नरेगा

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ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत एमजीनरेगा समीक्षा- ऐन एंथोलॉजी ऑव रिसर्च स्टडीज ऑन नरेगा 2006-12 नामक दस्तावेज के अनुसार-,

  http://www.im4change.org/docs/63503975mgnrega_sameeksha.pdf

 

वित्तवर्ष 2006-07 में कुल 2.1 करोड़ परिवारों को इस योजना के तहत रोजगार मिला, वित्तवर्ष 2007-08 में यह संख्या बढ़कर 3.4 करोड़, वित्तवर्ष 2008-09 में 4.5 करोड़, वित्तवर्ष 2009-10 में  5.3 करोड़ तथा वित्तवर्ष 2010-11 में इस योजना के तहत रोजगार पाने वालों की संख्या 5.5 करोड़ परिवार तक पहुंची है, साल 2011-12 के लिए इस योजना के तहत रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या फिलहाल 5 करोड़(प्रॉविजनल आंकड़ा) है।

 

साल 2006-07 में एमजीनरेगा के तहत कुल 90.5 करोड़ व्यक्ति-दिवस(पर्सनडेज) रोजगार का सृजन हुआ। साल 2007-08 में इसकी संख्या बढ़कर 143.59 करोड़ व्यक्ति-दिवस हो गई। साल  2008-09 के दौरान 216.3 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार का सृजन इस योजना के तहत हुआ जबकि साल  2009-10 में 283.6 करोड़ व्यक्ति-दिवस और साल  2010-11 में 257.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार का सृजन हुआ। वित्तवर्ष 2011-12 के लिए यह आंकड़ा 209.3 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजन का है।

 

वित्तवर्ष 2006-07 से वित्तवर्ष 2011-12 के बीच एमजीनरेगा के तहत जितने व्यक्ति-दिवस रोजागर का सृजन हुआ उसका 51 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के हिस्से में आया जबकि महिलाओं के हिस्से में 47 फीसदी। यह एमजी नरेगा के अधिनियम में किए गए विधान(33 फीसदी) से ज्यादा है। 

वित्तवर्ष 2006-07 में एमजी नरेगा पर. 8824 करोड़ रुपये का खर्च हुआ जबकि वित्तवर्ष 2007-08 में इस योजना पर व्यय की गई राशि 15857 करोड़ की थी। वित्तवर्ष 2008-09 में इस योजना पर. 27250 करोड़ रुपये खर्च किए गए, वित्तवर्ष 2009-10 में यह रकम बढ़कर 37905 करोड़ रुपये हो गई। वित्तवर्ष 2010-11 में इस योजना पर 39377 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि वित्तवर्ष 2011-12 में . 37303 करोड़ रुपये।

 

साल 2006 में हुई शुरुआत के बाद से अबतक एमजीनरेगा के तहत तकरीबन 1,10,000 करोड़ रुपये का भुगतान मजदूरी के तौर पर ग्रामीण गरीब परिवारों को हुआ है और 1200 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार का सृजन हुआ है। साल 2008 से हर साल औसतन 5 करोड़ परिवारों को इस योजना के तहत रोजगार दिया गया है।

 

रोजगार पाने वाले 80 फीसदी परिवारों को सीधे डाकघर या बैंक में खुले खाते के जरिए भुगतान किया गया है और 10 करोड़ नए खाते बैंक या फिर डाकघरों में खुले हैं।

 

 

प्रति व्यक्ति-दिवस औसत मजदूरी का भुगतान योजना की शुरुआत के बाद से अबतक 81 फीसदी बढ़ चुका है। इस बढ़ोत्तरी में राज्य-स्तर पर अंतर है। बिहार-झारखंड में नरेगा में काम के लिए मजदूर को अगर 122 रुपये मिलते हैं तो हरियाणा में यह 191 रुपये प्रति व्यक्ति-दिवस है।

 

इस योजना के तहत वित्तवर्ष 2006-07 में किए गए कुल कामों की संख्या 8.4 लाख थी, वित्तवर्ष 2007-08 में 17.9 लाख, वित्तवर्ष 2008-09 में  27.8 लाख, वित्तवर्ष 2009-10 में 46.2 लाख, वित्तवर्ष 2010-11 में, 51 लाख जबकि वित्तवर्ष 2011-12 के लिए यह आंकड़ा(प्राविजनल) 73.6 लाख कार्यों का है।

 

एमजीनरेगा के तहत वित्तवर्ष 2006-07 में कुल 3.9 लाख काम पूरे हुए, वित्तवर्ष 2007-08 में पूरा किए गए कामों की संख्या 8.2 लाख रही, वित्तवर्ष 2008-09 में इस योजना के तहत कुल 12.1 लाख कामों के पूरा किया गया जबकि वित्तवर्ष 2009-10 में पूरा किए गए कामों की संख्या 22.6 लाख रही। योजना के तहत वित्तवर्ष 2010-11 में कुल 25.9 कार्य पूरे हुए जबकि वित्तवर्ष 2011-12 के लिए यह आंकड़ा(प्राविजनल) 14.3 लाख कार्यों के पूरा किए जाने का है।

 

योजना की शुरुआत से लेकर अबतक इसके तहत 146 लाख कार्य पूरा करने के लिए हाथ में लिए गए। इनमें 60 फीसदी काम पूरा किए जा चुके हैं। इन कामों में-

 

- 19 फीसदी ग्रामीण इलाकों में सड़क बनाने से जुड़े हैं।

 

- 25 फीसदी काम जल-संरक्षण और जलाच्छादन के हैं।

 

- 14 फीसदी काम नहरों से की जाने वाली सिंचाई तथा परंपरागत जलस्रोतों के नवीकरण से जुड़े हैं।

 

- 13 फीसदी काम बाढ़ से सुरक्षा और सूखे से बचाव के हैं।

 

- 13 फीसदी काम भूमि-विकास से जुड़े हैं।

 

- 14 फीसदी काम निजी भूमि( छोटे, सीमांत, अनुसूचित जाति-जनजाति, गरीबी रेखा से नीचे के लोग, इंदिरा आवास योजना के लाभार्थी आदि की जमीन) पर किए गए हैं।

इस योजना के तहत 12 करोड़ जॉबकार्ड दिए गए हैं और 9 करोड़ मस्टर रोल मैनेजमेंट इन्फॉरमेशन सिस्टम(एमआईएस) पर अपलोड किए गए हैं ताकि इनकी सार्वजनिक समीक्षा संभव हो। एमआईएस पर साल 201011 से योजना पर किए गए कुल खर्चों का ब्यौरा भी उपलब्ध है।

 


Rural Expert
 

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