भोजन का अधिकार

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राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के ६१ वें दौर की गणना (जुलाई २००४-जून २००५) पर आधारित पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम एंड अदर सोर्सेज ऑव हाऊसहोल्ड कंज्मप्शन २००४-०५ नामक दस्तावेज(रिपोर्ट संख्या-५१०) के अनुसार-

 http://mospi.nic.in/press_note_510-Final.htm:

 

•  ८१ फीसदी ग्रामीण परिवारों और ६७ फीसदी शहरी परिवारों के पास राशन कार्ड है। बीपीएल कार्ड २६.५ फीसदी ग्रामीण परिवारों और १०.५ फीसदी शहरी परिवारों को हासिल है। अंत्योदय योजना के अंतर्गत दिया जाने वाला कार्ड एक फीसदी से भी कम ग्रामीण और शहरी परिवारों को हासिल
 

• ग्रामीण इलाकों में १८.७ फीसदी परिवार और शहरी इलाकों में ३३.१ फीसदी परिवारों के पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जारी किया जाने वाला कोई भी कार्ड नहीं है।
 

•  सर्वेक्षण के लिए प्रति व्यक्ति मासिक खर्च को आधार बनाकर क्रमवार १२ श्रेणियां बनायी गई थीं। ग्रामीण इलाके में प्रति व्यक्ति मासिक खर्चे के आधार पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाली श्रेणी में ५ फीसदी आबादी थी। इस श्रेणी के ११ फीसदी परिवारों के पास बीपीएल कार्ड थे। इससे नीचे की श्रेणी में आने वाले कुल ५ फीसदी ग्रामीण आबादी में १४ फीसदी परिवारों के पास बीपीएल कार्ड थे। मासिक खर्चे के आधार पर क्रमवार बनायी गई श्रेणी की तीसरे पादान पर १० फीसदी ग्रामीण आबादी थी और इस वर्ग के १८ फीसदी परिवारों के पास बीपीएल कार्ड थे।
 

• शहरी इलाके में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च को आधार बनाकर क्रमवार बनायी गई श्रेणियों में सबसे नीचे आने वाले तबके के परिवारों में महज २९ फीसदी के पास बीपीएल कार्ड थे।


• ग्रामीण इलाके के राशनकार्डधारियों की कुल संख्या में १० फीसदी परिवार अनुसूचित जनजाति के, २२ फीसदी परिवार अनुसूचित जाति के , ४२ फीसदी परिवार अन्य पिछड़ा वर्ग के और २६ फीसदी परिवार बाकी वर्गों के हैं।
 

• शहरी  इलाके के राशनकार्डधारियों की कुल संख्या में २ फीसदी परिवार अनुसूचित जनजाति के, १६ फीसदी परिवार अनुसूचित जाति के , ३५ फीसदी परिवार अन्य पिछड़ा वर्ग के और ४७ फीसदी परिवार बाकी वर्गो के हैं।
 
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•  देश के ग्रामीण इलाकों ४३ फीसदी कृषि-मजदूर परिवारों के पास बीपीएल कार्ड हैं जबकि खेती से अलग मजदूरी करने वाले ३५ फीसदी परिवारों के पास बीपीएल कार्ड है।


•  ०.०१ हेक्टेयर से कम जमीन की मल्कियत वाले ५१ फीसदी परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है। एक हेक्टेयर और उससे ज्यादा जमीन की मल्कियत वाले ७७-८७ फीसदी परिवारों के पास एक ना एक तरह का राशन कार्ड है।जहां तक गरीब तबके के लिए जारी किये जाने वाले राशन कार्ड का सवाल है, सर्वाधिक बीपीएल कार्ड (३२ फीसदी) और अंत्योदय कार्ड (४ फीसदी) ०.०१-०.४१ हेक्टेयर जमीन की मिल्कियत वाले परिवारों के पास थे।


•  पीडीएस के तहत प्रदान किए जाने वाले चावल की सबसे ज्यादा खपत वाले राज्य हैं-तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और केरल।
 

• पीडीएस के तहत प्रदान किये जाने वाले गेहूं या आटा की सर्वाधिक खपत कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके और मध्यप्रदेश में है।
 

•  पीडीएस से प्राप्त चीनी की सर्वाधिक खपत वाले राज्यों के नाम हैं- तमिलनाडु (६५ फीसदी ग्रामीण परिवार और ६४ फीसदी शहरी परिवार), असम (४० फीसदी ग्रामीण और १६ फीसदी शहरी) और आंध्रप्रदेश (ग्रामीण ३६ फीसदी, शहरी १५ फीसदी)।दूसरी तरफ पंजाब, हरियाणा, बिहार और झारखंड जैसे राज्य हैं जहां पीडीएस से प्राप्त चीनी की खपत ग्रामीण और शहरी, दोनों ही इलाकों के १ फीसदी परिवार भी नहीं करते।
 

•  पंजाब और हरियाणा को छोड़ दें तो बाकी सभी बड़े राज्यों के ग्रामीण इलाकों में ५५ फीसदी से ज्यादा परिवार पीडीएस से प्राप्त किरोसिन तेल का इस्तेमाल करते हैं। पश्चिम बंगाल में तो ९१ फीसदी ग्रामीण और ६० फीसदी शहरी परिवार पीडीएस से प्राप्त किरोसिन तेल का इस्तेमाल करते हैं।


•  साल २००४-०५ में लगभग २२ फीसदी ग्रामीण परिवारों के बच्चे मिड डे मील योजना से लाभान्वित हुए। समेकित बाल विकास परियोजना(आईसीडीएस) से ५.७ फीसदी ग्रामीण परिवारों के बच्चे लाभान्वित हुए। फूड-फ‌ार-वर्क योजना से महज २.७ फीसदी परिवारों को लाभ मिला जबकि बुजुर्गों के लाब के लिए चलायी गई अन्नपूर्णा योजना से महज ०.९ फीसदी ग्रामीण परिवार लाभान्वित हुए।


•  भारत के ग्रामीण और शहरी इलाके में अनुसूचित जनजाति के परिवार फूड फॉर वर्क योजना से आपेक्षिक रुप से ज्यादा लाभान्वित हुए हैं। इस सामाजिक वर्ग के लोगों को समेकित बाल विकास योजना के अन्तर्गत भी अन्य वर्गों की तुलना में ज्यादा लाभ पहुंचा है।



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