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जीरो बजट कृषि का विचार नोटबंदी की तरह घातक है- राजू शेट्टी

ा।   शून्य बजट प्राकृतिक कृषि क्या है? क्या यह भारत में दशकों पहले जैविक खेती या पारंपरिक कृषि पद्धति के तरीकों से अलग है? पूर्व सांसद राजू शेट्टी का मानना है कि ये पारंपर

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क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

द दास कहते हैं कि उनकी आठ एकड़ जमीन पर वन विभाग ने एक साल पहले ही वन भूमि बताकर खेती करने पर रोक लगा दी है. यही चिंता तिलहेट पंचायत के एकतारा गांव के हरिशचंद्र, राजकुमार दास, आनं

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किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान की फसल के हर हिस्से की मूल्यवृद्धि की ज़रूरत: स्वामीनाथन

ै. भारत में हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन ने सतत कृषि के लिए बजट में जैविक खेती, जैव-विविधता संरक्षण और जल के बेहतर उपयोग के साथ उपभोक्ता और उत्पाद उन्मुख कृषि व्यापार को प

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किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के फायदे बताने के लिए झारखंड के गांवों में खेती करेंगे कृषि विशेषज्ञ

रांची : जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, देश और दुनिया में खेती योग्य जमीन (Agricultural Land) लगातार कम हो रही है. ऐसे में किसानों (Farmers) की आय (Income) बढ़ाना सरकार के सामने एक चुनौती है. नरेंद्र मोदी (Naren

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यूपी के किसानों से सीधा संवाद करेंगे वैज्ञानिक..

आधुनिक खेती की सलाह के साथ-साथ कृषि सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए देश के प्रतिष्ठित और शीर्षस्थ वैज्ञानिक यूपी के किसानों से सीधा संवाद करेंगे। राज्य सरकार की पहल पर चा

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नागरिक होने का अर्थ केवल ज़िंदा रहना और वोट डालना भर रह गया है- रेयाजुल हक

हम जो देख पा रहे हैं वो यह है; युवाओं के पास रोज़गार नहीं हैं, किसानों के लिए खेती महंगी और उपज सस्ती होती जा रही है, इलाज पर होने वाला ख़र्च दिनोंदिन बढ़ रहा है जबकि लोगों को स

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राजस्थान के आदिवासी भील किसी भी दल की प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं

लिसी के शिकार हैं. ऊंची जाति के लोग भीलों से सिर्फ़ शराब या बहुत कम पैसों में खेती का काम कराते हैं. गरीबी की वजह से बीमारी इतनी है कि भदेसर में पाए जाने वाले टीबी के मरीजों में 9

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गुजरात: पेप्सिको इंडिया ने आलू उगाने के लिए तीन किसानों के ख़िलाफ़ कोर्ट में याचिका दायर की

पेप्सिको इंडिया ने गुजरात के तीन किसानों के ख़िलाफ़ आलू के एक ख़ास किस्म की खेती कराने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला पिछले हफ़्ते का है. कंपनी का दावा है कि ये किसान अ

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बढ़ते तापमान में मानसून की राहत- महेश पलावत

शा-दिशा तय करती है। चूंकि भारत की करीब 58 फीसदी आबादी अब भी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है और सिंचाई का प्रमुख साधन मानसूनी बारिश है, इसलिए इस भविष्यवाणी से यह आकलन किया ज

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