पलायन (माइग्रेशन)

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सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, मानव विकास, स्कूल ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (मुंबई) में आयोजित की गई राष्ट्रीय संगोष्ठी में तैयार किए गए संकल्पना नोट: 'कॉन्टेस्टिंग स्पेसेस एंड नेगोशिएटिंग डेवेल्पमैंट: ए डॉयलॉग ऑन डोमेस्टिक माइग्रेंटस्, स्टेट एंड इनक्लूसिव सिटीजनशिप इन इंडिया' (25-26 मार्च 2016) , के अनुसार (कॉन्सेप्ट नोट का उपयोग करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें):

• कुछ अनुमानों से पता चलता है कि भारत में लगभग 10 करोड़ अस्थायी घरेलू प्रवासी हैं.

• भारत की जनगणना 2001 और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) 2007-08 के अनुमान के अनुसार, दस में से तीन भारतीयों को घरेलू प्रवासियों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिन्होंने जिले या किसी दूसरे राज्य में पलायन किया है. 2001 में, 30.9 करोड़ व्यक्ति पिछले निवास स्थान के आधार पर प्रवासी थे, जो देश की कुल आबादी का लगभग 30 प्रतिशत था. (नवीनतम जनगणना से डेटा अनुपलब्ध है).

• प्रवास के प्रमुख कारण काम/रोजगार, व्यवसाय और शिक्षा, विवाह, जन्म या परिवार/परिवार के साथ पलायन करना है. विद्वानों का तर्क है कि सरकारी डेटा में उन मौसमी प्रवासी (सीजनल माइग्रेंट्स्) की आवाजाही को कम करके यानी सही से दर्ज नहीं किया जाता है, जो सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित हैं और बहुत ही कम आय और कम शिक्षित होते हैं. ये प्रवासी मजदूर आबादी का वह अस्थायी हिस्सा हैं, जो ज्यादातर ईंट भट्टों, निर्माण, वृक्षारोपण, खान, खदान और कारखानों में काम करते हैं और श्रम ठेकेदारों द्वारा उनका खूब शोषण होता है. ये प्रवासी मजदूर चुनाव और राजनीति में भाग लेने में अपेक्षाकृत अधिक मुश्किलों का सामना करते हैं.

• घरेलू प्रवासियों, विशेष रूप से तथाकथित गैर-अधिवासित घरेलू प्रवासियों को किसी भी तरह के  औपचारिक निवास अधिकार प्राप्त नहीं हैं. उनके पास पहचान प्रमाण न होने, पर्याप्त आवास की कमी, कम दिहाड़ी, असुरक्षित या खतरनाक कार्य स्थिति जैसी समस्याएं उन्हें घेरे रहती हैं. बेशक भारतीय चुनावों ने “धरती के सबसे बड़े लोकतंत्र” की उपाधि ग्रहण कर ली हो, मगर प्रवासियों को इन चुनावों में भाग लेने के लिए अधिकारों से वंचित किए जाने सहित राज्य द्वारा प्रदान की गई कल्याणकारी सेवाओं तक इनकी कोई पहुँच नहीं है. इस प्रकार, इस तरह की बहिष्करण प्रथाओं ने इन्हें द्वितीय श्रेणी के नागरिक बनाकर उनके हाल पर छोड़ दिया है. 



Rural Expert
 

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