नरेगा

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What's Inside

पीपुल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (पीएईजी) द्वारा जारी तृतीय मनरेगा ट्रैकर (4 सितंबर, 2020 को जारी) तक पहुंचने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

 

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राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (नरेगा) कार्यान्वयन ट्रैकर, नरेगा की मांग को लेकर 2005 में 'रोज़गार गारंटी के लिए जन संघर्ष' (पी.ए.ई.जी.) गठित हुआ। यह एक समूह हैं जिसमें विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता, शैक्षणिक और अनेक जन संगठनों के सदस्य जुड़े हैं. पी.ए.ई.जी. शोध और अधिवक्तृता के माध्यम से नरेगा के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए चर्चाओं, लोगों द्वारा निगरानी और संगठनों को साथ लाने में एक सहायक की भूमिका निभाना चाहता है। पी.ए.ई.जी. ने अपने काम को आगे बढ़ाते हुए शहरी रोज़गार का मुद्दा भी उठाया है। इसके लिए विभिन्न अभियानों, संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर शहरी रोज़गार गारंटी पर संवाद की एक श्रृंखला शुरू की है।

नरेगा ट्रैकर क्या है और इसका महत्व क्या है?

नरेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों ग़रीबों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अधिनियम के अंतर्गत हर ग्रामीण परिवार को 100 दिन का रोज़गार न्यूनतम मजदूरी दर पर मिलने की गारंटी है। नरेगा के 2 महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, पहला, रोज़गार की मांग के बाद 15 दिनों के अंदर काम उपलब्ध होना चाहिए। अगर ऐसा न हुआ तो मजदूर को बेरोज़गारी का भत्ता मिलना चाहिए। दूसरा, काम समाप्त होने के बाद 15 दिन के अंदर मज़दूरी का वेतन मिलना चाहिए। और अगर ऐसे नहीं हुआ तो देरी का मुआवज़ा मिलना चाहिए। नरेगा की ज़रुरत हमेशा से थी, मगर लॉकडाउन के कारण बेरोज़गारी बहुत बढ़ी है जो मनरेगा द्वारा कम हो पायेगी। इसलिए नरेगा का महत्व वर्तमान में बहुत बढ़ा है। यह साप्ताहिक ट्रैकर नरेगा कार्य को बारीकी से जाँचेंगा, और कई पहलुओं को सुलभ तरीके से प्रस्तुत करेगा। कुछ पहलू हर सप्ताह बदलेंगें, कुछ हर महीने और कुछ 3-4 महीनों में।

पीपुल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (पीएईजी) द्वारा जारी द्वितीय मनरेगा ट्रैकर (17 अगस्त, 2020 को जारी) तक पहुंचने के लिए कृपया यहां क्लिक करें.

द्वितीय मनरेगा ट्रैकर की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं,

• इस ट्रैकर में इस्तेमाल किया सारा डाटा 3 अगस्त 2020 तक का है (केवल अपूर्ण लेन-देन के डाटा का अभिगमन 10 अगस्त 2020 को किया गया)

• 4.17 लाख परिवारों ने अपने 100 दिनों का निर्धारित काम पूरा कर लिया है।

• 2020-21 के संशोधित नरेगा बजट का 48% पहले 4 महीनों में ही खर्च किया जा चुका है।

• 2020-21 के अनुमानित श्रम बजट की तुलना में इस तिमाही में 11% ज़्यादा मजदूर दिवस का रोज़गार उत्पन्न हुआ है।

• जुलाई महीने के भुगतान का 43% केंद्रीय सरकार की ओर से रुका हुआ है।

• लगभग 17% नरेगा की मांग पूरी नहीं हुई है।

• सभी जिलों को मिलाकर, गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के अंतर्गत 12% से ज़्यादा लोगों की रोज़गार की मांग अपूर्ण रही है।

• राज्यों के पास बची हुई नरेगा पूंजी अब 12% से भी कम है।

• अप्रैल 2020 से अब तक 38 लाख से भी ज़्यादा जॉब कार्ड बने हैं।



Rural Expert
 

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