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 नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) के नवीनतम क्राईम इन इंडिया-2011 नामक दस्तावेज के अनुसार-

http://ncrb.gov.in/

देश में साल 2011 में महिलाओं के साथ अपराध की कुल 228650 घटनाएं दर्ज हुईं जबकि साल 2010 में महिलाओं के साथ अपराध की कुल 213585 घटनाएं दर्ज हुई थीं।

महिलाओं के साथ आपराधिक कर्म की सर्वाधिक घटनाएं (12.7%) पश्चिम बंगाल से प्रकाश में आईं जबकि त्रिपुरा में महिलाओं के साथ अपराधिक कर्म की दर(क्राईम रेट) सर्वाधिक (37.0) रही।इस मामले में राष्ट्रीय औसत 18.9 का है।.

महिलाओं के साथ आपराधिक कर्म का प्रतिशत आईपीसी के अंतर्गत आने वाले कुल अपराधिक कृत्य की तादाद में पिछले पाँच सालों में बढ़ा है। साल 2007 में महिलाओं पर होने वाले अपराधों का प्रतिशत कुल अपराधों में अगर 8.8% था तो साल 2011 में 9.4% फीसदी।

मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ बलात्कार (3,406), छेड़खानी (6,665) और इम्पोर्टेशन (आईपीसी की धारा- 366-B) की घटनाएं (45) देश में सर्वाधिक हुईं। इनका प्रतिशत क्रमश 14.1%, 15.5% और 56.3% रहा।

आंध्रप्रदेश में महिलाओं के साथ यौन-दुराचार की 42.7% (3,658) घटनाएं हुईं।

महिलाओं के अपहरण 21.2% (7,525) और उनकी देहज-हत्या के सर्वाधिक मामले 26.9% (2,322) उत्तरप्रदेश में प्रकाश में आये।

महिलाओं के साथ आपराधिक कृत्य के कुल मामलों में 13.3% (4,489) दिल्ली में, 5.6% (1,890) बंगलुरु में और 5.5% (1,860) हैदराबाद में प्रकाश में आये।

( अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति से संबंधित इस रिपोर्ट के आंकड़े वेबसाइट के मानवाधिकार खंड में उपलब्ध हैं)

 

प्रोग्रेस फॉर चिल्ड्रेन- अ रिपोर्टकार्ड ऑन एडोलेसेंट(यूनिसेफ), नंबर 10,अप्रैल 2012 नामक दस्तावेज के अनुसार

http://www.unicef.org/media/files/PFC2012_A_report_card_on
_adolescents.pdf
:

 

• दुनिया की कुल आबादी में किशोरवय(10-19 वर्ष) व्यक्तियों की तादाद 1 अरब 20 करोड़ यानी 18 फीसदी है। किशोरवय कुल व्यक्तियों में आधे से अधिक एशिया में रहते हैं। भारत में किशोरवय लोगों की तादाद 24 करोड़ 30 लाख है जो किसी भी अन्य देश के किशोरवय लोगों की संख्या की तुलना में ज्यादा है। चीन में किशोरवय लोगों की संख्या तकरीबन 20 करोड़ है।

• वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 1 करोड़ 40 लाख किशोरवय व्यक्ति सड़क-दुर्घटना, प्रसवजनित जटिलताओं, आत्महत्या, हिंसा, एड्स और अन्य कारणों से मौत का शिकार होते हैं।.

• साल 2010 में भारत में 10-19 साल की उम्र के व्यक्तियों की संख्या कुल आबादी में 20 फीसदी थी।
 
• भारत में 20-24 साल की उम्र की 22 फीसदी महिलाएं साल 2000-2010 की अवधि में 18 साल से कम उम्र में मां बनीं।.

• भारत में 15-19 वर्ष की तकरीबन 47 फीसदी महिलायें औसत से कम वज़न की हैं और उनका बॉडी मॉस इंडेक्स 18.5 से कम है।.

• भारत में 15-19 साल के आयु वर्ग की 50 फीसदी से ज्यादा महिलायें रक्ताल्पता(एनीमिया) की शिकार हैं। इस आयु-वर्ग में तकरीबन 39 फीसदी महिलायें साधारण तौर पर एनीमियाग्रस्त हैं, 15 फीसदी महिलाओं में एनीमियाग्रस्तता मंझोले दर्जे की है जबकि कुल 2 फीसदी महिलायें गंभीर रुप से एनीमियाग्रस्त हैं।.

• .बांग्लादेश, भारत और नाइजीरिया को एक साथ मिलाकर देखें तो किशोरवय में मां बनने वाली हर तीन महिला में से एक इन्हीं देशों से है।.

• भारत में, गरीब परिवारों में 20 साल या इससे कम उम्र की तकरीबन 30 फीसदी माताओं को ही प्रसव के दौरान प्रशिक्षित चकित्साकर्मियों की देखभाल मिल पाती है जबकि अमीर देशों में इस उम्र की तकरीबन 90 फीसदी महिलाओं को प्रसव के दौरान प्रशिक्षित चिकित्साकर्मियों की सहायता हासिल होती है।.

• भारत में अमीर परिवारों की तुलना में गरीब परिवारों में कम उम्र महिलाओं के 18 साल से कम उम्र में मां बनने की संभावना 7 गुना ज्यादा है।

• भारत में साल 2002-2010 की अवधि में 15-19 साल की उम्र के तकरीबन 57  फीसदी पुरुषों ने माना कि पत्नी को पति के द्वारा किन्हीं परस्थितियों में पीटना जायज है जबकि इसी अवधि में इसी उम्र की तकरीबन 53 फीसदी महिलाओं की मान्यता थी कि पत्नी का पति के हाथों प्रताडित होना किन्हीं परिस्थितियों में जायज है।.

• भारत में साल 2005-2010 के बीच 15-19 साल की तकरीबन 8 फीसदी महिलाओं के 15 साल से कम उम्र में यौन-संबंध बने जबकि इसी अवधि में इसी उम्र के 3 फीसदी पुरुषों के यौन-संबंध बने।.

• भारत में 15-19 साल की तकरीबन 19 फीसदी महिलाओं को साल 2005-2010 की अवधि में एड्स की समग्र जानकारी थी जबकि इसी अवधि में इसी उम्र के 35 फीसदी पुरुषों को एडस् की समग्र जानकारी थी।

• भारत में 15-19 साल की तकरीबन 30 फीसदी महिलायें वर्ष 2000-2010 की अवधि में या तो विवाहित थीं या उनके यौन-संबंध बन चुके थे।.

 



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