आंकड़ों में गांव

आंकड़ों में गांव

Share this article Share this article

 

ग्रामीण क्षेत्र की गरीब आबादी पर COVID-19 और लॉकडाउन के प्रभाव का आकलन करने के लिए ग्रामीण भारत की गरीब आबादी पर लॉकडाउन के प्रभाव सर्वेक्षण को प्रमुख गैर सरकारी संगठनों द्वारा किया गया. सहयोगी एनजीओ के पास देश के गरीबी से प्रभावित अधिकांश क्षेत्रों के बारे में जमीनी जानकारी है.

सर्वेक्षण में देश के 12 राज्यों में 47 जिलों में 5,100 परिवारों को शामिल किया गया था, और इसे लॉकडाउन के 35 दिनों बाद 27 अप्रैल से 2 मई, 2020 तक की समयावधि के दौरान किया गया था. सर्वेक्षण को ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन, दिल्ली और विकासनवेश फाउंडेशन (VAF), पुणे, महाराष्ट्र में स्थित एक विकास अनुसंधान केंद्र और लखनऊ की एक प्रसिद्ध शोध फर्म सम्बोधी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था. नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) द्वारा किए गए मूल्यांकन सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

इस सर्वेक्षण में निम्न परिणाम सामने आए हैं:

1. सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश परिवारों के पास उनके द्वारा उगाई गई अंतिम खरीफ या रबी फसल के अन्न का बहुत सीमित भंडार है. वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से पूरी तरह से खाद्य आपूर्ति पर निर्भर होंगे.

2. अधिकांश वर्षा आधारित क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा के सबसे खतरनाक महीने जुलाई और अगस्त होते हैं, लेकिन लोग पहले से ही खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. उन्होंने सामान्य दिनचर्या में समान अवधि की तुलना में हर दिन कम वस्तुओं का सेवन करना और कम भोजन करना शुरू कर दिया है.

3. ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है और इस सर्वेक्षण में शामिल हुए लगभग 30 प्रतिशत उत्तरदाताओं को पहले से ही बुनियादी आवश्यकताओं पर खर्चों को पूरा करने के लिए अपने परिजनों या पेशेवर साहूकारों से उधार लेना पड़ा है.

4. तीव्र संकट के शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं: विवाह या इसी तरह के समारोहों पर सभी विवेकाधीन खर्चों में भारी कटौती की जा रही है. लगभग 30 प्रतिशत परिवारों द्वारा अपने बच्चों का स्कूलों में दाखिला न करवा पाने की संभावना है.

5. परिवारों ने उत्पादक संपत्तियों को कम करना शुरू कर दिया है, यहां तक कि बैल या दुधारू पशुओं को भी बेच रहे हैं.

6. रिपोर्ट करने वाले परिवारों में केवल हर छठे परिवार में अपने प्रवासी सदस्यों की वापसी के कारण महिलाओं पर काम का बोझ पानी और ईंधन लाने के लिए काफी बढ़ गया है और शराबियों की बढ़ोतरी के कोई संकेत नहीं है.

7. आमतौर पर प्रवासी परिवार के सदस्य खरीफ बुआई से पहले वापस लौट जाते हैं, लेकिन शहरों में उनके द्वारा कमाई गई नकदी बचत (वापसी) के साथ लौटते हैं. इस साल वे खाली जेब लेकर लौटेंगे. इस तरह खाली हाथ लौटने से गांवों में स्थिति बहुत बदतर हो सकती है.

8. खरीफ फसल की बुआई के लिए 40 प्रतिशत परिवारों के पास न तो कोई बीज था और न ही कृषि ऋण की कोई सुविधा थी. 

 




Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close