शिक्षा का अधिकार

शिक्षा का अधिकार

Share this article Share this article

शिक्षा का अधिकार विधेयक- २००८ के नवंबर में मिली हरी झंडी

आजादी के छह दशक बाद भारत सरकार ने आखिरकार ६-१४ साल के आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने से संबद्ध विधेयक को हरी झंडी दे दी।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

• निजी स्कूलों को पहली कक्षा में कुल सीट के २५ फीसदी पर समाज के वंचित और कमजोर तबके के छात्रों को हर साल दाखिला देना होगा। सरकार इन बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करेगी।

• दाखिले के लिए कैपिटेशन फीस नहीं वसूला जा सकता।

• दाखिले के लिए छात्रों की छंटनी करने के उद्देश्य से छात्र या फिर उसके अभिभावक की कोई जांच-परीक्षा नहीं ली जाएगी।

• छात्र को कोई शारीरिक दंड़ नहीं दिया जा सकता। उसे स्कूली पढ़ाई पूरी करने से पहले स्कूल से निष्कासित या प्रतिवारित नहीं किया जा सकता। शिक्षक को आपदा राहत कार्य या चुनावी कार्य के अतिरिक्त अन्य किसी भी गैर-शैक्षिक काम में नहीं लगाया जा सकता। बिना मान्यता के कोई स्कूल चलाने पर दंडित किया जाएगा।

• विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि कानून के लागू होने के तीन साल के अंदर-अंदर सरकार सभी बच्चों(६-१४ साल के) को उनके पड़ोस में मौजूद स्कूल में प्राथमिक शिक्षा दिलाने के प्रयास शुरु कर देगी। स्कूल की परिभाषा करते हुए इसमें कई तरह के ढांचों को स्कूल का दर्जा दिया गया है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर बच्चा किन्हीं आर्थिक बाध्यताओं की वजह से स्कूल में दाखिला नहीं ले पा रहा तो सरकार इस बाध्यता को दूर करने के प्रयास करेगी।

• शिक्षा के अधिकार को कानून की शक्ल लेने में ६ दशक से भी ज्यादा समय लगा।

• आलोचकों ने ध्यान दिलाया है कि ६ साल से कम उम्र और १४ साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को इस विधेयक में शामिल नहीं किया गया है। फिर सरकार ने शिक्षकों की संख्या और उनकी योग्यता में कमी के बारे में भी इस विधेयक में चु्प्पी साधी है। मौजूदा स्कूलों में अभी तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, नए स्कूलों का बनना  तो खैर दूर की बात है।  



Rural Expert


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close