Resource centre on India's rural distress
 
 

विस्थापन

खास बातें-

  • दुनिया में सबसे ज्यादा बड़े बांध बनाने वाले देशों में भारत तीसरे नंबर पर है। यहां अभी 3600 से ज्यादा बड़े बांधे हैं, जबकि 700 से ज्यादा अभी बनने की प्रक्रिया में हैं।
  • भारत में बांधों की वजह से हुए विस्थापन के बारे में अलग अलग-अलग अनुमान हैं। दास और राव (1989) ने दावा किया कि भारत में बांध परियोजनाओं की वजह से दो करोड़ दस लाख लोग विस्थापित हुए।
  • बड़े और मझौले बांधों से विस्थापित हुए लोगों के बारे में उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक जिन 140 बांधों के बारे में आकंड़े उपलब्ध हैं, उनसे  44 लाख लोग विस्थापित हुए।
  • कई अनुसंधानकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि बड़ी परियोनजाओं से विस्थापित हुए लोगों की संख्या एक से ढाई करोड़ के बीच है। 1989 में एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन के जरिए फर्नांडिस, दास और राव ने दो करोड़ दस लाख लोगों के विस्थापित होने का अनुमान पेश किया। मशहूर विद्वान और प्रशासक डॉ. एनसी सक्सेना का अनुमान है कि 1947 के बाद से बड़ी परियोजनाओं से विस्थापित हुए लोगों की संख्या पांच करोड़ है।
  • भारत ने तेज आर्थिक विकास के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है। इन क्षेत्रों के लिए करीब 50,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की जरूरत होगी। औद्योगिक, खनन, सिंचाई और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सभी परियोजनाओं के लिए 1 लाख 49 हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।
  • भू-अर्जन कानून, 1894 वह प्रमुख कानून है, जिसके प्रावधानों के जरिए जमीन का अधिग्रहण का होता है।
  • आजादी के बाद से बांधों, खदानों, ताप बिजली संयंत्रों, कॉरिडोर परियोजनाओं, फील्ड फायरिंग रेंज, एक्सप्रेस-हाईवे, हवाई अड्डों, राष्ट्रीय पार्कों, अभायरण्यों, औद्योगिक नगरों और यहां तक कि पॉल्ट्री फॉर्म्स के लिए भी लोग विस्थापित किए गए हैं और इनकी संख्या कम से कम पांच करोड़ है।