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खबरदार

ैं-उर्जा-आपूर्ति, परिवहन और उद्योग। आवासीय और व्यावसायिक इमारतें, वनभूमि और खेती से होने वाले ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन की दर उपर्युक्त की तुलना में बहुत कम है। ** • पर्यावर

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शिक्षा

के भीतर दाखिला है तथा वे भी जिनका दाखिला नहीं है. कामकाजी युवजन में 79 प्रतिशत खेती-बाड़ी के काम में लगे हैं और यह तादाद खेती-बाड़ी की अपनी पारिवारिक जमीन पर यो

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आपदा और राहत

प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए बहुआयामी उपाय करने होंगे।* • भारत में अब भी खेती का एक बड़ा हिस्सा मानसून की बारिश पर निर्भर है।**    * डिसास्टर मैनेजमेंट इन इंडिया, मिनिस्ट

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असुरक्षित परिवेश

ं की तादाद साल १९७० में १४,५०० थी जो साल २००४ तक छह गुनी बढ़कर ९२,६१८ हो गई।$ • खेती में सर्वाधिक मारक दुर्घटनाएं बिजली चालित मशीनों पर काम के दौरान होती हैं। बिजली चालित मशीन

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मानव विकास सूचकांक

से कम 50 फीसदी का घाटा हो रहा है। • पानी की कुल खपत में से 70-85 फीसदी का इस्तेमाल खेती में होता है जबकि विश्व के अन्नोत्पादन के 20 फीसदी में पानी का इस्तेमाल अनुचित रीति से होता है।

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली

्न तबके के हिस्से में जा रहा है.   • पंजाब और हरियाणा में धान और गेहूं की खेती करने वाले सभी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित नीति के प्रति आगाह हैं लेकिन दलहन की कुछ और »

भुखमरी-एक आकलन

। ऐसे देशों में भारत भी शामिल है। भारत में ऐसा हरित क्रांति के दौर में हुआ जब खेती में उच्च उत्पादकता के लिए प्रौद्योगिकी पर विशेष बल दिया गया। सन् 1990 तक यही चलन देखने में आया

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छह एकड़ में करोड़ की उपज

ानों पर मेंथा उत्पादन की भेड़चाल हावी थी, उस समय राम सरन ने केला, टमाटर व आलू की खेती का गैर-पारंपरिक फसल चक्र अपनाया। 1995 तक गेहूं-धान की परंपरागत खेती में खपकर ब

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पलायन (माइग्रेशन)

गह पर लौट आ चुके होते हैं या फिर कहीं और जाने की तैयारी में होते हैं। गन्ने की खेती या फिर ईंट भठ्टा उद्योग में रोजगार के लिए मजदूरों का सामूहिक पलायन अब एक सुनिश्चित बात है। अ

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बेरोजगारी

ता। •             भारत में अब भी रोजगार देने के मामले में खेती का योगदान बहुत बड़ा है। साल 2010 में देश के कामगारों का 51.1 फीसदी को खेती से रोज

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