भुखमरी-एक आकलन

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एफएओ द्वारा प्रस्तुत स्टेट ऑफ फूड इन्स्क्यूरिटी इन द वर्ल्ड 2015(प्रकाशित मई 2015) नामक दस्तावेज के तथ्यों के अनुसार :


http://www.im4change.orghttps://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//uploaded/State%20of%20Food%20Insecurity%20in%20the%20World%202015.pdf


• दुनिया में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है।

• भारत वर्ल्ड फूड समिट तथा मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स के लक्ष्यों को समय रहते हासिल कर पाने में सफल नहीं हो पायेगा।

• अनुमान है कि भारत में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या जो साल 2010-12 में 189.9  मिलियन थी, साल 2014-16 में बढ़कर 194.6 मिलियन हो जायेगी।

•  भारत में साल 1990-92 में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या 210.1 मिलियन थी जो साल 2010-12 में 9 प्रतिशत की कमी के साथ 189.9 मिलियन हो गई। चीन में इसी अवधि में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में 43.5 प्रतिशत की कमी आई। चीन में साल 1990-92 में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या 289 मिलियन थी जो साल 2010-12 में घटकर 163.2 मिलियन हो गई।

• प्रतिशत पैमाने पर देखें तो भारत में साल 1990-92 में भारत की कुल आबादी का 23.7% हिस्सा भोजन की कमी का शिकार था जो साल साल 2010-12 में घटकर 15.6% हो गया। अनुमान के अनुसार फिलहाल भारत की कुल आबादी का 15.2 प्रतिशत हिस्सा भोजन की कमी का शिकार है।

• चीन की कुल आबादी में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या साल 1990-92 में 23.9% थी जो साल 2010-12 में घटकर 11.7% हो गई। साल 2014-16 की अवधि में अनुमान है कि चीन की कुल आबादी में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या 9.3% हो जायेगी।

•  पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए भारत से उभरते भुखमरी के रुझान महत्वपूर्ण हैं। भारत मं  सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली के विस्तार से फायदा हुआ है लेकिन वहीं तेज आर्थिक वृद्धि की अवधि में लोगों द्वारा ली जा रही भोजन की मात्रा में बढोत्तरी नहीं हो पायी है, ना ही लोग पौष्टिक आहार पर ही विशेष खर्च कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि गरीब और भोजन का अभाव झेल रहे लोग तेज आर्थिक वृद्धि के फायदों से वंचित हैं।

वैश्विक परिदृश्य

• पिछले एक दशक के दौरान पूरी दुनिया में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में 167 मिलियन की कमी आई है तथा साल 1990-92 की तुलना में दुनिया में भोजन का अभाव झेल रहे लोगों की तादाद में 216 मिलियन की कमी हुई है। फिलहाल दुनिया में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या 795 मिलियन है।
•भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में सर्वाधिक कमी दुनिया के विकासशील इलाकों में हुई है लेकिन हाल के सालों में इस दिशा में प्रगति कुछ बाधित हुई है। इसकी एक वजह आर्थिक विकास का अनेक अर्थों में समावेशी ना होना तथा केंद्रीय अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों में राजनीतिक अस्थिरता का होना है।

• साल 2015 सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों की निगरानी का आखिरी साल है। दुनिया के विकासशील क्षेत्रों के लिहाज से देखें तो इल इलाकों की कुल आबादी में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या 23.3 प्रतिशत थी जो साल 2010-12 में घटकर 12.9 प्रतिशत हो गई है। कुछ इलाके जैसे लैटिन अमेरिका, पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया, मध्य एशिया तथा अफ्रीका के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से में भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में तेजी से कमी आई है। दक्षिण एशिया, ओसिनिया, कैरिबियाई मुल्क तथा दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका के देशों में भी भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में कमी आई है लेकिन इस दिशा में प्रगति की रफ्तार धीमी है और भुखमरी झेल रहे लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य बाधित हो रहा है।

 

 

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