कुपोषण

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आईएफपीआरआई द्वारा तैयार [inside]ग्लोबल न्यूट्रीशन रिपोर्ट 2014[/inside]: एक्शन एंड अकाउंटबिलिटी टू एक्सीलेरेट द वर्ल्डस् प्रोग्रेस ऑन न्यूट्रीश नामक दस्तावेज के अनुसार :

 

http://www.im4change.orghttps://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//uploaded/Global%20Nutrition%20Report%202014.pdf

 

साल 2005-06 में 5 साल के कम उम्र के 47.9 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार यानि मानक से कम लंबाई के थे, ऐसे बच्चों की संख्या साल 2013-14 में घटकर 38.8 प्रतिशत हो गई है। नतीजतन स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 5.82 करोड़ से घटकर साल 2013-14 में 4.38 करोड़ रह गई है।

 

साल 2005-06 में 5 साल के कम उम्र के 20.0% बच्चे वेस्टिंग के शिकार थे यानि ऐसे बच्चे का वज़न उनकी लंबाई के लिए मान्य वज़न से कम था। ऐसे बच्चों की संख्या साल 2013-14 में घटकर 15.0%  हो गई है। नतीजतन स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 2.43  करोड़ से घटकर साल 2013-14 में 1.69  करोड़ रह गई है।

स्टंटिंग के घटने की सालाना दर 2.6 प्रतिशत है जबकि भारत के लिए वांछित सालाना दर 3.7 प्रतिशत है। लेकिन यह दर पिछले सर्वे के अनुमान( तब स्टंटिंग के घटने की दर 1.7 बतायी गई थी) से ज्यादा है।

साल 2005-06 से 2013-14 यानि आठ सालों की अवधि में स्तनपान की परिघटना में सालाना 5.5 प्रतिशत( 46.4 से 71.6 प्रतिशत) की दर से बढोत्तरी हुई है यह दर वर्ल्ड हैल्थ असेंबली द्वारा साल 2025 के लिए निर्धारित लक्ष्य (भारत के लिए 1.5 प्रतिशत) से ज्यादा है।

दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाले देशों में दूसरे नंबर पर कायम भारत से संबंधित आंकड़ों के संकेत हैं कि वह वर्ल्ड हैल्थ असेंबली द्वारा निर्धारित सूचकांकों पर अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से प्रगति कर रहा है। मिसाल के लिए, अगर प्रारंभिक के दौर के आंकड़ों में अगर बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं होता तो कहा जा सकता है कि स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या भारत में 1 करोड़ से ज्यादा की संख्या में कम की जा चुकी है।

भारत सरकार ने बच्चों के पोषण से संबंधित एक नया सर्वेक्षण किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने अभी तक इस सर्वेक्षण के आंकड़ों तथा अपनायी गई पद्धति का पुनरावलोकन नहीं किया है। इस वजह से नये सर्वेक्षण के तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटाबेस में अभी शामिल नहीं हो पाये हैं। लेकिन अगर कुपोषण से संबंधित भारत सरकार के नये आंकड़ों का अंतिम रुप भी वही रहता है जैसा कि प्रारंभिक गणना से संबंधित रिपोर्ट में है तो फिर वर्ल्ड हैल्थ असेंबली द्वारा निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के संदर्भ में और भी ज्यादा आशावान हुआ जा सकता है।

महाराष्ट्र राज्य के अनुभवों से संकेत मिलते हैं कि अगर 6-12 साल तक लगातार प्रयास किए जायें तो पोषणगत स्थितियों को सुधारने में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

महाराष्ट्र से संबंधित एक नये राजव्यापी सर्वेक्षण (Haddad et al 2014) का निष्कर्ष है कि वहां बच्चों में स्टंटिंग की परिघटना में महज सात सालों के अंदर एक तिहाई की कमी(36.5 से 24.0 प्रतिशत) आई। वहां स्टंटिंग के घटने की सालाना दर 5.8 प्रतिशत रही। स्टंटिंग की घटना में कमी के लिए पोषणगत उपायों के अतिरिक्त, भोजन और शिक्षा की उपलब्धता की स्थिति को बेहतर बनाना तथा गरीबी और प्रजनन दर को कम करना जरुरी है।

 


Rural Expert


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