बेरोजगारी

बेरोजगारी

Share this article Share this article

What's Inside


श्रम और रोजगार मंत्रालय के लेबर ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट ऑन एम्पलॉयमेंट एंड अनएम्पलॉयमेंट सर्वे (2009-10) के अनुसार

http://labourbureau.nic.in/Final_Report_Emp_Unemp_2009_10.pdf:

 

• लेबर ब्यूरो द्वारा तैयार हालिया एम्पलॉयमेंट-अनएम्पलॉयमेंट सर्वे 28 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों का है जहां देश की कुल 99 फीसदी आबादी रहती है। 

 

• इस सर्वे में कुल 45,859 परिवारों के 2,33,410 लोगों के साक्षात्कार लिए गए।

 

• इस सर्वे में 1.4.2009 से 31.3.2010  की अवधि तक की सूचनाएं जुटायी गई हैं।

 

• सर्वे के अनुसार रोजगार में लगे कुल लोगों में 45.5 फीसदी किसानी,मत्स्य-पालन और वनोपज एकत्र करने के कामों में लगे हैं। रोजगार में लगे केवल 8.9 फीसदी लोग ही मैन्युफैक्चरिंग में हैं जबकि 7.5 फीसदी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में।

 

• ग्रामीण इलाकों में कामगार आबादी का 57.6 फीसदी हिस्सा खेती-किसानी के काम में लगा है, 7.2 फीसदी हिस्सा कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में और 6.7 फीसदी हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग(विनिर्माण) में।

 

• शहरी इलाके में 9.9 फीसदी कामगार आबादी खेती-किसानी में लगी है,. 8.6 फीसदी कामगार आबादी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में जबकि 15.4 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग के काम में। कामगार आबादी का तकरीबन 17.3 फीसदी हिस्सा होलसेल, रिटेल आदि के कामों में लगा है।

 

• सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि खेती-किसानी का क्षेत्र ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में कोई अतिरिक्त रोजगार का सृजन नहीं करने वाला।बहरहाल विनिर्माण-क्षेत्र में रोजगार के 4 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना जतायी गई है जबकि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में परिवहरन और संचार(ट्रान्सपोर्ट एंड क्म्युनिकेशन) के क्षेत्र में रोजगार की बढ़ोत्तरी क्रमश 8.2 और 7.6 फीसदी की दर से हो सकती है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में कुल श्रमशक्ति में साढ़े चार करोड़ का इजाफा होने की संभावना है। इसके बरक्स योजना में, 5 करोड़ 80 लाख की तादाद में रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद की गई है कि इससे बरोजगारी की दर 5 फीसदी पर रहेगी। बहरहाल, मौजूदा सर्वे के परिणामों से जाहिर होता है कि अखिल भारतीय स्तर पर श्रमशक्ति का 9.4 फीसदी हिस्सा बेरोजगार है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक साथ मिलाकर भारत में बेरोजगारों की तादाद 4 करोड़ बैठती है।

 

• अखिल भारतीय स्तर पर देखें तो बरोजगारों में सर्वाधिक(80 फीसदी) ग्रामीण क्षेत्र से हैं।

 

• ग्रामीण भारत में बेराजगारी की दर 10.1 फीसदी है जबकि शहरी भारत में 7.3 फीसदी। पुरुषों में बेरोजगारी दर  8.0 फीसदी की है जबकि महिलाओं में 14.6 फीसदी की।

 

• लेबर ब्यूरो सर्वे (2009-10) और एनएसएसओ द्वारा किए गए एम्पलॉयमेंट-अनएम्पलॉयमेंट सर्वे(2007-08) के आंकड़ों की आपसी तुलना से जाहिर होता है कि लेबर ब्यूरो के सर्वे में बेरोजगारी की दर ज्यादा बतायी गई है। कुल बेरोजगारी में कृषि क्षेत्र का हिस्सा एनएसएसओ की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा मानने के कारण ऐसा हो सकता है।

 

• सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि 1000 लोगों में 351 आदमी रोगारशुदा हैं, 36 लोग बेरोजगार हैं जबकि 613 लोग ऐसे हैं जिनकी  श्रमशक्ति के भीतर गिनती नहीं की जाती। रोजगारशुदा कुल 351 लोगों में 154 लोग स्वरोजगार की श्रेणी में हैं, 59 लोग नियमित वेतनभोगी की श्रेणी में जबकि 138 लोग ऐसे हैं जिन्हें दिहाड़ी मजदूर कहा जा सकता है। ग्रामीण इलाके में 1000 लोगों की तादाद में 356 लोग रोजगारशुदा की श्रेणी में हैं, 40 लोग बेरोजगार की कोटि में जबकि 604 लोग ऐसे हैं जिनकी गणना श्रमशक्ति में नहीं की जाती। शहरी इलाके में प्रति 1000 व्यक्तियों में रोजगारप्राप्त व्यक्तियों की तादाद 335 है, बेरोजगारी की संख्या 27 और 638 जने ऐसे हैं जिनकी गिनती श्रमशक्ति में नहीं की जाती।

 

• शहरी क्षेत्र में 86 फीसदी और ग्रामीण इलाके में 81 फीसदी महिलायें ऐसी हैं जिनकी गिनती श्रमशक्ति में नहीं की जाती।

 

• सर्वे के अनुसार स्वरोजगार में लगे लोगों में ज्यादातर खेती-किसानी के काम से जुड़े हैं(प्रति 1000 में 572) जबकि थोक और खुदरा व्यापार करने वालों की तादाद स्वरोजगार करने वाली कोटि के भीतर प्रति हजार व्यक्ति में 135 है।

 

• नियनित वेतनभोगियों की श्रेणी में देखें तो पता चलता है कि ज्यादातर कम्युनिटी सर्विसेज से जुड़े( प्रति 1000 में 227) लोग हैं जबकि विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों की तादाद प्रति हजार नियमित वेतनभोगियों में 153 है।

 

• दिहाड़ी मजदूरी करने वालों में सर्वाधिक तादाद खेतिहर मजदूर, मछली मारने या वनोपज से जीविका चलाने वालों की (दिहाड़ी कमाने वाले प्रति हजार व्यक्ति में से 467 व्यक्ति) है जबकि कंस्ट्रक्सन के काम में लगे ऐसे व्यक्तियों की तादाद प्रति हजार में 148 है।

 

• सर्वे के अनुसार रोजगार-प्राप्त लोगों में ज्यादातर वैसे उद्यमों में काम करते हैं जिन्हें प्रोपराइटी टाईप कहा जाता है। ऐसे उद्यमों में रोजगार-प्राप्त लोगों की प्रति हजार संख्या में 494 वयक्ति ऐसे उद्यमों में काम करते हैं जबकि सार्वजनिक या फिर निजी क्षेत्र की लिमिटेड कंपनियों में काम करने वालों की तादाद ऐसे लोगों में प्रतिहजार पर 200 है।

 

• सर्वे के आंकड़ों से पता चलता है कि रोजगार प्राप्त प्रतिहजार व्यक्तियों में केवल 157 लोगों को ही पेड़-लीव की सुविधा मिलती है। कम्युनिटी सर्विसेज ग्रुप में प्रति हजार व्यक्तियों में 443 लोगों को पेड़-लीव की सुविधा है जबकि खेती-किसानी,वानिकी या फिर मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त लोगों में 1000 में 54 व्यक्तियों को ही यह सुविधा हासिल हो पाती है।

 

• जहां तक प्राविडेन्ट फंड, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य सुविधा और मेटरनिटी बेनेफिट जैसी सुविधाओं का सवाल है विभिन्न उद्यमों में काम करने वाले प्रति हजार व्यक्तियों में से मात्र 163 ने कहा कि उन्हें इनमें से कुछ ना कुछ सुविधा मिलती है। कम्युनिटी सर्विसेज ग्रुप के सर्वाधिक लोगों(प्रति हजार में 400) ने कहा कि हमें ऐसी सुविधा मिलती है जबकि खेती-किसानी में रोजगार प्राप्त लोगों में से मात्र 82 लोगों(प्रति 1000 में) ने कहा कि उन्हें इनमें से कुछ ना कुछ सुविधा हासिल होती है।




Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close