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20 साल में 60% एक्वीफर हो जायेंगे खाली फिर कैसे मिलेगा हर खेत को पानी ?

रे ढूंढ़ा जाना चाहिए.       21वीं सदी की जरुरतों के पेशेनजर देश में जल-प्रबंधन का कारगर ढांचा तैयार करने के मसले पर यूपीए सरकार के दौरान एक रिपोर्ट पेश कर चुके मिहिर

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फिर सूखे की ओर बुंदेलखंड-- पंकज चतुर्वेदी

यहां के बाशिंदे कम पानी में जीना जानते थे। पर आधुनिकता के अंधड़ में पारंपरिक जल-प्रबंधन नष्ट हो गया और उसकी जगह सूखा व सरकारी राहत ने ले ली। अब सूखा भले ही जनता पर भारी पड़ता हो,

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पानी के प्रबंधन में बुनियादी बदलाव की दरकार, बने नेशनल वाटर कमीशन-- मिहिर शाह समिति

र जमीन में ही पानी पहुंच रहा है.  (21वीं सदी की जरुरतों के पेशेनजर देश में जल-प्रबंधन का कारगर ढांचा तैयार करने पर केंद्रित इस रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क

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मनरेगा की मजदूरी -- देर ना हो जाये कहीं देर ना हो जाय !

्रम की शुरुआत के बाद से अधिकतम है.   • मनरेगा के अंतर्गत हुए जल-संरक्षण, जल-प्रबंधन, सिंचाई, परंपरागत जलाशय, वनीकरण तथा भू-विकास के कामों से तकरीबन 46.57 लाख हैक्टेयर भूभाग क

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किसानों के अनुभव : समाज को निबटना होगा सूखे से, सरकार के भरोसे नहीं

लगातार दो कमजोर मॉनसून और लापरवाह जल-प्रबंधन के कारण देश में सूखे का संकट उत्तरोत्तर गंभीर होता जा रहा है. देश की करीब आधी आबादी सूखा और जल-संकट की चपेट में है. कई इलाकों में तो

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जलवायु परिवर्तन का नतीजा हैं ये त्रासदियां-- अभय कुमार

े दस्तावेज मौजूद हैं और विशेषज्ञ समय-समय पर इन खामियों को इंगित करते रहे हैं. जल-प्रबंधन शहरों की व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण कारक होना चाहिए. तटीय शहर होने के कारण चैन्ने का

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कितना जरुरी है भूमिगत जल का प्रबंधन ?

ै। स्थानीय संगठन, सरकार, नागरिक संगठन और निजी क्षेत्र की इस भागीदारी आधारित जल-प्रबंधन में महत्वपूर्ण और अनोखी भूमिका हो सकती है।.. जो सचमुच उपयोगकर्ता है उसके हाथ में प्रबं

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किसने बनाया किसान को गरीब- कुसुमलता केडिया

ोबर आदि से घर पर तैयार होती थी, अब कारखानों में बनी खाद खरीदिए। पानी परंपरागत जल-प्रबंधन से मिलता था, तालाबों का निर्माण समूह-श्रम से साझीदारी में होता था, स्वामित्व में सबका ह

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स्थानीयता की ताकत- एफएओ की नई रिपोर्ट

प्रबंधन की समझ होती है ना कि उस दल-बल को जो समय-समय पर भागीदारी आधारित भूमिगत जल-प्रबंधन के नारे तले सरकारी दौरा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। एफएओ के एक नए अध्य

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सीएसई का बारहवां मीडिया फैलोशिप- आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ायी गई

ैलोशिप में कर सकते हैं--: जलाशयों का जबरिया अधिग्रहण संघर्ष और जन-आंदोलन जल-प्रबंधन से जुड़े कानून और उनका इस्तेमाल जलाशयों का वर्गीकरण जैव-विविधता जीविका और जल वेट

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