Resource centre on India's rural distress
 
 

खबरदार

 

खास बात
• गंगोत्री ग्लेशियर सालाना ३० मीटर की गति से सिकुड़ रहा है।*
• अगर समुद्रतल की ऊंचाई एक मीटर बढ़ती है तो भारत में ७० लाख लोग विस्थापित होंगे।*
• पिछले बीस सालों में ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी जिवाश्म ईंधन के दहन से हुई है।*
• मानवीय क्रियाकलापों के कारण ग्लोबल ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन में लगातार बढोत्तरी हो रही है। अगर औद्योगीकरण के पहले के समय से तुलना करें तो मानवीय क्रियाकलापों के कारण साल १९७० से २००४ के बीच ग्लोबल ग्रीन हाऊस के उत्सर्जन में ७० फीसदी की बढोत्तरी हुई है।**
• साल १९७० से २००४ के बीच ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन के सर्वप्रमुख कारण हैं-उर्जा-आपूर्ति, परिवहन और उद्योग। आवासीय और व्यावसायिक इमारतें, वनभूमि और खेती से होने वाले ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन की दर उपर्युक्त की तुलना में बहुत कम है। **
• पर्यावरण के बदलाव के कारण भारत में चावल और गेहूं की ऊपज में कमी आएगी।***
• पर्यावरण में हो रहे बदलाव के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी होगी और इसकी सबसी गहरी चोट गरीबों पर पड़ेगी।***

* पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार
** क्लाइमेट चेंज(२००७): इंटरगवर्नमेंटल पैनन ऑन क्लाइमेट चेंज द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट
*** कीरित पारेख और ज्योति पारेख(२००२): क्लाइमेट चेंज-इंडियाज् परसेप्शनस्,पोजीशनस्,पॉलिसिज एंड पॉसिबिलिटीज, ओईसीडी।