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जाति के समीकरण का टूटना- मनीषा प्रियम

माना गया था। चर्चा यह भी थी कि जीएसटी की उलझन में व्यापारी वर्ग उलझ गया है और कृषि-संकट किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। फिर, इन राज्यों में भाजपा को सीधे कांग्रेस से भी टकरान

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समस्या की अनदेखी करते समाधान-- हिमांशु

ि-कर्ज चुकाने से राहत दी है। ये कदम हमें उन मूल मुद्दों से भी भटकाते हैं, जो कृषि-संकट के कारण हैं। कर्ज का जाल असल में इस बात का संकेत है कि कृषि आय में भयंकर गिरावट आई है। किस

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किसानों का मार्च (पार्ट-2): जमीन पर बेकार हैं कृषि नीतियां, मौजूदा सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत

कृषि-संकट कोई अचानक आ धमका हो ऐसी बात नहीं. जैसा कि नीति आयोग के एक रिपोर्ट में कहा गया है, समस्या की शुरुआत 1991-92 से होती है- इससे पहले अर्थव्यवस्था के खेतिहर और गैर-खेतिहर क्षेत्

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किसानों का मार्च (पार्ट-1): जितना गहरा है कृषि संकट, उतनी ही हल्की है इससे निपटने की समझ

ं 29-30 नवंबर को हो रहा है. इसकी मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और उसमें कृषि-संकट पर चर्चा की जाए. ये ‘मार्च' चुनाव के वक्त होते हैं या फिर उस घड़ी, जब विधानसभा/लोकसभा का

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किसान-आत्महत्याओं में कमी लेकिन खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याओं में बढ़ती के रुझान

प से खेती पर निर्भर लोगों की आत्महत्या की तादाद में आयी कमी के आधार पर देश के कृषि-संकट के बारे में कोई राय बनाने से पहले इन तथ्यों पर गौर करें: साल 2015 में किसान आत्महत्याओं की स

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किसान-आत्महत्या : सबसे ज्यादा परेशान सीमांत और छोटे किसान !

है. किसान-आत्महत्या के नये आंकड़े संकेत करते हैं कि बीते 2 सालों में देश में कृषि-संकट और ज्यादा गहरा हुआ है.   खेतिहर मजदूर से ज्यादा किसानों की आत्महत्या एनसीआरबी की नई

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इन्क्लूसिव मीडिया-यूएनडीपी फेलोशिप : परिणाम घोषित!

्नलिखित है: 1.      भरत डोगरा, स्वतंत्र पत्रकार ( बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि-संकट, किसान-आत्महत्या तथा जीविका के मुद्दे पर केंद्रित शोध-प्रस्ताव)   2.      कुणाल द

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बढ़ रही है कर्जदार किसानों की तादाद- एनएसएसओ

विकास के बहुमुखी हल्ले के बीच कृषि-संकट जारी है। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से रह-रह कर आ रही किसान-आत्महत्याओं की खबरों के बीच राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण(एनएसएसओ)

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पत्रकारों के लिए इन्कूलिसिव मीडिया फैलोशिप 2012-13- आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ायी गई

जीन / रेडियो या टीवी के लिए काम करने वाला हर पत्रकार भारत के ग्रामीण विकास और कृषि-संकट से संबंधित विषय पर आवेदन कर सकता है। बहरहाल, फैलोशिप के लिए मुख्यधारा की मीडिया से जुड़

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इन्क्लूसिव मीडिया फैलोशिप (2011)--- परिणाम घोषित

ीसगढ़ पोस्ट- मध्यप्रदेश के होशंगाबाद और हरदा जिले में खेती की बढ़ती लागत और कृषि-संकट), पाणिनी आनंद( राजस्थान पत्रिका के लिए लिखेंगे, परियोजना प्रस्ताव बारां, अलवर, सीकर, भीलव

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