किसान और आत्महत्या

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[inside]नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा रिपोर्ट एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2016 [/inside] 

 

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा भारत में एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स 2016 (नवंबर, 2019 में जारी) रिपोर्ट के कुछ तथ्य निम्नलिखित हैं (रिपोर्ट देखने के लिए कृपया यहांयहांयहां और यहां क्लिक करें):

 

•वर्ष 2015 (1,33,623 आत्महत्याओं) की तुलना में 2016 (1,31,008 suicides) के दौरान आत्महत्याओं में लगभग 2.0 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2015 (अर्थात 10.3 प्रति लाख जनसंख्या)  की तुलना में 2016 (10.6 प्रति लाख जनसंख्या) के दौरान आत्महत्या की दर में 0.3 अंक की गिरावट दर्ज की गई है. देखने के लिए कृपया यहां और यहां क्लिक करें.

 

• 2016 में कुल 6,270 किसानों/कृषकों ने आत्महत्या की, जोकि देश में हुई कुल आत्महत्याओं का 4.79 प्रतिशत है. हालांकि, वर्ष 2016 के दौरान 5,109 खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्या पीड़ितों का लगभग 3.9 प्रतिशत है. इसलिए, 2016 में कृषि क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या (किसानों और खेत मजदूरों को मिलाकर) की कुल संख्या 11,379 थी, जो भारत में कुल आत्महत्याओं का लगभग 8.7 प्रतिशत थी. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• एक 'किसान/कृषक' वह है जिसका पेशा खेती है और इसमें वे लोग शामिल हैं जो अपनी जमीन पर खेती करते हैं और साथ ही उन लोगों को भी शामिल किया गया है जो खेतिहर मजदूरों की सहायता से या उनके बिना, पट्टे की जमीन पर खेती करते हैं. एक 'कृषि मजदूर' एक ऐसा व्यक्ति है जो मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र (कृषि/बागवानी) में मजदूरी का काम करता है और जिसकी आय का मुख्य स्रोत कृषि श्रम गतिविधियों से है. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• कुल 5,995 पुरुष किसानों और 275 महिला किसानों ने आत्महत्याएं कीं. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• कुल 4,476 पुरुष खेत मजदूरों और 633 महिला खेत मजदूरों ने आत्महत्या की, जोकि खेत मजदूरों की आत्महत्याओं(अर्थात 5,109)  का क्रमशः 87.61 प्रतिशत और 12.39 प्रतिशत है. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, अर्थात् पश्चिम बंगाल, बिहार, नागालैंड, चंडीगढ़, दादर और नागर हवेली, दमन और दीव, दिल्ली, और लक्षद्वीप में किसानों और खेत मजदूरों की शून्य आत्महत्या दर्ज की गई. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

•2016 में सबसे अधिक कृषि आत्महत्याएं (किसानों के साथ-साथ खेतिहर मजदूरों द्वारा की गई आत्महत्या) महाराष्ट्र (3,661), कर्नाटक (2,079), मध्य प्रदेश (1,321), आंध्र प्रदेश (804) और छत्तीसगढ़ (682) में दर्ज की गईं. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

•2016 में किसानों द्वारा आत्महत्या करने का सबसे बड़ा आंकड़ा महाराष्ट्र (2,550, जो कि किसानों द्वारा की गई आत्महत्या का लगभग 40.7 प्रतिशत) से है, उसके बाद कर्नाटक (1,212), तेलंगाना (632), मध्य प्रदेश (599) और छत्तीसगढ़ (585) का. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• 2016 में खेतिहर मजदूरों द्वारा सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र (1,111) में दर्ज की गईं, उसके बाद कर्नाटक (867), मध्य प्रदेश (722), आंध्र प्रदेश (565) और गुजरात (378) में दर्ज की गईं. देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

• एडीएसआई (ADSI) 2016 की रिपोर्ट खेत आत्महत्याओं के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं देती है. 




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