अन्य नीतिगत पहल

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[inside]भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन विधेयक 2011- महत्वपूर्ण तथ्य[/inside]

 

भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन, 2011 लोकसभा में 7 सितंबर 2011 को ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा पेश किया गया। इस विधयक को ग्रामीण विकास की स्थायी समिति( अध्यक्ष सुमित्रा महाजन) को विचारार्थ भेजा गया जिसे 11 मई 2012 तक अपने सुझाव देने थे।

 

यह विधेयक भू मि अधिग्रहण के अलावा पनुर्वास और पुरनर्व्यवस्थापन भी संभव बनाता है। यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1984 का स्थान लेता है।

 

भूमि अधिग्रहण की इस प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव आकलन सर्वेक्षण(एसआईए), अधिग्रहण का उद्देश्य बताती हुई आरंभिक सूचना, अधिग्रहण की घोषणा, और एक निश्चित समय तक दिया जाने वाला मुआवजा शामिल है। सभी अधिग्रहणों में अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को पुनर्वास और पुनर्व्यावस्थापन देने की आवश्यकता है।

अधिग्रहित भूमि के स्वामियों के लिए मुआवजा ग्रामीण क्षेत्र के मामले में बाजार भाव का चार गुणा और शहरी क्षेत्रों के मामले में दोगुना होगा।

निजी कंपनियों या सार्वजनिक-निजी भागीदारी द्वारा प्रयोग के लिए भूमि अधिग्रहण में 80 प्रतिशत विस्थापित लोगों की सहमति आवश्यक है। निजी कंपनी द्वारा भूमि के विशाल टुकड़े की खरीद में पुनर्व्यवस्थापन और पुनर्वास को आवश्यक माना गया है।

इस विधेयक के प्रावधान विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम 2005, परमाणु उर्जा अधिनियम 1962, रेलवे अधिनियम 1989 सहित मौजूदा 16 विधानों के अंतर्गत किए जाने वाले अधिग्रहणों पर लागू नहीं होंगे।

मुख्य मुद्दे और विश्लेषण

यह सपष्ट नहीं है कि कृषि-भूमि की निजी खरीद पर पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन को लागू करना संसद के अधिकार क्षेत्र में है या नहीं।

बिना किसी न्यूनतम सीमा के, प्रत्येक अधिग्रहण के लिए एसआईए सर्वे की आवश्यकता कुछेक सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में देरी का कारण बन सकता है।

निजी कंपनियों या सार्वजनिक-निजी भागीदारी द्वारा प्रयोग के लिए भूमि अधिग्रहण में 80 प्रतिशत विस्थापित लोगों की सहमति आवश्यक है जबकि पीएसयू के लिए ऐसी सहमति की आवश्यकता नहीं है।

बाजार भाव हाल में हुई लेनदेन की सूचनाओं पर आधारित होता है। यह विधि भूमि लेन-देन में संभावित तौर पर कम दर्ज की गई कीमत के लिए सटीक समायोजन प्रदान ना कर सके।

सरकार अधिकतम तीन वर्ष की अवधि के लिए भूमि का अस्थायी तौर पर अधिग्रहण कर सकती है। ऐसे मामलों में पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं है।

 

कृपया विस्तार के लिए निम्नलिखित लिंक चटकायें- http://www.prsindia.org/uploads/media/Land%20and%20R%20and%20R/LARR%20-%20Hindi%20Brief.pdf

 

 


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