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सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना-2011 पर आधारित महिलाओं की प्रधानी वाले परिवारों की दशा बताते कुछ महत्वपूर्ण तथ्य--

http://www.im4change.org/hunger-hdi/poverty-and-inequality
-20499.html?pgno=3#socio-economic-and-caste-census-2011-re
leased-in-july-2015

 

--- ग्रामीण भारत में महिलाओं की प्रधानी वाले 93.1 फीसद परिवारों में कोई भी सदस्य ऐसा नहीं जिसकी मासिक आमदनी 10 हजार रुपये से ज्यादा हो. दूसरे शब्दों में ग्रामीण इलाके में महिलाओं की प्रधानी वाले केवल 6.9 फीसद परिवारों में ही सबसे ज्यादा आय अर्जित करने वाला व्यक्ति 10 हजार से ज्यादा की मासिक रकम जुटा सकने की स्थिति में है. 

 

--- महिलाओं की प्रधानी वाले केवल 4.1 फीसद परिवार सालाना आयकर चुकाते हैं. 

 

--- ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की प्रधानी वाले केवल 17.9 फीसद परिवार तीन या इससे ज्यादा कमरों तथा पक्की दीवार और छत के हैं. 

 

--- ग्रामीण अंचल में महिलाओं की प्रधानी वाले 15.1 प्रतिशत परिवार कच्ची दीवार और कच्ची छत वाले घरों में रहते हैं.

 

---ग्रामीण अंचल में महिलाओं की प्रधानी वाले प्रति 1000 परिवारों में से केवल 25 परिवार ऐसे हैं जिनके पास 2.5 एकड़ या इससे ज्यादा रकबे की सिंचाई की सुविधा वाली जमीन है. 

 

---इसी तरह ग्रामीण इलाके में महिलाओं की प्रधानी वाले प्रति 1000 परिवारों में केवल 20 परिवार ऐसे हैं जिनके 5 एकड़ या इससे ज्यादा रकबे की दो फसली सिंचाई सुविधा युक्त जमीन है. 

 

---ग्रामीण इलाके में महिलाओं की प्रधानी वाले केवल 1.3 फीसद परिवारों के पास 7.5 एकड़ सिंचाई की सुविधा वाली जमीन है.

 

---ग्रामीण इलाके में महिलाओं की प्रधानी वाले 23.8 फीसद परिवारों की जीविका स्रोत खेती है जबकि 52.6 फीसद परिवारों का दिहाड़ी मजदूरी.

 

---ऐसे 3.7 फीसद परिवार अंशकालिक अथवा पूर्णकालिक घरेलू कामगार के रुप में जीविका कमाते हैं जबकि  0.4 फीसद परिवार कूड़ा-कर्कट बीन-बेंचकर और 1.2 फीसद भीख अथवा दान में हासिल चंदे के सहारे. 

 

---सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं की प्रधानी वाले सरकारी नौकरीयुक्त परिवारों की संख्या 4.6 फीसद है. 

 

---62.9 फीसद महिला-प्रधानी वाले ग्रामीण परिवारों को सामाजिक-आर्थिक जनगणना में वंचित श्रणी में माना गया है. 

 




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