नरेगा

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मनरेगा के अंतर्गत वित्तवर्ष 2017-18 में हुए काम, खर्च तथा रोजगार से संबंधित नवीनतम तथ्य: (ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति)

http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=174734 

 

--महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना अधिनियम का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक वित्त वर्ष में न्यूनतम सौ दिनों का तयशुदा रोज़गार देकर आजीविका सुरक्षा को बढ़ावा देना है.वित्त वर्ष 2017-18 में 48,000 करोड़ रुपये का आवंटन मनरेगा के तहत अब तक का सर्वाधिक आवंटन है.

 

- सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना- 2011 के अनुसार 5.40 करोड़ घर भूमिहीन घरों की श्रेणी में आते हैं, जो अपने जीविकोपार्जन के लिये अनियत श्रम पर निर्भर हैं. सरकार इन घरों को, जिनके पास जॉब कार्ड नहीं हैं एवं वे इच्छुक हैं, मनरेगा के अंतर्गत रोज़गार प्रदान करने के लिये प्रयास कर रही है.

 

---- वर्ष 2017-18 में अब तक 4.35 करोड़ घरों को 156 लाख कार्यों में रोज़गार प्रदान किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 160 करोड़ दिन का रोज़गार सृजित हुआ है. कुल रोज़गार में से 54% रोज़गार महिलाओं के लिये सृजित हुआ है जो वैधानिक तौर पर आवश्यक 33% से बहुत अधिक है.

 

--- वर्ष 2017-18 में अब तक कुल व्यय का तकरीबन 60% प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों (एनआरएम) में हुआ है. वर्ष 2017-18 में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के कामकाज में व्यय 71% है, जो कि वर्ष 2013-14 में लगभग मात्र 48% था.

 

--- वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों पर लगभग 71% व्यय किया गया है, जिससे इस क्षेत्र पर दिए गए ज़ोरको देखा जा सकता है.मिशन जल संरक्षण के तहत पानी की कमी से जूझ रहे 2264 ब्लॉक पर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में जल संचयन एवं जल संरक्षण समेत विशेष ध्यान दिया गया है.

 

--- वर्ष 2017-18 के दौरान अब तक3.6 लाख तलैया एवं 1.55 लाख वर्मी/ एनएडीईपी खाद के गड्ढे तैयार किये गए हैं.

 

--- 96% मेहनताना मनरेगा मज़दूरों के बैंक/ पोस्ट ऑफिस खातों में एनईएफएमएस के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तौर तरीक़ों से दिया जाता है.

 

--- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रयोग से जियो-मनरेगा के अंतर्गत 2 करोड़ सम्पत्तियां भू-चिह्नित की जा चुकी हैं एवं आमजन के समक्ष उपलब्ध कराई जा चुकी हैं 



Rural Expert
 

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