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ऐसा कर्ज तो किसान को डुबोएगा ही-- सोमपाल शास्त्री

र दिल्ली की सड़कें नापते रहे। बीते कुछ महीनों में यह तीसरा मौका था, जब वे अपनी खेती-किसानी छोड़कर अपने हक के लिए देश की राजधानी में थे। कर्ज माफी और फसलों के उचित दाम के अलावा उनक

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आपदा या बड़े खतरे की दस्तक-- एस. श्रीनिवासन

हुए। इस तूफान में कम से कम 45 लोगों की जान गई और इन्फ्रास्ट्रक्चर, संपत्ति व खेती-किसानी को भारी नुकसान पहुंचा। तूफान अपने रास्ते में आने वाले सभी को उड़ा ले गया। इसमें बड़ी सं

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धरती पर गर्मी बढने से 15 करोड़ लोगों पर असर : रिपोर्ट

हे लोगों के लिए। उच्च तापमान वाली परिस्थितियों में खुले में काम करना, खासकर खेती-बाड़ी में नुकसानदेह हो गया है। साफ हवा के लिए 102 शहरों में कड़े नियम की तैयारी, 30% कम होगा प्रद

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प्राथमिकता नहीं है पर्यावरण-- ज्ञानेन्द्र रावत

रे में पड़ने से कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या बढ़ेगी. मॉनसून पर निर्भर हमारी खेती-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत खतरनाक होगा. जरूरत है स्वच्छ और सुरक्षित उर्जा की तरफ तेज

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किसानों के प्रति उदासीनता- योगेन्द्र यादव

ी मदद करनी है, तो उसे किसानी के श्राप से मुक्त होने में मदद करो. वह मानता है कि खेती और किसानी तो अतीत के अवशेष हैं, आधुनिक दुनिया में भविष्य बनाने के लिए इनका कोई काम नहीं है. यह

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किसानों का मार्च (पार्ट-1): जितना गहरा है कृषि संकट, उतनी ही हल्की है इससे निपटने की समझ

ी नहीं कि कृषि-क्षेत्र से सबसे ज्यादा यानी 49 फीसद लोगों को रोजगार हासिल है और खेती-बाड़ी के सहारे देश की 70 फीसद आबादी को जीविका चलाने में मदद मिलती है लेकिन इसी कृषि की राष्ट्र

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ग्राउंड रिपोर्ट: सूखे बिहार में इस बार का छठ “पर्व” जैसा नहीं है, क्यों?

पुर के चातर गांव के उदय पासवान ने मालगुजारी पर ज़मीन लेकर ढाई बीघा में धान की खेती की है. पंद्रह कट्ठे में मक्का भी बोया था लेकिन पानी की कमी के कारण मक्के की फसल खेत में ही सू

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वैश्विक तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा तो चौपट हो जाएगी खेती

यदि वैश्विक तापमान वृद्धि पर आईपीसीसी की रिपोर्ट में जताई गई चिंताओं पर संज्ञान नहीं लिया गया तो यह भारतीय कृषि के लिए घातक साबित हो सकता है। इसमें मानसून पैटर्न में बदलाव की आशंका के साथ गंग

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किसान आंदोलन का नया स्वरूप- मणीन्द्र नाथ ठाकुर

किसानों के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि खेती किसानी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यह तो तय है कि जैसे-जैसे उत्पादन में उद्योग धंधे और पूंजी का महत्व बढ़ता जायेगा, वैसे-वैस

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क्या कहता है यह बिगड़ता मौसम-- विजेता रत्तानी

खड़ी खरीफ और नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हिमाचल प्रदेश में भी सेब की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। जान-माल का नुकसान तो खैर इन सभी सूबों में हुआ है। गौर कीजिए, इन सबकी

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