खोज परिणाम

Total Matching Records found : 8098

बयान / मेधा पाटकर ने कहा- एक व्यक्ति के लिए सरदार सरोवर बांध जल्दी भरा गया, 192 गांव जलमग्न हुए

ावजूद अभी तक सरदार सरोवर बांध से प्रभावित लोगों का पुनर्वास नहीं हुआ है। शिवराज सरकार इसके लिए जिम्मेदार: पाटकर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दावा कर रही है कि इन्ह

कुछ और »

रिपोर्ट/मंदी से निपटने के लिए ब्याज दरें घटाना काफी नहीं, सरकार को ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ाना चाहिए

बढ़ाना चाहिए। एसबीआई की रिपोर्ट सोमवार को सामने आई। दैनिक भास्कर पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

कुछ और »

रैंकिंग में और पिछड़ी उच्च शिक्षा -- हरिवंश चतुर्वेदी

टीट्यूट ऑफ एमीनेंस (आईओई) नामक बहुचर्चित योजना का तो यह प्रमुख लक्ष्य था। कोशिश थी कि देश के अच्छे विश्वविद्यालयों को ज्यादा स्वायत्तता दी जाए और केंद्र सरकार द्वारा संचाल

कुछ और »

अराजक राहों पर राहत का कानून-- शशिशेखर

दृश्य 1 : हम भागलपुर से पटना लौट रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर हमारे आगे एक साइकिल सवार चल रहा है। साइकिल के पीछे कैरियर लगा है, जिस पर ताजा काटी हुई ऐसी वनस्पति लदी है, जो साइकिल के दोनों ओर दो

कुछ और »

पहली तिमाही में पांच फीसदी जीडीपी वृद्धि दर चौंकाने वाली: आरबीआई गवर्नर

ं था. इसीलिए 5 प्रतिशत वृद्धि दर अचंभित करने वाली है.' द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

कुछ और »

सरकार से अनुदान पाने वाले एनजीओ आरटीआई क़ानून के दायरे में आते हैं: सुप्रीम कोर्ट

्यादा हो. इस संबंध में कोई नियम तय नहीं किया जा सकता.' द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

कुछ और »

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, कोई देश अपने लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजता

स्क और ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं दिए जाते हैं.   द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

कुछ और »

बाधाएं बहुत, पर आगे बढ़े हैं लोग-- श्रीनाथ राघवन

लद्दाख में नए युग की शुरुआत हो चुकी है। वैसे जम्मू-कश्मीर के इतिहास में यह कोशिश इतनी नई भी नहीं है। इंदिरा गांधी भी कश्मीर में यथास्थिति बदलना चाहती थीं। इस राज्य के विशेष द

कुछ और »

चार धाम परियोजना की कछुआ चाल, 31 महीनों में 1.1 किमी ही बनी सड़क

गिराने के लिए अनुमति देने में काफी देर कर रही है.' द प्रिन्ट हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

कुछ और »

‘जम्मू कश्मीर की मीडिया को खुद नहीं पता कि राज्य में क्या हो रहा है’

ो भी तैनात कर दिया गया था. संचार माध्यमों पर रोक के साथ प्रदेश में अप्रत्याशित बंद का सामना कर रही जम्मू कश्मीर की मीडिया बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है. स्थानीय अख़बारों जै

कुछ और »

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later