करोड़ हो गया।*

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आंकड़ों में गांव

ष 2011-12 में 15 प्रतिशत से भी कम हो गया है।एक आम भारतीय आज भी अपने व्यय का लगभग आधा ाद्य पदार्थों पर व्यय करता है जबकि भारत के कार्य बल का लगभग आधा भाग अपनी आजीविका हेतु आज भी कृषि

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शोध और विकास

ास बात • तेलहन, मक्का,पाम ऑयल और दालों से संबद्ध तकनीकी मिशन को चलते हुए दो दशक गुजर चुके हैं।दाल, पाम ऑयल और मक्का को साल १९९०-९१,१९९२ और १९९५-९६ में इस सिशन के अंतर

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ेतिहर संकट

ास बात · घाटे का सौदा जानकर तकरीबन २७ फीसदी किसान ेती करना नापसंद करते हैं। कुल किसानों में ४० फीसदी का मानना है कि विकल्प हो तो वे

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नीतिगत पहल

जिसके माध्‍यम से न सिर्फ भू-धारकों वरन लीज प्राप्‍तकर्ता की जरूरतों का भी ्‍याल रा गया है।   इस एक्‍ट के माध्‍यम से भू-धारक वैधानिक रूप से कृषि एव

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लघु ऋण

ास बात फिलहाल ३६ फीसदी ग्रामीण परिवार परिवार सांस्थानिक कर्जे के दायरे से बाहर हैं यानी सांस्थानिक कर्जे तक इनकी पहुंच नहीं है।* अगर प्रति परिवार दो हजार की सालाना रकम को

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वनाधिकार

स अधिकार विधेयक के दायरे में लाना शामिल है। मूल विधेयक में कट-ऑफ डेट (वह तारी जिसे कानून लागू करने पर गणना के लिए आधार माना जाएगा) ३१ दिसंबर, १९८० तय की गई थी जिसे बदलकर संशोधि

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शिक्षा का अधिकार

षा का अधिकार कानून का जायजा लेने के लिए एक अध्ययन किया है। अध्ययन में अग्रलिित राज्यों के जिलों को शामिल किया गया- आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झार कुछ और »

भोजन का अधिकार

 ास बात · ाद्य सुरक्षा विधेयक में कहा गया है कि देश के ग्रामीण क्षेत्र के 75 फीसदी और शहरी क्षेत्र के 50 फीसदी लोगों को ाद्य सुरक

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सूचना का अधिकार

रिव्यू 4.0)[/inside] के मुताबिक: मूल रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें   कहीं मु्य सूचना आयुक्त नहीं तो कहीं सूचना आयोग ही नहीं : गुजरात में 2018 की जनवरी के दूसरे प कुछ और »

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