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निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कवरेज भी घटा !

ने 2016 के खऱीफ मौसम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी. इसका मकसद मौसम की मार से फसल की तबाही की स्थिति में किसान को होनेवाले नुकसान से बचाने का था. योजना 1 अप्रैल 2016

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कृषि में बेहतर होता बिहार-- के सी त्यागी

िए 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सब्सिडी की व्यवस्था किसानों को प्रत्येक मौसम की मार से बचाने में कारगर साबित होगी. अनियमित माॅनसून, सूखे की स्थिति में एक एकड़ के लिए प्रति

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किसान आंदोलन का नया स्वरूप- मणीन्द्र नाथ ठाकुर

है कि ट्रैक्टर या अन्य कृषि उपकरणों के लिए ब्याज दर बारह से चौदह प्रतिशत हो. मौसम की मार से परेशान किसान कई बार यदि समय पर कर नहीं चुका सके, तो इस दर में वृद्धि भी हो जाती है.

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हर वर्ष लाखों क्विंटल बीज का भंडारण, लेकिन मांग के अनुरूप वितरण नहीं

ोरिया आदि के बीजों की मांग रहती है। बीज निगम के अध्यक्ष श्याम बैस की मानें तो मौसम की मार से कुछ फसलें प्रभावित हुई हैं। कई बार किसानों की मांग घटती-बढ़ती रहती है। इसलिए लिस्ट म

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देश के कई हिस्सों में मौसम का कहर, बारिश और ओलों से फसल को नुकसान

ी बारिश की मात्रा ज्यादा नहीं होगी लेकिन हवाओं के साथ इसकी गति तीव्र होगी। मौसम की मार से नहीं बचा है महाराष्‍ट्र बेमौसम बारिश व ओलावृष्‍टि के कारण महाराष्‍ट्र में भी

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बजट : जीडीपी का एक फीसद से भी कम खर्च हुआ है कृषि और ग्रामीण विकास पर

े के साथ-साथ उनकी एक मुख्य समस्या है कि लागत के अनुरुप उपज का मूल्य नही मिलता. मौसम की मार के कारण फसल नष्ट होती है तो इसके घाटे से उबार के लिए कोई कारगर बीमा-योजना नहीं है. साथ ही

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संतरे की फसल को खरीदने शाजापुर का रुख कर रहे देशभर के व्यापारी

शाजापुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मौसम की मार के चलते इस बार जिले की 80 फीसदी संतरा फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में अनेक किसानों को इस बार मायूसी हाथ लगी है। वहीं जिन किसानों के बगीचे

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मौसम की मार झेलने वाली स्वास्थ्य सेवा बनाएं-- डा. पूनम खेत्रपाल

मता का स्तर भी इतना हो कि वे सेहत संबंधी चुनौतियों से निपट सके। दूसरी बात, मौसम की मार का सामना करने लायक आधारभूत ढांचा और टेक्नोलॉजी में काफी संभावनाएं हैं। उदाहरण के तौर

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जलवायु: मौसम का पक्ष-विपक्ष-- अखिलेश आर्येंन्दु

उसे देखकर यही लगता है, अच्छा होता ये गांव में रहते, भले ही एक ही जून खाना खाते। मौसम की मार ऐसे लोगों को हलाकान ही नहीं करती, कई बार उनकी मौत का कारण भी बन जाती है। ठंड में मरनेवाल

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बढ़ती महंगाई की मुसीबत - संजय गुप्‍त

हुत कम है, इसलिए वहां दालों का उत्पादन किया जा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि मौसम की मार से ऐसे देश भी जूझ रहे हैं। जहां तक टमाटर अथवा अन्य सब्जियों के दामों में वृद्धि की बा

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