किसान और आत्महत्या

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What's Inside

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा जारी एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2019 (सितंबर, 2020 में जारी) के अनुसार (देखने के लिए कृपया यहाँ, यहाँ और यहाँ क्लिक करें):

• वर्ष 2018 (1,34,516 आत्महत्या) के आंकड़ों की तुलना में 2019 (1,39,123 आत्महत्या) के दौरान आत्महत्याओं में लगभग 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. वर्ष 2018 (10.2 प्रति लाख जनसंख्या) के मुकाबले साल 2019 के दौरान आत्महत्या की दर (10.4 प्रति लाख जनसंख्या पर) में 0.2 अंक की बढ़ोतरी हुई है. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• 2019 के दौरान कुल 5,957 किसानों ने आत्महत्या की, जोकि देश में कुल आत्महत्या पीड़ितों का 4.3 प्रतिशत है. हालांकि, 2019 के दौरान 4,324 खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्या पीड़ितों का लगभग 3.1 प्रतिशत है. इस हिसाब से 2019 में भारत में कृषि क्षेत्र में किसान आत्महत्याओं (किसानों और खेतिहर मजदूर मिलाकर) की कुल संख्या 10,281 थी, जोकि कुल आत्महत्या पीड़ितों का लगभग 7.4 प्रतिशत है. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• एक 'किसान वह है जिसका पेशा खेती है और इसमें वे लोग शामिल हैं जो अपनी ज़मीन पर खेती करते हैं और साथ ही वे लोग भी शामिल हैं जो खेतिहर मज़दूरों की सहायता से या बिना, किराए/पट्टे की ज़मीन पर खेती करते हैं. एक 'कृषि मजदूर' वह व्यक्ति होता है जो मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र (कृषि / बागवानी) में काम करता है, जिसका मुख्य स्रोत कृषि श्रम गतिविधियों से होता है. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• साल 2019 में कुल 5,563 पुरुष किसानों और 394 महिला किसानों ने आत्महत्याएं कीं, जोकि कुल किसानों की आत्महत्याओं का क्रमशः 93.4 प्रतिशत और 6.6 प्रतिशत (अर्थात 5957) था. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• कृषि मजदूरों की सहायता या उनके बिना अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों की आत्महत्या की कुल संख्या 5,129 थी. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• खेतिहर / किसानों के बीच आत्महत्या करने वाले वे किसान जो दूसरों की जमीन पट्टे या किराए पर लेकर खेतिहर मजदूरों की सहायता या उनके बिना खुद खेती करते हैं, ऐसे किसानों की आत्महत्या की कुल संख्या 828 थी. कृपया click here to access.

• 2019 में कुल 3749 पुरुष खेत मजदूरों और 575 महिला खेत मजदूरों ने आत्महत्या की, जोकि कुल कृषि मजदूरों की आत्महत्या का क्रमशः 86.7 प्रतिशत और 13.3 प्रतिशत था. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें. 

• कुछ राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, मणिपुर, चंडीगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, लक्षद्वीप और पुदुचेरी में किसानों के साथ-साथ कृषि मजदूरों के शून्य आत्महत्या का आंकड़ा दर्ज किया गया. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• 2019 में महाराष्ट्र में सबसे अधिक कृषि आत्महत्याएं (किसानों के साथ-साथ कृषि मजदूरों की कुल आत्महत्याएं) दर्ज की गईं (3,927 जो कुल कृषि आत्महत्याओं का लगभग 38.2 प्रतिशत है.), इसके बाद कर्नाटक (1992), आंध्र प्रदेश (1029),  मध्य प्रदेश (541), तेलंगाना (499) और छत्तीशसढ़ (499) में दर्ज की गईं. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• 2019 में किसानों द्वारा आत्महत्या करने की सबसे अधिक रिपोर्टें महाराष्ट्र (2,680 किसानों द्वारा की गई आत्महत्या का लगभग 45 प्रतिशत) हैं, उसके बाद कर्नाटक (1,331), प्रदेश (628) और तेलंगाना (491) में दर्ज की गईं. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• 2019 में खेतिहर मजदूरों द्वारा सबसे ज्यादा आत्महत्या महाराष्ट्र (1,247) में दर्ज की गई, उसके बाद कर्नाटक (661), तमिलनाडु (421), आंध्र प्रदेश (401) और मध्य प्रदेश (399) में दर्ज की गई. एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

• एडीएसआई 2018 की रिपोर्ट किसान आत्महत्याओं के पीछे के कारण नहीं बताती है.

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इनक्लूसिव मीडिया फॉर चेंज द्वारा भारत के कृषि संकट और ग्रामीण संकट पर तैयार किए गए समाचार अलर्ट तक पहुँचने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें.

 



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