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के ज्योति पारेख और कीरित पारेख द्वारा प्रस्तुत क्लाइमेंट चेंज-इंडियाज परसेप्शन, पोजीशनस्,   पॉलिसिज् एंड पॉसिब्लिटिज् नामक दस्तावेज के अनुसार-
http://www.oecd.org/dataoecd/22/16/1934784.pdf 

• जलवायु में बदलाव के कारण तटीय इलाके डूबेंगे और इस वजह से इन इलाकों से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन होगा। इससे ऐसे शरणार्थियों का तादाद बढ़ेगी जिनके पलायन का कारण सिर्फ जलवायु परिवर्तन है।

• भारत में गेहूं और चावल के उत्पादन में जलवायु परिवर्तन के कारण कमी आएगी।

• जलवायु परिवर्तन से पैदा स्थितियों मसलन चक्रवात आदि से सर्वाधिक आघात गरीब तबके को लगेगा। इस सिलसिले में सिर्फ आंध्रप्रदेश में १९९६ के चक्रवात को याद कर लेना भर काफी होगा।

• भारत में उर्जा क्षेत्र सबसे ज्यादा (४२ फीसदी) कार्बन डायआक्साइड का उत्सर्जन करता है। उर्जा क्षेत्र के बाद इस मामले में स्थान आता है लौह-इस्पात उद्योग और परिवहन का।



Rural Expert
 

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