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आंकड़े बताते हैं कि खेती में आमदनी दोगुनी करने का नारा जुमला ही रहने वाला है- रवीश कुमार

में 46 प्रतिशत की यह कमी भयावह है. यह आंकड़े सेंट्रल स्टैटिस्टिक ऑफिस के हैं. खेती के मामले में इस साल का पिछले साल से तुलना करने में दिक्कत होती है क्योंकि 52 प्रतिशत कुछ और »

संकट के दोराहे पर हैं आदिवासी-- गिरिधारी राम गौंझू ‘गिरिराज

के बीच खाली स्थान पर, पहाड़ों के नीचे और नदियों के किनारे खेत, चांवरा, टांड़ आदि खेती करने के लिए बनाए। जंगल, पहाड़, नदी ही नहीं, जंगली जानवरों को भी इन्होंने बचाकर रखा। सदानों ने &lsqu

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खेती फायदेमंद तभी किसान खुशहाल-- मोंटेक सिंह अहलूवालिया

खेती-किसानी की बदहाली की खबरें इधर काफी सुर्खियों में रही हैं। अटकलें लगाई जा रही थीं कि अंतरिम बजट में आय हस्तांतरण से जुड़ी कुछ योजनाएं घोषित की जाएंगी। ऐसा हुआ भी। प्रधानम

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पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?

है. ऑपरेशन होल्डिंग के मायने हुये ऐसी जमीन जिसका इस्तेमाल अंशतः या पूर्णतः खेती-बाड़ी के लिए होता है, यह इस्तेमाल चाहे कोई व्यक्ति कर रहा हो या फिर एक से ज्यादा व्यक्ति साथ म

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किसानों को मिले दीर्घकालिक हल-- आशुतोष चतुर्वेदी

श की, जो चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. वित्त मंत्री ने दो हेक्टेयर तक खेती करने वाले छोटे किसानों को सालाना 6000 रुपये की मदद देने की घोषणा की है. यह रकम 2-2 हजार रुपये की त

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क्यों सरकारी योजनाओं के बावजूद झारखंड की आदिम जनजातियों को खाने की किल्लत से दो-चार होना पड़ता है- विवेक कुमार

अपना जीवन बिता रहे है. परिवार की आय का मुख्य स्रोत अकुशल मज़दूरी है. इनके पास खेती योग्य भूमि नही हैं. अमरेश को मुश्किल से एक महीने में 8 से 10 दिन ही 150 रुपये/प्रतिदिन की मज़दूरी

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झारखंड बजट 2019-20 : किसानों को प्रति एकड़ मिलेंगे पांच हजार, बजट का आकार 7231 करोड़ रुपये

ज्य सरकार ने मास्टर ट्रेनर बनाया है. सभी किसानों को सूक्ष्म सिंचाई योजना से खेती की जानकारी दी गयी है. राज्य सरकार ने आनेवाले वित्तीय वर्ष में भी मीठी क्रांति स्कीम चलाने का

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हर खेत को पानी के सुंदर सपने को पूरा करने में सावधानी जरूरी

ंध में कोई पक्की बात विशेषज्ञ ही बता सकते हैं. पर, इस देश का ‘पारंपरिक विवेक' खेती के लिए भूजल की जगह सतही जल के इस्तेमाल के पक्ष में रहा है. इसलिए, हजारों साल से भूजल संकट नहीं

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आजाद मीडिया के पक्ष में तर्क-- मृणाल पांडे

े को बाध्य थी. सामंती युग में उसकी जीवनधारा शासक निरपेक्ष थी. उसकी मड़ैया में खेती, हारी-बीमारी, शादी-ब्याह भगवान या साहूकारों के भरोसे ही थे. पशु मेलों-मंडियों में खरीद-फरोख्त

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महिला किसानों का संगम रेडियो- बाबा मायाराम

दायिक रेडियो की कहानी सुनी। सामुदायिक रेडियो की शुरूआत पौष्टिक अनाजों की खेती के प्रचार-प्रसार से हुई। पौष्टिक अनाज जैसे- ज्वार, सांवा, कोदो, कुटकी, रागी, काकुम, बाजरा, दालें

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