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सुखाड़ से फसलें हुई प्रभावित, झारखंड के 18 लाख कृषकों पर 9,892 करोड़ का लोन, किसानों को मदद की आस

यह राष्ट्रीय बेंचमार्क 18 प्रतिशत से कम है. क्या है कृषि आैर फसल ऋण कृषि ऋण खेती-बारी के अतिरिक्त अन्य जुड़े कार्यों के लिए दिया गया ऋण है. अगर कोई व्यक्ति डेयरी, पोल्ट्री, फि

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किसानों की खुशहाली का कारगर रोडमैप- जयंतीलाल भंडारी

सान लाभांवित होंगे। निश्चित रूप से आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लि

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बंगालः किसानों पर ‘ममता’, जीवन बीमा और वित्तीय सहायता देगी सरकार

, ‘बंगाल में कृषि भूमि का बहुत बड़ा क्षेत्र है. हमारे पास 72 लाख परिवार हैं, जो खेती के माध्यम से अपनी आजीविका कमाते हैं. हमारी सरकार हर परिवार को हर साल दो किस्तों में 5,000 रुपये प

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कमार आदिवासियों की देसी खेती-- बाबा मायाराम

था। उनकी संस्था कई क्षेत्रों में काम कर रही है।   खासतौर से देसी धान की खेती को बढ़ावा देने और बाड़ी (किचिन गार्डन) के काम ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उनके अपने खेत में कई

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कृषि जोतों के आकार में कमी चिन्ता का सबब: नई कृषि जनगणना

खेती-किसानी के मोर्चे से एक बुरी खबर आयी है. नयी कृषि जनगणना के आंकड़ों का संकेत है देश में कृषि जोतों का औसत आकार लगातार कम हो रहा है.(आंकड़ों के लिए देखें नीचे दी गई लिंक)  

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प्याज का खेल, खिलौना बने किसान

िछले कुछ सालों में किसानों को जब लहसुन के भाव नहीं मिले तो उन्होंने प्याज की खेती की ओर रुख इस उम्मीद के साथ किया कि यह कम से कम घाटे का सौदा तो नहीं रहेगा। इसी उम्मीद के साथ किस

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किसानों की नाराजगी का नतीजा-- नीरजा चौधरी

नतीजों ने किसानों को फिर से राजनीति के केंद्र में ला दिया है। संदेश साफ है कि खेती-किसानी के हित में हमारे नेताओं को अब गंभीरता से सोचना ही होगा। जनादेश बता रहा है कि लोग अब अपन

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हकीकत को जानने का नया औजार-- कार्तिक मुरलीधरन

धु (किसानों का मित्र) में किया गया। इस योजना में तेलंगाना सरकार ने किसानों को खेती के हर सीजन में बीज और खाद जैसी महत्वपूर्ण लागत के भुगतान में मदद के लिए प्रति एकड़ 4,000 रुपये दिए

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सियासी दलों पर किसानों का कर्ज-- गोपालकृष्ण गांधी

?   साईनाथ ने बताया है कि यह कदम कृषि अर्थव्यवस्था की बुनियाद, खासतौर से खेती-किसानी की स्थिरता में कारगर नहीं है, जो वास्तव में खतरे में भी है। जबकि किसानों का जीवन इसी पर

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मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?

खेती-किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने गुजरे चार सालों में क्या कुछ किया है, उसपर आप महज एक घंटे में राय बनाना चाहते हैं तो फिर यह पुस्तक आप ही के लिए है.(पुस्तक आप यहां

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