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वाहन उद्योग: सुस्ती से उबारने के लिए निजी वाहन नहीं, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना जरुरी है

म बहुत संभव है निजी वाहनों के उपभोग को बढ़ाने में सक्षम साबित ना हों क्योंकि कामगार तबके के पारिश्रमिक में ठहराव बना है और इस वर्ग के वेतन में वृद्धि बहुत धीमी गति से हो रही है

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ट्रैक्टरों की खरीद में कमी से जानिये बढ़ते ग्रामीण-संकट का हाल, इस न्यूज एलर्ट में

न हाल के विश्लेषणों से पता चलता है कि ग्रामीण मांग में आयी कमी का बड़ा रिश्ता कामगार तबकी की वास्तविक मजदूरी में आयी कमी से है.   इस कथा के विस्तार के लिए निम्नलिखित लिंक्

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नरेगा के बजट मे कटौती और आधार लिंकित भुगतान कामगारों के हक का उल्लंघन: नरेगा संघर्ष मोर्चा

ुक्त तकनीक के इस्तेमाल के कारण तथा समुचित मात्रा में फंड ना होने से नरेगा के कामगारों के कानूनी हक का उल्लंघन और ज्यादा बढ़ गया है. लेकिन नरेगा में हो रहे तकनीकी हस्तक्षेप के

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जीरो बजट कृषि का विचार नोटबंदी की तरह घातक है- राजू शेट्टी

े हैं। दो देश हैं। एक इंडिया [शहरी] और दूसरा भारत [ग्रामीण]। इंडिया के लोगों को कामगारों की सख्त ज़रूरत है जिन्हें काम पर रखने का ख़र्च बढ़ गया है। वे चाहते हैं कि इंडिया सस्ते द

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श्रम संकट से जूझते जापान की बढ़ती उलझनें

के कई कदम उठाने की बात भी कही है। जापान की सरकार देश के बाहर से चार लाख विदेशी कामगार लाना चाहती है और वह भी सिर्फ पांच वर्षों के लिए। जापान की संसद में जब यह मामला आया है, तो विप

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बेरोजगारी दर कैसे 6.1 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकती है, पढ़िए इस न्यूज एलर्ट में

़े राज्यों में नजर आ रहा है और यह रुझान ग्रामीण तथा शहरी एवं स्त्री तथा पुरुष कामगारों पर समान रुप से लागू होता है.   ---- देश की सर्वाधिक आबादी वाले 22 राज्यों में कोई भी राज्

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कम नहीं चुनाव आयोग की शक्तियां- नवीन चावला

ायद बेरोजगारी, खराब होते कामकाजी माहौल और स्थिर कमाई के चलते ही श्रमिकों या कामगारों के बीच धुु्रवीकरण नहीं हो पा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि श्रम के आधार पर कोई धु्रवीकरण न हुआ

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तीस लाख मतदाता चाहें भी तो इस चुनाव में मतदान नहीं कर सकते- आखिर क्यों, पढ़िए इस एलर्ट में !

, मतदाता होने पर गर्व महसूस करें.' लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि भारत की एक बड़ी कामगार आबादी चाहे तो भी वोट नहीं कर सकती ? ऐसे कामगारों में एक नाम आता है ईंट भट्ठ

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भोपाल गैस त्रासदी 20वीं सदी की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक: संयुक्त राष्ट्र

है कि हर साल पेशे से जुड़ी दुर्घटनाओं और काम के चलते हुईं बीमारियों से 27.8 लाख कामगारों की मौत हो जाती है. इसके अलावा 374 मिलियन मजदूर गैर औद्योगिक दुर्घटनाओं से प्रभावित होते है

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समस्या की अनदेखी करते समाधान-- हिमांशु

और फसलों की कम कीमत के कारण किसानों की आमदनी घटी है। नोटबंदी और जीएसटी ने भी कामगारों को नौकरी देने और मांग पैदा करने की असंगठित क्षेत्र की क्षमता को प्रभावित किया है। नतीजत

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