कुपोषण

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नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे-4 के आंकड़ों के अनुसार भारत में स्टटिंग और वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या--

मूल रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें

राज्यवार वेस्टिंग के शिकार बच्चों का अनुपात--

देश के 29 राज्यों में मात्र 12 राज्य ऐसे हैं जहां 2005-06 से 2015-16 के बीच पांच साल या इससे कम उम्र के वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या में तुलनात्मक रुप से कमी आयी है. 

 

2015-16 में पांच साल तक की उम्र के वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या झारखंड में सबसे ज्यादा(29 प्रति.) थी. गुजरात (26.4 प्रति.), कर्नाटक (26.1 प्रति.), मध्यप्रदेश (25.8 प्रति.), और महाराष्ट्र (25.6 प्रति.) में भी ऐसे बच्चों की तादाद 20 प्रतिशत से ज्यादा है. 

 

मिजोरम में वेस्टिंग के शिकार बच्चों की तादाद आनुपातिक रुप से सबसे कम (6.1 प्रति.) कम है. जिन राज्यों में वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या 15 फीसद से कम है उनके नाम हैं मणिपुर (6.8 प्रति.), नगालैंड (11.2 प्रति.), जम्मू-कश्मीर (12.1 प्रति.), और हिमाचल प्रदेश (13.7 प्रति.).  

 

एनएफएचएस-4 के नये आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या ग्रामीण इलाकों (21.5 प्रति.) में शहरों(20.0 प्रति.) की तुलना में ज्यादा है. 

 

राज्यवार अंडरवेट बच्चों की संख्या--

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी 28 राज्यों में एनएफएचएस-3 की तुलना में एनएफएचएस-4 में अंडरवेट बच्चों की संख्या में कमी आई है.

 

2015-16 में झारखंड में अंडरवेट बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा (47.8 प्रति.) थी. बिहार (43.9 प्रति.), मध्यप्रदेश (42.8 प्रति.), उत्तरप्रदेश (39.5 प्रति.), और गुजरात (39.3 प्रति.) में भी अंडरवेट बच्चों की संख्या तुलनात्मक रुप से ज्यादा है.

 

मिजोरम में अंडरवेट बच्चों की संख्या का अनुपात सबसे कम (11.9 प्रति.) है. मणिपुर (13.8 प्रति.), सिक्किम (14.2 प्रति.), केरल (16.1 प्रति.) और जम्मू-कश्मीर (16.6 प्रति.) में भी अंडरवेट बच्चों की संख्या झाऱखंड की तुलना में कम से कम तीन गुणा कम है.  

 

एनएफएचएस-4 के आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि ग्रामीण इलाकों में अंडरवेट बच्चों की संख्या का अनुपात (38.3 प्रति.) शहरी इलाकों (29.1 प्रति.) की तुलना में ज्यादा है.

 

राज्यवार  स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या--

 

सभी 29 राज्यों में स्टटिंग के शिकार बच्चों की संख्या में एनएफएचएस-3 की तुलना में एनएफएचएस-4 में कमी आई है.

 

2015-16 में स्टटिंग के शिकार बच्चों की सबसे ज्यादा तादाद बिहार (48.3 प्रतिशत) में पायी गई. यूपी((46.3 प्रति.), झारखंड (45.3 प्रति.), मेघालय (43.8 प्रति.), और मध्यप्रदेश (42.0 प्रति.) में भी स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. 

 

केरल में स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या आनुपातिक रुप में सबसे कम (19.7 प्रति.) है. इसके बाद गोवा (20.1 प्रति.), त्रिपुरा (24.3 प्रति.), पंजाब (25.7 प्रति.), और हिमाचल प्रदेश (26.3 प्रति.) का स्थान है.

 

एनएफएचएस-4 के नये आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या गांवों(41.2 प्रतिशत) में ज्यादा है, शहरों में तुलनात्मक रुप से कम(31.0 प्रतिशत). 



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