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हर खेत को पानी के सुंदर सपने को पूरा करने में सावधानी जरूरी

ंध में कोई पक्की बात विशेषज्ञ ही बता सकते हैं. पर, इस देश का ‘पारंपरिक विवेक' खेती के लिए भूजल की जगह सतही जल के इस्तेमाल के पक्ष में रहा है. इसलिए, हजारों साल से भूजल संकट नहीं

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आजाद मीडिया के पक्ष में तर्क-- मृणाल पांडे

े को बाध्य थी. सामंती युग में उसकी जीवनधारा शासक निरपेक्ष थी. उसकी मड़ैया में खेती, हारी-बीमारी, शादी-ब्याह भगवान या साहूकारों के भरोसे ही थे. पशु मेलों-मंडियों में खरीद-फरोख्त

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महिला किसानों का संगम रेडियो- बाबा मायाराम

दायिक रेडियो की कहानी सुनी। सामुदायिक रेडियो की शुरूआत पौष्टिक अनाजों की खेती के प्रचार-प्रसार से हुई। पौष्टिक अनाज जैसे- ज्वार, सांवा, कोदो, कुटकी, रागी, काकुम, बाजरा, दालें

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वो पेंशन रोक सकते हैं, पर खाना खाने से नहीं: जस्टिस चेलमेश्वर

जजों ने मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ इस तरह सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोला था. खेती कर रहे हैं चेलमेश्वर न्यामूर्ति चेलमेश्वर एक बार फिर सुर्ख़ियों में आए जब उन्होंने अपनी रि

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इस साल बढ़ेगा जीडीपी का आकार-- डा. जयंतीलाल भंडारी

िसान लाभान्वित होंगे. निश्चित ही आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंधित खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लि

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कृषि को लेकर नीतियां बहुत हैं लेकिन किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर नहीं: संसदीय समिति

ल बीमा योजना और सरकार द्वारा लागू की गई न्यूनतम समर्थन योजना किसानों के लिए खेती को फायदे का व्यवसाय बनाने में सक्षम नहीं है.' समिति ने ये भी कहा कि सरकार टिकाऊ कुछ और »

सुखाड़ से फसलें हुई प्रभावित, झारखंड के 18 लाख कृषकों पर 9,892 करोड़ का लोन, किसानों को मदद की आस

यह राष्ट्रीय बेंचमार्क 18 प्रतिशत से कम है. क्या है कृषि आैर फसल ऋण कृषि ऋण खेती-बारी के अतिरिक्त अन्य जुड़े कार्यों के लिए दिया गया ऋण है. अगर कोई व्यक्ति डेयरी, पोल्ट्री, फि

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किसानों की खुशहाली का कारगर रोडमैप- जयंतीलाल भंडारी

सान लाभांवित होंगे। निश्चित रूप से आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लि

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बंगालः किसानों पर ‘ममता’, जीवन बीमा और वित्तीय सहायता देगी सरकार

, ‘बंगाल में कृषि भूमि का बहुत बड़ा क्षेत्र है. हमारे पास 72 लाख परिवार हैं, जो खेती के माध्यम से अपनी आजीविका कमाते हैं. हमारी सरकार हर परिवार को हर साल दो किस्तों में 5,000 रुपये प

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कमार आदिवासियों की देसी खेती-- बाबा मायाराम

था। उनकी संस्था कई क्षेत्रों में काम कर रही है।   खासतौर से देसी धान की खेती को बढ़ावा देने और बाड़ी (किचिन गार्डन) के काम ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उनके अपने खेत में कई

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