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बच्चों में कुपोषण दूर करने के लक्ष्य से कितना पीछे है भारत, पढ़ें इस न्यूज एलर्ट में

ोगी.   गौरतलब है कि रुद्धविकास(स्टंटेड ग्रोथ) लंबे समय तक कायम रहने वाले कुपोषण का एक लक्षण है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत को रुद्धविकास से पीड़ित बच्चों की संख्या 25 फीसद के

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सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था- केसी त्यागी

िशेषज्ञ अब तक इसे अज्ञात बीमारी बता रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों ने भीषण गर्मी, कुपोषण और जागरूकता के अभाव आदि को इसका तात्कालिक कारण माना है. इस भीषण त्रासदी पर दलगत राजनीति भी

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क्यों 25 साल बाद भी हमें नहीं पता कि बच्चों को चमकी बुखार से कैसे बचाया जाए?-- सचिन जैन

कर रह गए हैं. वर्तमान विकास की चर्चाओं में हम बस शिशु मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर, कुपोषण का प्रतिशत, बच्चों के साथ लैंगिक शोषण के आंकड़े और मृत बच्चों की संख्या की गणना करते रहते है

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गरीबी का वायरस और चमकी बुखार- विनोद बंधु

ज्ञ टी जैकब जॉन ने चमकी बुखार के बारे में अध्ययन किया था। उनका निष्कर्ष था कि कुपोषण और गंदगी इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं। पारा चढ़ने के साथ लीची की पैदावार आती है। वैसे बच्चे, जिन्

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आर्थिक असमानता लोगों को मजबूर कर रही है कि वे बीमार तो हों पर इलाज न करा पाएं- सचिन जैन

ों के जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है. सबसे विपन्न तबकों में बाल मृत्यु दर और कुपोषण के स्तर को देखते हुए, यह समझ लेना होगा कि लोक सेवाओं और अधिकारों के संरक्षण के बिना न तो ग़ै

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जब सोच बदलेगी तो खिलेंगी बेटियां-- रमा गौतम

ातर परिवारों में बेटियों की परवरिश पर बेटों की तरह ध्यान नहीं दिया जाता। वे कुपोषण की शिकार हो जाती हैं और चार साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उनमें से ज्यादातर विभिन्न बीमार

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कृषि में बेहतर होता बिहार-- के सी त्यागी

ों को हताश नहीं होने देगा. मौजूदा कृषि संकट के दौर में किसानों को कर्ज, घाटे, कुपोषण, भुखमरी व आत्महत्या की मनोदशा से बाहर निकालने की जरूरत है. जहां तक बिहार विशेष का सवाल है, य

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समस्या की अनदेखी करते समाधान-- हिमांशु

यह इतना सरल नहीं है, और उस देश के लिए तो बिल्कुल ही निंदनीय है, जहां भुखमरी और कुपोषण अब भी सुर्खियों में रहते हैं। बेशक इसके लिए अनावश्यक आयात, बाजार पर प्रतिबंध और कुछ उत्पाद

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प्राथमिकता नहीं है पर्यावरण-- ज्ञानेन्द्र रावत

परिणाम भयंकर पेयजल संकट के रूप में भी होगा. खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ने से कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या बढ़ेगी. मॉनसून पर निर्भर हमारी खेती-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018: किसी फैसले पर पहुंचने से पहले इस न्यूज एलर्ट को जरुर पढ़ें

पद्धति (मेथ्डोलॉजी) में बदलाव हुआ. देशों का जीएचआई अंकमान तय करने के लिए बाल-कुपोषण की गंभीरता दिखाती दो स्थितियों चाइल्ड स्टंटिंग (5 साल से कम उम्र के बच्चों का अनुपात जिनकी

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