भुखमरी-एक आकलन

भुखमरी-एक आकलन

Share this article Share this article

What's Inside

 

[inside]ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019: द चैलेंज ऑफ हंगर एंड क्लाइमेट चेंज [/inside] (अक्टूबर, 2019 में जारी), वेल्थुन्गेरिल्फे और कंसर्न वर्ल्डवाइड द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं, (एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें):

 

वर्ष 2019 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में 117 देशों में से भारत 102 वें स्थान पर है.

 

• पड़ोसी देश जैसे चीन (GHI स्कोर: 6.5; GHI रैंक: 25), श्रीलंका (GHI: 17.1; GHI रैंक: 66), म्यांमार (GHI स्कोर: 19.8; GHI रैंक: 69), नेपाल (GHI स्कोर: 20.8; जीएचआई रैंक: 73), बांग्लादेश (जीएचआई स्कोर: 25.8; जीएचआई रैंक: 88) और पाकिस्तान (जीएचआई स्कोर: 28.5; जीएचआई रैंक: 94) भारत से बेहतर स्थिति में हैं (जीएचआई स्कोर: 30.3; रैंक: 102).

 

• भारत का जीएचआई (GHI) स्कोर वर्ष 2000 में 38.8, 2005 में 38.9, 2010 में 32.0 और 2019 में 30.3 रहा है. 2019 में 30.3 के GHI स्कोर की वजह से भारत को गंभीर दशा वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है.

 

• भारत में जनसंख्या के हिसाब से अल्पपोषित का अनुपात 1999-2001 के दौरान 18.2 प्रतिशत, 2004-2006 के दौरान 22.2 प्रतिशत, 2009-2011 के दौरान 17.5 प्रतिशत और 2016-2018 के दौरान 14.5 प्रतिशत था.

 

• भारत में 5 वर्ष से कम की उम्र के 20.8 फीसदी बच्चे लंबाई के हिसाब से जरूरी निर्धारित औसत वजन से कम हैं. वेस्टिंग (लंबाई के हिसाब से औसत से कम वजन) के शिकार हुए पांच साल से कम उम्र के बच्चों का अनुपात खराब स्तिथि में है. यह 1998-2002 के दौरान 17.1 प्रतिशत, 2003-2007 के दौरान 20.0 प्रतिशत, 2008-2012 के दौरान 16.5 प्रतिशत और 2014-2018 के दौरान 20.8 प्रतिशत था.

 

• भारत में 5 वर्ष से कम की उम्र के 37.9 फीसदी बच्चे जरूरी निर्धारित औसत लंबाई से कम हैं. स्टटिंग (उम्र के हिसाब से कद में छोटे) के शिकार हुए पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों का अनुपात भी बेहद खराब स्थिति में है. यह 1998-2002 के दौरान 54.2 प्रतिशत, 2003-2007 के दौरान 47.8 प्रतिशत, 2008-2012 के दौरान 42.0 प्रतिशत और 2014-2018 के दौरान 37.9 प्रतिशत था.

 

• भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2000 में 9.2 प्रतिशत, 2005 में 7.5 प्रतिशत, 2010 में 5.8 प्रतिशत और 2017 में 3.9 प्रतिशत थी.

 

वेस्टिंग के शिकार हुए बच्चों की दर (20.8 प्रतिशत) के मामले में भारत की स्थिति सबसे तेजी से खराब हो रही है. भारत की वेस्टिंग दर सभी देशों के मुकाबले सबसे बदतर स्थिति में है.

 

• वेस्टिंग दर (लंबाई के हिसाब से औसत से कम वजन) के मामले में सबसे खराब स्थिति यमन, जिबूती और भारत (17.9 से 20.8) की है.

 

• भारत की स्टंटिंग दर(उम्र के हिसाब से कद में छोटे), 37.9 प्रतिशत, को इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व के संदर्भ में बहुत बिगड़ी हुई दशा के रूप में चिन्हित किया गया है.

 

• भारत में, 6 से 23 महीने की उम्र के सभी बच्चों में से केवल 9.6 प्रतिशत को न्यूनतम अनिवार्य आहार मिल पाता है. इसका मतलब है कि उस आयु वर्ग के लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त जरूरी आहार नहीं मिल पाता है.

 

• 2015-2016 तक, 90 प्रतिशत भारतीय परिवारों ने बेहतर पेयजल इस्तेमाल किया है, जबकि 39 प्रतिशत घरों में स्वच्छता की सुविधा नहीं थी (IIPS और ICF 2017). 2014 में प्रधानमंत्री ने खुले में शौच को समाप्त करने के लिए "स्वच्छ भारत" अभियान की शुरुआत की और यह सुनिश्चित किया कि सभी घरों में शौचालय बनें. नए शौचालय निर्माण के बाद भी, लोग अभी भी खुले में शौच करने जाते हैं. यह स्थिति जनता के स्वास्थ्य को खतरे में डालती है और फलस्वरूप बच्चों की वृद्धि और विकास के लिए पोषक तत्वों को अवशोषित करने की उनकी क्षमता पर बुरा असर पड़ता है (न्योर एट अल 2014. कारुसो एट अल. 2019).

 

• किसी देश का GHI स्कोर चार संकेतकों के आधार पर होता है.

- अल्पपोषित: आबादी का हिस्सा जोकि कुपोषित/अल्पपोषित है (जिनकी भोजन कैलोरी की मात्रा अपर्याप्त है);

- चाइल्ड वेस्टिंग: पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे जो वेस्टिंग का शिकार हैं ( जिनका लंबाई के हिसाब से कम वजन है, जोकि तीव्र कुपोषण को दर्शाता है);

- चाइल्ड स्टंटिंग: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे जो स्टंटिंग के शिकार हैं (जोकि उम्र के हिसाब से नाटे हैं यानि उम्र के हिसाब से कम लंबाई है, जोकि क्रोनिक अल्पपोषण को दर्शाते हैं); तथा

- बाल मृत्यु दर: पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (आंशिक रूप से, अपर्याप्त पोषण और अस्वास्थ्यकर वातावरण के घातक मिश्रण का प्रतिबिंब)

 

• हाल के दशकों में वैश्विक स्तर पर चार घटक संकेतकों में से प्रत्येक (ऊपर चर्चा की गई) सूचक के उच्चतम अवलोकन स्तर के आधार पर 100-पॉइंट पैमाने पर एक मानकीकृत स्कोर दिया गया है.

 

• मानकीकृत स्कोर को प्रत्येक देश के GHI स्कोर की गणना करने के लिए एकत्रित किया जाता है. अल्पपोषण और बाल मृत्यु दर जीएचआई स्कोर में एक-तिहाई का योगदान करते हैं, जबकि बच्चे के कुपोषण संकेतक - चाइल्ड वेस्टिंग और चाइल्ड स्टंटिंग प्रत्येक स्कोर का छठा हिस्सा होते हैं. GHI के मामले में, 0 सर्वश्रेष्ठ स्कोर (भूख नहीं) है और 100 सबसे खराब है.

 

• वर्तमान रिपोर्ट के रैंकिंग और सूचकांक स्कोर, पिछली रिपोर्टों के रैंकिंग और सूचकांक स्कोरों की आपस में सही से तुलना नहीं की जा सकती.

 

• GHI स्कोर प्रत्येक वर्ष की रिपोर्ट में आंतरिक तुलना हो सकती है, लेकिन विभिन्न वर्षों की रिपोर्ट के बीच नहीं. वर्तमान और ऐतिहासिक डेटा, जिस पर GHI स्कोर आधारित हैं, को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा लगातार संशोधित और सुधार किया जा रहा है, जो उन्हें संकलित करता है, और प्रत्येक वर्ष की GHI रिपोर्ट इन परिवर्तनों को दर्शाती है. रिपोर्ट्स के बीच स्कोर की तुलना करने से यह धारणा बन सकती है कि भूख किसी विशिष्ट देश में साल-दर-साल सकारात्मक या नकारात्मक रूप से बदल गई है, जबकि कुछ मामलों में परिवर्तन आंशिक रूप से या पूरी तरह से डेटा संशोधन का प्रतिबिंब हो सकता है.

 
जीएचआई स्कोर और संकेतक मूल्यों की तरह, एक वर्ष की रिपोर्ट की रैंकिंग की तुलना दूसरे से नहीं की जा सकती. पहले से वर्णित आंकड़ों और कार्यप्रणाली के संशोधनों के अलावा, विभिन्न देशों को हर साल रैंकिंग में शामिल किया जाता है. ऐसा डेटा उपलब्धता की वजह से है - उन देशों का सेट, जिनके लिए जीएचआई स्कोर की गणना करने के लिए पर्याप्त डेटा उपलब्ध हैं, यह साल-दर-साल बदलता रहता है. यदि किसी देश की रैंकिंग एक वर्ष से अगले वर्ष तक बदलती है, तो यह अलग-अलग हिस्सों में भी हो सकती है क्योंकि इसकी तुलना विभिन्न देशों के समूह के साथ की जा रही है. इसके अलावा, रैंकिंग प्रणाली को 2016 में बदल दिया गया था ताकि रिपोर्ट में सभी देशों को शामिल किया जा सके. इसमें उन देशों को रैंकिंग में कम स्कोर के साथ जोड़ा जो पहले शामिल नहीं थे. 
 


 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close