अन्य नीतिगत पहल

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व्हिसिल ब्लोअर बिल- मुख्य बातें

 

इस विधेयक को लोक सभा में 26 अगस्त 2010 को मिनिस्ट्री आफ पर्सनल, पब्लिक ग्रीवान्स, एण्ड पैन्शन ने पेश किया। इसे पर्सनल, पब्लिक ग्रीवान्स लॉ एण्ड जस्टिस स्टैन्डिंग कमेटी (अध्यक्षः जयंती नटराजन) के पास विचार के लिए भेजा गया । इस पर 14 फरवरी 2011 तक रिपोर्ट मिलनी थी।

 

यह विधेयक, जनहित के लिए, सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग एवं अपराधों का खुलासा करने वाले व्यक्ति (एवं व्हिसिल ब्लोअर) को सुरक्षा देता है।

 

कोई भी सरकारी कर्मचारी, गैर सरकारी संस्था या कोई भी अन्य व्यक्ति क¢न्द्रीय या राज्य सतर्कता आयोग (सी.वी.सी.) को इस तरह का खुलासा कर सकता है।

 

इस तरह की किसी भी शिकायत में उस शिकायतकर्ता की जानकारी शामिल होनी चाहिए।

 

सतर्कता आयोग शिकायतकायतकर्ता की जानकारी गोपनीय रखेगा। ज़रुरत पड़ने पर यह जानकारी सम्बद्ध विभागाध्यक्ष को दी जा सकती है। विधेयक गोपनीयता का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को दण्डित करता है। विधेयक में जानबूझकर झूठी शिकायत करने के लिए दण्ड का प्रावधान है।

 

मुख्य मुद्दे और उनका विश्लेषण

 

यह विधेयक ईमानदार अफसरों को झूठी शिकायतो की परेशानियों से बचाने के साथ साथ जनहित के लिए खुलासा करने वाले व्यक्ति का संरक्षण करता है। गलत शिकायत करने वाले व्यक्ति के लिए इसमें दण्ड का प्रावधान है। हालांकि इसमें शिकायतकर्ता को सताए जाने के लिए किसी दण्ड का प्रावधान नहीं किया गया है।

 

• 2004 के एक सरकारी निर्णय में जनहित के लिए किये जाने वाले इन खुलासों को प्राप्त करने के लिए केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी.) को नामित किया गया था। हर वर्ष सी.वी.सी इस प्रकार की केवल कुछ सौ शिकायतें ही प्राप्त करता रहा है। इस विधेयक में किये गये प्रावधान उस सरकारी निर्णय से मिलते¨-जुलते¨ हैं अतः शिकायतों की संख्या के बहुत बढ़ने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

 

सतर्कता आयोग के अधिकार सीमित हैं। वह केवल अपनी सिफारिश दे सकता है। उसे दण्ड देने का अधिकार नहीं है। यह दिल्ली और कर्नाटक लोकायुक्त के अधिकारों से विपरीत है।

 

विधेयक में डिस्क्लोजर (खुलासा) को बहुत सीमित अर्थों में परिभाषित किया गया है और उत्पीड़न की कोई व्याख्या नहीं की गयी है। यू.एस., यू.के. और कनाडा जैसे अन्य देश डिस्क्लोजर की व्यापक व्याख्या देते हैं और उत्पीड़न को परिभाषित करते हैं।

 

कई मामलों में यह विधेयक ला कमीशम के प्रस्तावित विधेयक से और दूसरे ऐडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म कमीशन (ए.आर.सी.) की रिपोर्ट से भिन्न है। इसमें गुमनाम शिकायतों को स्वीकार न करना और व्हिसिल ब्लोअर्स को पीडि़त करने वाले अफसरों के लिए दण्ड की किसी व्यवस्था का न होना आता है।

 

विशेष जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक देखें- http://www.prsindia.org/uploads/media/Public%20Disclosure/Whistleblower%20Bill%20HINDI.pdf

 



Rural Expert


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