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दुनिया में विस्थापन का सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक आपदाएं हैं जिनका सबसे बड़ा शिकार भारत है

दुनिया में विस्थापन की समस्या के पीछे अब हिंसा और युद्ध नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदायें बड़ी वजह हैं. संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट - 2020 बताती है कि साल 2018 में जितने लोगों को हिंसा, आतंकवाद और युद्ध के कारण घर छोड़ना पड़ा उससे 64 लाख अधिक लोग आपदाओं के कारण विस्थापित हुये. रिपोर्ट के ये आंकड़े चिंताजनक हैं क्योंकि वैज्ञानिक चेतावनी देते रहे हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग...

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बाढ़ में डूबा कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र, राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की बात

नई दिल्ली: दक्षिण भारत सहित देश के आधे दर्जन से अधिक राज्य बाढ़ की चपेट में हैं. बीते कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कई राज्यों की नदियां उफान पर हैं जिससे इन राज्यों के लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. केरल और कर्नाटक के कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. केरल राज्य...

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जम्मू-कश्मीर: हिंसा के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद सबसे ज्यादा तादाद

पाकिस्तान से बढ़ती सैन्य तनातनी और युद्ध की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की : ‘जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले नागरिकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा.' लेकिन क्या सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सचमुच आरक्षण का लाभ हासिल कर पाने की स्थिति में हैं ?   इस सवाल का उत्तर ढूंढ़ने के लिए इन तथ्यों पर गौर कीजिए : बीते साल जनवरी से जून महीने के...

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मौलिक अधिकारों का संघर्ष जारी, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार चार्टर के 70 साल

मनुष्यों के लिए नागरिक, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अधिकार मौलिक मानवाधिकारों की श्रेणी में आते हैं. विभिन्न रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि दुनिया की एक बड़ी आबादी आज भी अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्षरत है और मानवाधिकार उल्लंघन का शिकार है. मानवाधिकार के पक्ष में आवाज बुलंद करने की जरूरत को समझते हुए कई देश संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में 70 साल पहले एकजुट...

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सूचना के संजाल में छीजती संवेदना--- दिनेश कुमार

समाज में साहित्य के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। प्राय: ऐसा प्रतीत होता है कि समाज को साहित्य की कोई जरूरत नहीं है। समाज की प्राथमिकता से साहित्य का गायब होना चिंता से अधिक चिंतन का विषय है। साहित्य के नए पाठक बन नहीं रहे हैं और जो पुराने हैं वे धीरे-धीरे विदा हो रहे हैं। हम एक तरह से क्रमश: साहित्य विहीन समाज की ओर बढ़...

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