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सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था- केसी त्यागी

से बाहर रखा. ये आंकड़े हास्यास्पद हैं. आवश्यकता है कि इन बिंदुओं पर मौजूदा महंगाई के समानुपातिक व्यय सीमा को आधार बना कर गरीबी रेखा निर्धारित की जाए. प्रधानमंत्री आयुष्मा

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आर्थिक संकट की गहराई- अरुण कुमार

ै, हमारी माली हालत बिगड़ने लगती है। इससे हमारा भुगतान-संतुलन गड़बड़ाने लगता है, महंगाई बढ़ने लगती है और राजकोषीय व चालू खाता घाटा आंखें दिखाने लगते हैं। जाहिर सी बात है कि बाहरी च

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आख़िर क्यों मनरेगा मज़दूरों को नहीं मिलती उचित मज़दूरी?- देवमाल्या नंदी

े वाले लोगों के लिए दैनिक मज़दूरी हर साल भारत सरकार द्वारा तय की जाती है ताकि महंगाई के साथ इनकी मज़दूरी भी बढ़े. केंद्र की मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए मनरेगा की मज़दू

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बढ़ते तापमान में मानसून की राहत- महेश पलावत

ै, इसलिए इस भविष्यवाणी से यह आकलन किया जाता है कि खरीफ की फसल कितनी लहलहाएगी। महंगाई, विकास दर के साथ-साथ शेयर बाजार पर भी इसका खासा असर होता है। इसीलिए कमजोर मानसून की आहट कई च

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एमएसपी बढ़े तो किसान की आमदनी भी बढ़े, कोई जरुरी तो नहीं !

मूल्य ही जायेगा ? और, क्या न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढ़वार का खाद्य-वस्तुओं की महंगाई से कोई सीधा रिश्ता है, जैसा कि अर्थशास्त्रियों का एक तबका अक्सर तर्क देता है ?   अगर आप स

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समस्या की अनदेखी करते समाधान-- हिमांशु

र जोर देती है। और ऐसा खाद्य कीमतों को कम करके हासिल किया जाता है, क्योंकि इसे महंगाई बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि तथ्य यही है कि खाद्य मुद्रास्फीति और मूल कुछ और »

तेल का खेल अभी और चलेगा-- सौरभ चंद्र

्रांस की सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त कर लगाकर इनकी कीमतें बढ़ा दीं। महंगाई के कारण जीवन-यापन में आ रही मुश्किलों से वैसे ही वहां हर कोई जूझ रहा था। सरकार के कदम ने इस आ

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क्या है रुपये का सही मूल्य-- अश्विनी महाजन

वकालत कर रहे थे. सर्वविदित है कि देश में जीडीपी ग्रोथ की दर बढ़ती जा रही है, महंगाई की दर लगातार घट रही है, विभिन्न नीतिगत सुधारों के कारण देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' भी लगा

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आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियां - डॉ. जयंतीलाल भंडारी

ो पहल की थी, वह भी अब पुन: दाम चढ़ने के साथ निस्तेज होती नजर आ रही है। इसके अलावा महंगाई भी बढ़ने लगी है, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानियों में और इजाफा हो सकता है। एक और प्रमुख चुनौत

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ताकि वे अपनी पसंद से खरीदें अनाज- कार्तिक मुरलीधरन

ब हो सकती है। खासकर, बैंक खाते में डाली गई रकम यदि खाद्यान्न की खुदरा कीमत और महंगाई के अनुरूप न हुई, तो वे पैसे अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। एक मुश्किल यह भी है कि बैंक, एटीएम औ

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