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क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

कर तोड़ दिया. इसमें प्रेमन रवि दास का भी घर शामिल है. फिलहाल दिन में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार पाल रहे 45 वर्षीय प्रेमन रवि दास कहते हैं, ‘साल भर का गेहूं-चावल और परिवार का पालन

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खरीफ 2019-20 की फसलों के एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी, धान में सिर्फ 3.7 फीसदी की वृद्धि

ै. इस बीच, सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मंत्रिमंडल ने मजदूरी संहिता को मंजूरी दे दी है. हालांकि संसद सत्र चालू होने के कारण उन्होंने इसके बारे में और ब्

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छत्तीसगढ़ः पारले-जी बिस्किट की फैक्ट्री से 26 बाल मज़दूर छुड़ाए गए

से कार्रवाई कर आमासिविनी गांव में पारले-जी बिस्किट की उत्पादन इकाई से 26 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया. इन बच्चों को किशोर गृह भेज दिया गया है. ये बच्चे छत्तीसगढ़ के अलावा प

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आर्थिक संकट की गहराई- अरुण कुमार

कि मनरेगा की तरफ लोगों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों के असंगठित मजदूर गांव लौटकर मनरेगा से जुड़ रहे हैं। यह हालत तब है, जब 100 दिनों की बजाय उन्हें सिर्फ 45 दिन का काम म

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जाति के समीकरण का टूटना- मनीषा प्रियम

मेल करके चलती रही है। मगर भाजपा ने न सिर्फ इसमें सेंध लगाई, बल्कि चाय बगान के मजदूरों के बीच भी उसने जमकर काम किया। हेमंत बिस्वा शर्मा, सुनील देवधर और अमित शाह ने पश्चिम बंग

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दिल्ली: सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मज़दूरों की मौत, तीन घायल

्तर पश्चिम दिल्ली में मंगलवार को एक मकान के सेप्टिक टैंक में उतरने के बाद दो मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस उपायु

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मनरेगा :4 राज्यों और 2 संघशासित प्रदेशों में नहीं बढ़ी मजदूरी! कहीं 1 रुपये तो कहीं 2 रुपये की बढ़ोत्तरी !

दार्शनिक मिजाज के इस सवाल का एकदम ही व्यावहारिक सा जवाब हो सकता है- मनरेगा की मजदूरी!  बात तनिक बुझौवल सी लगी तो इन तथ्यों पर गौर करें: साल 2019-20 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्री

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आख़िर क्यों मनरेगा मज़दूरों को नहीं मिलती उचित मज़दूरी?- देवमाल्या नंदी

ाज्यों में मज़दूरी दर एक रुपये भी नहीं बढ़ी. पिछले कई वर्षों की तरह इस बार भी मजदूरों को सिर्फ़ निराशा हाथ लगी है और कठिन परिश्रम के बावजूद बेहद कम मज़दूरी दर और साथ में मज़दू

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तीस लाख मतदाता चाहें भी तो इस चुनाव में मतदान नहीं कर सकते- आखिर क्यों, पढ़िए इस एलर्ट में !

आबादी चाहे तो भी वोट नहीं कर सकती ? ऐसे कामगारों में एक नाम आता है ईंट भट्ठे के मजदूरों का ! इस बार ईंट भट्ठे पर काम करने वाले तकरीबन 30 लाख मजदूर अपने मताधिकार के

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भोपाल गैस त्रासदी 20वीं सदी की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक: संयुक्त राष्ट्र

चलते हुईं बीमारियों से 27.8 लाख कामगारों की मौत हो जाती है. इसके अलावा 374 मिलियन मजदूर गैर औद्योगिक दुर्घटनाओं से प्रभावित होते हैं. संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतरराष्ट

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