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इस फसल को चाहिए नई बहार- हरजिंदर

ख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जो गैर-कानूनी रूप से ऐसी जीएम फसलों की खेती कर रहे, जिन्हें अभी सरकार से इजाजत नहीं मिली। लेकिन यह आसान नहीं है। खासकर तब, जब खबर यह आ रही ह

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क्या सचमुच सरकार ने किसानों को फसल की लागत का ड्योढ़ा मूल्य दिया है?

ं ने खेत में काम किया तो उनकी मजदूरी कितनी हुई है, साथ ही जिस मालिकाना जमीन पर खेती की जा रही है वह एक पूंजी के रुप में सूद की कितनी रकम अर्जित करती तथा उसे पट्टे के तौर पर देने से

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पानी के बहाव का आपदा बन जाना-- दिनेश मिश्र

कर गाते-बजाते निकल जाते थे। लेकिन अब पानी ढाई दिन की जगह ढाई महीने रहता है और खेती को चौपट करता है। यही नहीं, अब शहरों में भी बाढ़ आने लगी है, जो पहले केवल गांवों तक सीमित रहती थी।

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पानी साफ करने के इंतजाम के अभाव में नदियां हो रहीं दूषित, कई राज्यों की स्थिति चिंताजनक

ें देश में न केवल नदियों, तालाबों और जलाशयों का पानी जहर बनता जा रहा है बल्कि खेती में रसायानिक खादों के अत्याधिक इस्तेमाल के कारण भूजल भी दूषित हो रहा है. भूजल दूषित होने के

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जानें क्यों जंगलों में बीज बम फेंक रहे हैं ये युवा-- त्रिलोचन भट्ट

पहाड़ों में वन्य जीवों के कारण खत्म होती खेती को बचाने के लिए यहां के कुछ युवाओं ने एक अभिनव प्रयास शुरू किया है और इसे नाम दिया है ‘बीज बम'। इस प्रयास को पूरे पर्वतीय क्षेत्र

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जीरो बजट कृषि का विचार नोटबंदी की तरह घातक है- राजू शेट्टी

ा।   शून्य बजट प्राकृतिक कृषि क्या है? क्या यह भारत में दशकों पहले जैविक खेती या पारंपरिक कृषि पद्धति के तरीकों से अलग है? पूर्व सांसद राजू शेट्टी का मानना है कि ये पारंपर

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क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

द दास कहते हैं कि उनकी आठ एकड़ जमीन पर वन विभाग ने एक साल पहले ही वन भूमि बताकर खेती करने पर रोक लगा दी है. यही चिंता तिलहेट पंचायत के एकतारा गांव के हरिशचंद्र, राजकुमार दास, आनं

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किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान की फसल के हर हिस्से की मूल्यवृद्धि की ज़रूरत: स्वामीनाथन

ै. भारत में हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन ने सतत कृषि के लिए बजट में जैविक खेती, जैव-विविधता संरक्षण और जल के बेहतर उपयोग के साथ उपभोक्ता और उत्पाद उन्मुख कृषि व्यापार को प

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किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के फायदे बताने के लिए झारखंड के गांवों में खेती करेंगे कृषि विशेषज्ञ

रांची : जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, देश और दुनिया में खेती योग्य जमीन (Agricultural Land) लगातार कम हो रही है. ऐसे में किसानों (Farmers) की आय (Income) बढ़ाना सरकार के सामने एक चुनौती है. नरेंद्र मोदी (Naren

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