किसान और आत्महत्या

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सीपी चंद्रशेखर और जयति घोष द्वारा प्रस्तुत आलेख बर्डेन ऑव फार्मरस् डेट नामक आलेख में कहा गया है-
http://www.macroscan.com/the/food/sep05/fod140905Farmers_Debt.htm
 

    * किसानों के ऊपर कर्जदारी के बड़े कारणों में एक है शादी ब्याह के खर्चे की वजह से लिया जाने वाला कर्ज लेकिन किसानों द्वारा लिए गए कुल कर्ज में इस कारण से लिए कर्ज की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम(११ फीसदी) है। शादी ब्याह के खर्चे की वजह से सबसे ज्यादा कर्जा बिहार के किसान परिवारों ने लिया। वहां २२.९ फीसदी किसान परिवारों ने इस मद में कर्ज लिए। इसके तुरंत बाद नंबर राजस्थान का है जहां शादी ब्याह के खर्चे को पूरा करने के लिए १७.६ फीसद किसान परिवारों ने कर्ज लिए।
    * किसानों की एक बड़ी तादाद महाजनों से कर्ज लेने के लिए बाध्य हुई। कर्ज लेने वाले किसानों में २९ फीसदी ने महाजनों से कर्ज लिया है। .
    * महाजनी कर्ज की सबसे ज्यादा तादाद बिहार(४४ फीसदी) और राजस्थान(४० फीसदी) है। खेती के काम में जिन सामानों का प्रयोग होता है उन्हें बेचने वाले सौदागर या फिर वैसे सौदागर जो खेतिहर उत्पाद को खरीदते हैं-कर्ज के प्रमुख स्रोत बनके उभरे हैं। कर्जदार किसानों में १२ फीसदी ने ऐसे ही सौदागरों से कर्ज लिए। बहरहाल कर्ज हासिल करने सरकारी स्रोत अब भी प्रमुथ बने हुए हैं। कर्जदार किसानों में से ५० फीसदी से अधिक ने सहकारी समितियों अथवा सरकारी बैंकों से कर्ज लिया।
    * लिए गए कर्ज की मात्रा का संबंध जमीन की मिल्कियत से भी है। जो किसान जितनी बड़ी जमीन का मालिक है उस पर उतना ही कर्ज है। एक तथ्य यह भी है कि जमीन की मिल्कियत के बढ़ने के साथ कर्जदार किसानों की संख्या में भी बढोतरी को भी चिह्नित किया जा सकता है।
    * बहुत छोटे और सीमांत किसानों के ऊपर भी कर्ज का भारी बोझ है। ऐसे किसानों की आमदनी बहुत कम है और इससे संकेत मिलते हैं कि किसान एक से ज्यादा कारणों से लगातार कर्ज के दुष्चक्र में फंसते जा रहे हैं।




 

 



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