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20 साल में 60% एक्वीफर हो जायेंगे खाली फिर कैसे मिलेगा हर खेत को पानी ?

पूर्व सदस्य मिहिर शाह ने सम्मेलन में अपने बीज-वक्तव्य के दौरान कहा कि देश के जल-संकट से निबटारे के प्रयासों में समस्या से जुड़े सभी पक्ष की बात सुनी जानी चाहिए और समस्या का हल

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भयावह जल संकट से जूझता देश

या है कि वर्ष २०2० तक पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जायेगी. साठ करोड़ लोग जल-संकट से सीधे प्रभावित हैं और एक दशक के बाद इस समस्या से सकल घरेलू उत्पादन में छह फीसदी की कमी आ स

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लोगों को हुनर सिखाकर बदल सकते हैं समाज-- दशरथ सूर्यवंशी

के रावणकोल में पलते-बढ़ते समय एक अलग ही तरह का सामाजिक बदलाव मेरी नज़र में आया। जल-संकट के कारण उजड़ती खेती के साथ उजड़ते गांव। लोग आजीविका की तलाश में शहर चले जाते। परिवार बिखरते

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किसानों के अनुभव : समाज को निबटना होगा सूखे से, सरकार के भरोसे नहीं

ं सूखे का संकट उत्तरोत्तर गंभीर होता जा रहा है. देश की करीब आधी आबादी सूखा और जल-संकट की चपेट में है. कई इलाकों में तो दो साल से अधिक समय से यह स्थिति व्याप्त है. अत्यंत गंभीर रूप

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अब चूके तो हाथ धो बैठेंगे पानी से- अनिल जोशी

सियस पार चुका है। जाहिर है, मई-जून आते-आते राज्यों के हालात बदतर हो जाएंगे। जल-संकट को देखते हुए राज्यों ने केंद्र के दरवाजे पर दस्तक देनी शुरू कर दी है। उनका ध्यान हर कुछ समय

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बिन पानी सब सून : देश के दस से ज्यादा राज्यों में हालात गंभीर

खे की भयावह स्थिति उत्पन्न होने की दावत दे रही है. ऐसे में अगर हम नहीं चेते, तो जल-संकट की एक बड़ी विभीषिका हमारे सामने आ खड़ी होगी. इस मामले में हमारी सरकारों को गंभीरता से सोचन

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जलवायु परिवर्तन का नतीजा हैं ये त्रासदियां-- अभय कुमार

गंभीर बीमारियों, विषाणुओं और सामाजिक संघर्षों को भी बढ़ा रही है. प्रदूषण और जल-संकट की समस्या भी विकराल होती जा रही है. तमिलनाडु की त्रासदी पर चर्चा करते हुए यह बात भी ध्यान

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विकास की होड़ में बेसुध- अभय मिश्र

नर्मदा का अंधाधुंध दोहन करने में विश्वास रखते हैं। दोनों ही राज्य अपने-अपने जल-संकट से जूझ रहे इलाकों तक नर्मदा को पहुंचाना चाहते हैं। झीलों की नगरी होते हुए भी राजधानी भोपा

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जल संकट का समाधान भागीदारी बिना नहीं - ज्ञानेन्द्र रावत

की एक-एक बूंद हमारे लिए महत्वपूर्ण है, इसके बावजूद हम इससे बेखबर हैं। बढ़ते जल-संकट के कारण अब जल प्रबंधन प्रणाली में सुधार करने और पानी की परंपरागत प्रणाली को पुनर्जीवित क

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क्यों बढ़ रहा है जल-संकट? -- बाबा मायाराम

पिछले कुछ सालों में मध्यप्रदेष समेत देष भर में पानी का संकट बढ़ा है। यह समस्या प्रकृति से ज्यादा मानव-निर्मित है। वर्षा की कमी के साथ, वनों की अवैध कटाई, पुराने तालाबों पर अतिक्रमण, गाद भरने स

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