अन्य नीतिगत पहल

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द ज्यूडिशियल स्टैंडर्डस् एंड अकाऊंटेबिलिटी विधेयक की प्रमुख विशेषताएं

 

इस विधेयक को लोक सभा में 1 दिसम्बर 2010 को मिनिस्ट्री आफ पर्सनल, पब्लिक ग्रीवान्स, एण्ड पैन्शन ने पेश किया। इस विधेयक को पर्सनल और पब्लिक ग्रीवान्स, लाॅ एण्ड जस्टिस की स्टैंडिंग कमेटी (अध्यक्षः जयंती नटराजन) के पास विचार के लिए भेजा गया है। इस पर 30 अप्रैल 2011 तक रिपोर्ट मिलनी थी।

 

यह विधेयक जजों से उनकी पूरी संपत्ति का खुलासा करने के लिये कहता है, कुछ न्यायिक मानक तय करता है और साथ ही उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के जजों के निष्कासन की प्रक्रिया बनाता है।

 

जजों को स्वयं अपनी, व अपनी पत्नी/पति, तथा संतान की संपति और देनदारी का पूरा खुलासा करना होगा।

 

विधेयक में राष्ट्रीय न्यायिक ओवरसाइट कमेटी, कम्प्लेंट स्क्रूटनी पैनल ,व एक इन्वैस्टिगेशन कमेटी की स्थापना की है। कोई भी व्यक्ति किसी जज के खिलाफ उसके अनुचित व्यवहार के आधार पर ओवरसाइट कमेटी कों अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है।

 

अनुचित व्यवहार के आधार पर किसी जज के निष्कासन के लिये संसद में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को ओवरसाइट कमेटी की तहकीकात व जांॅच के लिये भेजा जाएगा।

 

जजों के विरूद्ध शिकायतें व जांच गोपनीय रखी जाऐंगी व निराधार आरोपों के लिये शिकायत कर्ता को दंडित किया जाएगा।

 

ओवरसाइट कमेटी जजों को सुझाव या चेतावनी दे सकती हैं तथा राष्ट्रपति को उनके निष्कासन की सिफारिश भेज सकती है।

 

मुख्य मुद्दे और उनका विश्लेषण

 

मुख्य बात यह है कि विधेयक में प्रस्तावित कार्यविधि से जजों की जवाबदेही और उनकी स्वतंत्रता के बीच में पर्याप्त संतुलन का निर्वाह संभव है कि नहीं। ओवरसाइट कमेटी में गैर न्यायिक व्यक्ति सदस्य हैं। उनके द्वारा न्यायिक सेवा की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का ख़तरा हो सकता है।

 

विधेयक में शिकायत की गोपनीयता भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को दंडित किया गया है। प्रश्न यह उठता है कि गोपनीय रहने वाली किसी निराधार शिकायत पर दंड की ज़रूरत है या नहीं।

 

स्क्रूटनी पैनल में उसी उच्च न्यायालय से जज सदस्य हैं। यह स्थिति उच्चतम न्यायालय के आन्तरिक कार्यविधि (इन हाउस प्रोसीजर) से भिन्न है।

 

ओवरसाइट कमेटी में गैर न्यायिक सदस्य होते हैं। इस कमेटी की कार्यविधि न्यायपालिका की आन्तरिक कार्यविधि (इन हाउस प्रोसीजर) नहीं है। यह स्पष्ट नही है कि ओवरसाइट कमेटी के द्वारा साधारण दंड देने के अधिकार संवैधानिक रूप से वैध हैं या नहीं।

 

विधेयक इस बात की कोई चर्चा नही करता कि संसद के द्वारा दोषी ठहरा दिये जाने के बाद राष्ट्रपति के आदेश से जज के निष्कासित किये जाने पर वह उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दर्ज कर सकता है या नहीं।

 

विशेष जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक देखें- http://www.prsindia.org/uploads/media/Judicial%20Standard/Judicial%20Bill%20%20HINDI.pdf

 

 

 

 

भारत सरकार के वित्तमंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत नए बजट(2010-11) की सुर्खियां

  http://indiabudget.nic.in/ub2010-11/bs/speecha.htm:

महिलाओं का उत्थान
-महिलाओं के लिए इंदिरा गांधी आवाज योजना के अंतर्गत 10 हजार करोड़ रुपए का बजट। इसके अलावा महिलाओं के सशक्तिकरण एवं शिक्षा पर 100 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
-अल्प संख्यnकों की शिक्षा को प्रोत्सारहन देने के लिए 2600 करोड़ रुपए। इसके अंतर्गत विभिन्नव प्रकार की छात्रवृत्तियां प्रदान की जाएंगी।

विकास कार्यक्रम
-देश के इंफ्रास्ट्रडक्चार डेवलपमेंट के लिए इस साल 1,73,552 करोड़ रुपए का प्राविधान किया गया है।
-बिजली क्षेत्र के लिये आवंटन दोगुना कर 5,130 करोड़ रुपये करने का प्रावधान
-राष्ट्री य राजमार्गों को 20 किलोमीटर प्रति दिन बढ़ाने का लक्ष्यय। सड़क निर्माण के लिए बजट में 13 प्रतिशत की वृद्धि।
-लद्दाख क्षेत्र में सौर और पनबिजली परियोजनाओं के लिये 500 करोड़ रुपये
-राजीव आवास योजना के लिए फंड 700% बढ़ेगा
-नरेगा के लिए 41 हजार करोड़ और भारत निर्माण योजना के लिए 48 हजार करोड़
-रेलवे के लिये आवंटन को 950 करोड़ रुपये बढ़ाकर 16,752 करोड़ रुपये किया गया।
-गंगा नदी की सफाई के लिए 500 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य 
-शिक्षा के लिए बजट 26800 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3136 करोड़ रुपए तक बढ़ाया गया है।
-साढ़े तीन हजार करोड़ एलीमेंट्री एजूकेशन के लिए रखा गया है।
- स्वास्थ्य के मद में 22,300 करोड़ रुपए निर्धारित।

सामाजिक सुरक्षा
-लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए नेशनल सोशल सिक्योररिटी फंड की स्थापना की जाएगी। हेल्थ् इंश्योरंस कवर गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के लिए दिया जाएगा। इसका लाभ रिक्शा़ चालक, फेरी लगाने वलो लोगों, घरों में काम करने वाले लोगों, आदि को मिलेगा।

रक्षा बजट
-इस वर्ष रक्षा बजट में 1,47,344 रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 4 प्रतिशत ज्यादा है।

किसानों को लाभ
-कृषि के लिए कर्ज को लौटाने की मियाद 6 महीने बढ़ाई गई, किसान 30 जून 2011 तक कर्ज चुका सकते हैं।
-जलवायु चुनौतियों से संबंधित कृषि पहल के लिये 200 करोड़ रुपये
-बुंदेलखंड के सूख प्रभावित इलाकों के लिए 12 हजार करोड़ रुपए।
-ग्रामीण विकास के लिए 66 हजार करोड़ रुपए निर्धारित
-ग्रामीण विकास के क्षेत्र में पहाड़ी और जमीनी क्षेत्रों में समानता लाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त  धनराशि रखी गई है।
-जमीनी क्षेत्रों के लिए 45 हजार करोड़ और पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए 48 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।
-कृषि उत्पा्दों को बढ़ावा देने के लिए पांच मेगा फूड पार्क स्था पित किए जाएंगे।
-16,500 करोड़ रुपए का बजट पीएसयू बैंकों के लिए
-आपदाओं से प्रभावित किसानों को दो प्रतिशत की दर पर ऋण मुहैया कराया जाएगा
-फूड सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।

अन्य घोषणाएं
-साल २००९-१० के बजट में महिलाओं के लिए चलाई जा रही इंदिरा गांधी आवाज योजना के लिए 10,000 करोड़, स्वास्थ्य  योजनाओं के लिए 22 हजार 300 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।
 
-महिलाओं के साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। महिलाओं को सामाजिक न्याय के लिए 4500 करोड़ रुपए का निर्धारण किया गया है। इसके अंतर्गत मिनिस्ट्रीए ऑफ मायनॉरिटी को 2600 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। जो विभिन्नर प्रकार की छात्रवृत्तियां प्रदान करेगी।
 
-स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम लोगों को रोजगार देने के लिए चलाया जाएगा। कपड़ा मंत्रालय द्वारा यह योजना चलायी जाएगी, जिसमें कामगारों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

-लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए नेशनल सोशल सिक्योयरिटी फंड की स्था पना की जाएगी। हेल्थ् इंश्योरंस कवर गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के लिए दिया जाएगा। इसका लाभ रिक्शाड चालक, फेरी लगाने वलो लोगों, घरों में काम करने वाले लोगों, आदि को मिलेगा।
 
-शहरी क्षेत्रों से झुग्गियों को हटाने की योजना है। बेघर होने वाले लोगों को मकान भी दिया जाएगा।

-बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित इलाकों के लिए 12 हजार करोड़ रुपए ।
 
-नारेगा के लिए 40 हजार 100 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।

-ग्रामीण विकास के क्षेत्र में पहाड़ी और जमीनी क्षेत्रों में समानता लाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्तम धनराशि रखी गई है। जमीनी क्षेत्रों के लिए 45 हजार करोड़ और पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए 48 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।

-अगले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास के लिए 66 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। गंगा नीद की सफाई के लिए 500 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए।

-शिक्षा के लिए सर्व शिक्षा अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा के लिए पूर्वनिर्धारित बजट को बढाया गया है।(26800 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3136 हजार करोड़ रुपए तक)।साढ़े तीन हजार करोड़ प्राथमिक शिक्षा के लिए रखा गया है।

-फूड सिक्योरिटी बिल यानी खाद्य सुरक्षा बिल जल्द ही सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने इस बिल को पेश करने के लिए सभी तैयारियां कर ली हैं।

-इंफ्रास्ट्रडक्चोर के मामले में सरकार तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों को 20 किलोमीटर प्रति दिन बढ़ाने का होगा।

-बिजली के लिए निर्धारित ढाई हजार करोड़ को बढ़ाकर पांच हजार करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा एनएचपीसी के नए पावर प्लांाट जल्द  ही शुरू हो जाएंगे, जिससे बिजली का उत्पाुदन बढ़ेगा। सड़क निर्माण के लिए बजट में 13 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
 
-कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पांच मेगा फूड पार्क स्था पित किए जाएंगे। साथ ही प्राइवेट बैंकों को बढ़ावा दिया जाने के लिए अधिक लाइसेंस दिए जाएंगे।

-प्रणब मुखर्जी ने कहा इस साल कृषि को बढ़ावा देने पर ज्यादा जोर रहेगा। कृषि के क्षेत्र में 4 बड़ी कार्य योजनाएं बनायी गई हैं।
-पहली- 16,500 करोड़ रुपए का बजट पीएसयू बैंकों के लिए निर्धारित किया गया है। इन योजनाओं के अंतर्गत कृषि उत्पाशदों को देश-विदेश तक सुगमता से पहुंचाने के लिए फूड सप्लािई चेन को मजबूत किया जाएगा।

-आपदाओं से प्रभावित किसानों को दो प्रतिशत की दर पर ऋण मुहैया कराया जाएगा, ताकि वे अपने व्यावसाय को पुन: स्थापित कर सकें।
-2009 में किसानों को खाद के लिए अधिक सबसिडी की घोषणा की गई, जिसे बाद में सरकार ने लागू भी कर दिया है। जल्द  ही खाद पर सबसिडी कम होगी

 

  • राष्ट्रीय किसान आयोग ने नीतिगत उपायों के तहत सुझाव दिया है कि किसानों के लिए जीविका की सुरक्षा की दृष्टि से एक पैकेज तैयार किया जाय। इसके अन्तर्गत किसानों को पारिस्थितिकी और बाजार की मांगों के अनुकूल किसानी के लिए प्रौद्योगिकी चुनने की छूट दी जानी चाहिए। मिट्टी की उवर्रा शक्ति की रक्षा और संवर्धन तथा जल-संरक्षण के लिए उपाय किए जाने चाहिए। ध्यान रखा जाना चाहिए कि खेती में इस्तेमाल होने वाले साजो सामान उच्च गुणवत्ता के हों और किसानों को सही वक्त पर कर्ज और बीमा की सुविधा मिल जाय। ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत किसानों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए। 
  • सरकार ने कर्ज माफी और राहत के अपने वायदे के तहत ३१ दिसंबर २००७ तक अधिसूचित व्यावसायिक बैंक और सहकारी समितियों से लिए गए कर्जों को माफ कर दिया है। यह कर्ज माफी सीमांत और छोटे किसानों को दी गई है।
  • अन्य किसानों के बारे में प्रावधान किया गया है कि अगर वे कर्ज की बकाया रकम एकमुश्त चुकाते हैं तो चुकायी जानी वाली रकम में से २५ फीसदी माफ कर दिया जाएगा।  
  • कर्ज माफी की इस योजना के तहत उन किसानों को कोई लाभ नहीं मिलेगा जिन्होंने निजी श्रेणी के बैंकों से कर्ज लिए हैं। शुष्क और कम उर्वरा शक्ति की जमीन पर खेती करने वाले २ एकड़ से ज्यादा जमीन की मिल्कियत वाले किसानों को भी इस कर्ज माफी का कोई लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि कई अध्ययनों से स्पष्ट है कि ऐसे इलाकों के किसान आजीविका की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
  • केरल की सरकार ने एक कर्ज राहत आयोग की स्थापना की है। इसका उद्देश्य गंभीर खेतिहर संकट से जूझ रहे इलाकों और कृषक-वर्गों की पहचान करना और इसके अनुकूल किसानों को राहत पहुंचाना है।
  • खाद्यान्न के उपार्जन को बढ़ाने और किसानों को उनकी उपज का लाभकर मूल्य देने की कोशिश में सरकार ने २००८-०९ के रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को जनवरी २००९ में बढ़ाया। पहले गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य १००० रुपये प्रति क्विंटल था जिसे बढ़ाकर १०८० रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। धान की सामान्य किस्म के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ७४५ रुपये प्रति क्विंटल था जिसे बढ़ाकर ८५० रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

साल २००९-१० के अंतरिम बज़ट के अनुसार-
http://indiabudget.nic.in/ub2009-10(I)/bh/bh1.pdf

  • वर्ष २००३-०४ से २००८-०९ के बीच कृषि के लिए योजनागत आबंटन में ३०० फीसदी का इजाफा हुआ है। साल २००७-०८ में २५ हजार करोड़ रुपये के साथ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों मे ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत सालाना ४ फीसदी की दर वृद्धि करना है।
  • वास्तविक कृषि-ऋण में साल २००३-४ से लेकर २००७-०८ के बीच चीन गुने का इजाफा हुआ है। पूंजी-प्रवाह साल २००३-०४ में ८७००० करोड़ था जो साल २००८-०९ में बढ़कर २,५०,००० करोड़ हो गया।
  • सहकारी संस्थाओं द्वारा छोटी अवधि के लिए दिए जाने वाले कर्ज की व्यवस्था को मजबूत करनेके लिए १३,५०० करोड़ रुपये का एक पैकेज दिया गया है। इसका इस्तेमाल २५ राज्यों में इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए होगा।
  • साल 2009-10 के दौरान भी किसानों को सूद की कम दर पर कर्ज दिया जाना जारी रखा जाएगा ताकि किसानों को 3 से 7 लाख रुपये का कर्ज(फसलों के लिए) 7 फीसदी सूद की दर से हासिल हो सके।
  • कर्जमाफी और कर्ज-राहत की योजना 30 जून 2008 की तय समय सीमा में ही चालू हो चुकी है। इसके अन्तर्गत 65,300 करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये गए हैं। इस योजना से 3.6 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है।.
  • पिछले पांच सालों के दौरान उपार्जन की लागत और अंतर्राष्ट्रीय मूल्य ऊंचे रहने के बावजूद लक्ष्य केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में  बीपीएल श्रेणी और अंत्योदय अन्न योजना के दायरे में आने वाले  परिवारों के लिए वही मूल्य कायम रखे गए जो जुलाई 2000 में थे। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में साल 2002 के जुलाई से लागू मूल्यों को कायम रखा गया है।
  • साल 2008-09 के फसली वर्ष के लिए धान की सामान्य श्रेणी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 900 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। साल 2003-04 में समान्य श्रेणी की धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल था।साल 2003-04 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 630 रुपये प्रति क्विंटल था जिसे साल 2009 में बढ़ाकर 1080 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।



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