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ग्राम स्वराज पर पुनः चिंतन-- मणीन्द्र नाथ ठाकुर

को मिला. प्रसिद्ध मृदा वैज्ञानिक पीआर मिश्रा ने इस आदिवासी इलाके में सहकारी खेती का अद्भुत नमूना पेश किया था. ग्रामीण संस्कृति काे बचाने का यह सराहनीय प्रयास था. एक प्रयोग

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लापरवाही : दो लाख 80 हजार किसानों को नहीं मिला बीमा का लाभ

में 2 लाख 60 हजार टन उर्वरक उठाव की योजना राज्य शासन ने बनाई है। डेढ़ महीने बाद खेती किसानी की फिर होगी तैयारी 15 जून से मानसून की शुस्र्आत हो जाती है,लिहाजा किसान डेढ़ महीने बाद

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बदल दिया खेती का पैटर्न, हर माह 30 हजार कमा रही ये महिला

त्तीसगढ़)। सौर सुजला योजना की प्रेरणा से रोकबहार की दुतिका मरावी ने मिश्रित खेती में कुछ अलग कर दिखाया है। रासायनिक उर्वरकों की जगह देशी गोबर खाद का उपयोग करते हुए जहां गुणव

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अर्थशास्त्रियों-समाजशास्त्रियों ने नीति आयोग को कटघरे में खड़ा किया, PM मोदी से की सीइओ को हटाने की मांग

. निजी उद्योग को सहुलियतें दी जा रही हैं. छोटे उद्यमी और कारोबारी परेशान हैं. खेती की स्थिति बदहाल है. इन परिस्थितियों में विकास के मूल समस्याओं और उनके निर्धारक तत्वों की आलो

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साकार होता ग्राम-स्वराज का सपना - नरेंद्र सिंह तोमर

पर ज्यादा जोर दिया गया है। मनरेगा के लिए आवंटित निधियों की 68 प्रतिशत धनराशि खेती से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च की गई है। 12 करोड़ 56 लाख से अधिक जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं। दस करो

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किसान-आत्महत्याओं में कमी लेकिन खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याओं में बढ़ती के रुझान

एक साल के दरम्यान खेती-किसानी के काम में लगे लोगों की आत्महत्या घटनाओं में 9.8 फीसद की कमी आई है- क्या इस तथ्य को खेती-किसानी की हालत में सुधार का संकेत मानें ? य

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सामान्य मानसून से कृषि उत्पादन का बनेगा नया रिकॉर्ड: कृषि सचिव

षि के साथ साथ अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा के समान है. देश की 50 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है और सकल घरेलू उत्पादन ( जीडीपी ) में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान 15 प्रतिशत त

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चंपारण से निकला रास्ता- राजू पांडेय

चंपारण सत्याग्रह नील की खेती करने वाले किसानों के अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष के रूप में विख्यात है। इसके एक सदी बाद भी देश का किसान बदहाल है। 2010-11 के आंकड़ों के अनुसार, देश के

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छग: ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर, लेकिन सिंचाई का ही सिस्टम ध्वस्त

रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र में 2003 से 2013 तक भाजपा विधायक के कार्यकाल में सड़क, पुल-पुलियों और सिंचाई के लिए बांध बनाने में सबसे ज्यादा खर्च हुआ। पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस के विधायक हैं, जो क

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जाति के जाल से कर्नाटक भी नहीं बचा-- एस श्रीनिवासन

सूबों के मुकाबले बेहतर है, फिर भी इसकी अपनी कुछ समस्याएं तो हैं ही। राज्य में खेती-किसानी काफी दबाव में है। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2012 से 2017 के बीच वहां 3,500 से अधि

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