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अर्थव्यवस्था की आगे की राह-- अरविन्द कुमार सिंह

े शुरू कर दिए हैं। स्वयं चीन के कारोबारियों का कहना है कि पिछले तीन सालों में मजदूरी दोगुनी होने और गुणवत्ता पर ध्यान देने से चीन में बने सामान भी सस्ते नहीं रह जाएंगे। अब अगर

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भारत के 1 फीसदी लोगों के पास 73% आबादी से अधिक धन-दौलत

दौलत है. सर्वे के मुताबिक यह असमानता इतनी ज्यादा है कि ग्रामीण भारत के एक मजदूर को देश के गारमेंट फर्म के किसी टॉप सीईओ के एक साल के वेतन के बराबर कमाने में 941 साल लग जाएंगे.

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आधार पर निराधार हैं आपत्तियां - रविशंकर प्रसाद

ास आधार उपलब्ध है। कल तक भ्रष्टाचार और शासकीय संवेदनहीनता से जूझ रहे मनरेगा मजदूर के चेहरे पर आज इसलिए मुस्कान है, क्योंकि आधार के कारण उसकी कड़ी मेहनत का मेहनताना सीधे उसके ब

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नोटबंदी के तुरंत बाद दिहाड़ी मजदूरों ने सबसे ज्यादा गंवाये रोजगार के अवसर-- नई रिपोर्ट

नोटबंदी के तुरंत बाद के तीन महीनों में दिहाड़ी मजदूरों के रोजगार के अवसरों में सबसे ज्यादा कमी आई. इस तथ्य का खुलासा लेबर ब्यूरो की हाल की तिमाही रिपोर्ट से होता है. रिपोर्ट म

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राजनीतिक शक्ति बनें किसान-- राजकुमार सिंह

के लिए गांव से शहर जाने की प्रवृत्ति अब जीवनयापन के लिए किसी भी तरह की मेहनत-मजदूरी करने की मजबूरी में बदल गयी है। हर शहर के बाहरी, या अब अंदरूनी इलाकों में भी, जो तेजी से बढ़ती

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बोलने की आजादी बनाम बड़बोलापन-- रमेश दवे

ा का उपयोग न करता हो। कितनी बड़ी विडंबना है कि इस देश का किसान, गरीब और ग्रामीण मजदूर प्रशासन और पुलिस की सर्वाधिक अपमानजनक भाषा का शिकार होता है। इसलिए आवश्यक है कि राजनेता पह

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बाल मजदूरी की जड़ें--- देवेन्द्र जोशी

है लेकिन विडंबना यह है कि यहां पहले से ही यह मान कर चला जाता है कि बच्चे इसलिए मजदूरी करते हैं कि इससे उनके परिवार का खर्च चलता है। यह तर्क अपने आप में इसलिए छलावा है कि इसको सच

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आधार निराधार--- तवलीन सिंह

र्ड। मुझे ऐसे लोग मिले, जिनके पास कार्ड तो है, लेकिन उनकी अंगुलियों की लकीरें मजदूरी के कारण इतनी घिस गई हैं कि बायोमेट्रिक पहचान नहीं हो पाती। एक बुजुर्ग ने मुझे बताया, ‘हमन

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ई-कचरे की अनदेखी के खतरे-- सतीश सिंह

ठोर पर्यावरणीय नियमों का अभाव, प्रभावशाली तंत्र के न होने और अपेक्षया सस्ते मजदूरों की मौजूदगी की वजह से विकसित देशों के लिए ऐसा करना आसान है। एक मोटे आकलन के मुताबिक भारत मे

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बेसहारा बच्चों की फिक्र किसे है--- विशेष गुप्ता

-से ठेकेदार बिहार व बंगाल के गरीब परिवारों से बच्चों को लाकर उनसे यहां बंधुआ मजदूरी करवा रहे हैं। रेलवे विभाग व सुरक्षा एजेंसियां इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं।     इ

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