मानव  विकास सूचकांक

मानव विकास सूचकांक

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 यूएनडीपी द्वारा प्रस्तुत मानव विकास रिपोर्ट 2019 :
 
 मानव विकास रिपोर्ट 2019: आजीविका, औसत, आज से परे: 21 वीं सदी में मानव विकास में असमानताएं (दिसंबर 2019 में जारी), जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी किया गया है. इसे देखने के लिए कृपया यहांयहांयहां और यहां क्लिक करें.
 
मानव विकास
  
• 2018 में, 189 देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्रों में भारत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में 129वें पायदान पर (एचडीआई वेल्यू 0.647) था, जबकि चीन 85वें (एचडीआई वेल्यू 0.758), श्रीलंका 71वें (एचडीआई वेल्यू 0.780), भूटान 134वें  (एचडीआई वेल्यू 0.617), बांग्लादेश 135 वें (एचडीआई वेल्यू 0.614) और पाकिस्तान 152 वें पायदान (एचडीआई वेल्यू 0.560) पर था.
 
• 2017 में, भारत एचडीआई रैंकिंग में 189 देशों में से 129वें पायदान पर था, जो 2018 एचडीआई रैंकिंग के बराबर ही थी. मानव विकास रिपोर्ट 2019 के अनुसार, 2018 में भारत की मानव विकास सूचकांक वेल्यू 0.647 और 2017 में 0.643 थी.
 
• मानव विकास सूचकांक और संकेतक रिपोर्ट 2018 के अनुसार, सांख्यिकीय बदलाव के बाद मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) रैंकिंग में साल 2017 में भारत 189 देशों के बीच 130 वें पायदान पर (एचडीआई वेल्यू 0.640) था.
 
• मानव विकास रिपोर्ट 2019 रिपोर्ट यह कहती है कि रिपोर्ट पढ़ते वक्त थोड़ी सतर्कता बरतने की जरूरत है. इसमें उपलब्ध डेटा और निर्धारित लक्ष्यों में सुधार (अर्थात न्यूनतम और अधिकतम मूल्यांकों) के कारण वेल्यूज़ (मूल्यांकों) और रैंकिंग की तुलना करना भ्रामक है. पाठक 2019 की नई मानव विकास रिपोर्ट में तालिका-2 (‘एचडीआई ट्रेंड्स’) का हवाला देकर मानव विकास सूचकांकों में प्रगति का आकलन करें. तालिका -2 तर्कयुक्त संकेतकों, कार्यप्रणाली और समय-श्रृंखला के आंकड़ों पर आधारित है, जो समय के साथ मूल्यांकों और रैंकिंग में वास्तविक परिवर्तन दिखाती है और सही मायनों में प्रगति करने वाले देशों को दर्शाती है. मूल्यांकों के छोटे से बदलाव की सावधानी के साथ व्याख्या की जानी चाहिए क्योंकि वे सैम्पलिंग में मौजूद भिन्नताओं के कारण सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं हो सकते हैं. आमतौर पर किसी भी संयुक्त सूचकांक में तीसरे दशमलव स्थान में हुए बदलाव को महत्वहीन माना जाता है.
 
• 1990 और 2018 के बीच, औसत वार्षिक मानव सूचकांक के मूल्यांक में (तर्कयुक्त संकेतक, कार्यप्रणाली और समय-श्रृंखला डेटा के आधार पर) भारत की 1.46 प्रतिशत, चीन की 1.48 प्रतिशत, बांग्लादेश की 1.65 प्रतिशत, पाकिस्तान की 1.17 प्रतिशत और श्रीलंका की 0.90 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी.
• 1990 और 2018 के बीच, भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्यांक 0.431 से बढ़कर 0.647 ( तर्कयुक्त संकेतक, कार्यप्रणाली और समय-श्रृंखला डेटा के आधार पर) हुआ, यानी इस बीच 50.12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
 
• तर्कयुक्त संकेतक, कार्यप्रणाली और समय-श्रृंखला के आंकड़ों के आधार पर, 1990 में भारत का मानव विकास सूचकांक का मूल्यांक 0.431, 2000 में 0.497, 2010 में 0.581, 2013 में 0.607, 2015 में 0.627, 2017 में 0.637 और 2018 में 0.647 था.
 
• 2018 में, जन्म के समय भारत की जीवन प्रत्याशा 69.4 वर्ष थी, स्कूली शिक्षा के लिए अपेक्षित वर्ष 12.3 वर्ष, स्कूली शिक्षा के औसत 6.5 वर्ष थे और क्रय शक्ति समता के हिसाब से सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति $ 6,829 थी.
 
• 1990 और 2018 के बीच, जन्म के समय भारत की जीवन प्रत्याशा में 11.6 वर्ष, औसत स्कूली शिक्षा में 3.5 वर्ष और अपेक्षित स्कूली शिक्षा में 4.7 वर्ष की बढ़ोतरी हुई है. 1990 और 2018 के बीच भारत की सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति लगभग 262.9 प्रतिशत बढ़ी है.
 
• वर्ष 2018 में भारत की मानव विकास सूचकांक वेल्यू 0.647 का मान मध्यम मानव विकास समूह के देशों के 0.634 मान के औसत से ऊपर और दक्षिण एशिया के देशों के 0.642 के मान के औसत से ऊपर है.
 
• 2018 में भारत की मानव विकास सूचकांक वेल्यू 0.647 थी. हालांकि, जब असमानता के लिए वेल्यू सिस्टम को हटाते हैं, तो मानव विकास सूचकांक 0.477 तक गिर जाता है, मानव विकास सूचकांक में असमानता के कारण 26.3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई. असमानता के कारण बांग्लादेश और पाकिस्तान के मामले में भी क्रमशः 24.3 प्रतिशत और 31.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज  की गई. मध्यम मानव विकास सूचकांक वाले देशों में असमानता के कारण औसतन 25.9 प्रतिशत और दक्षिण एशिया के देशों में भी 25.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. भारत का मानव असमानता का गुणांक 25.7 प्रतिशत था.
 
• साल 2018 में महिलाओं के मामले में भारत की एचडीआई (HDI) वेल्यू 0.574 थी, जोकि पुरुषों की वेल्यू 0.692 के मुकाबले एकदम विपरीत थी. 
 
• 2018 में, भारत के लिंग विकास सूचकांक (GDI) का मूल्यांक(वेल्यू), पुरुष एचडीआई के मुकाबले महिला एचडीआई अनुपात 0.829 था, जो कि चीन (GDI वेल्यू 0.961), नेपाल (GDI वेल्यू 0.897), भूटान (GDI वेल्यू 0.893), श्रीलंका (GDI वेल्यू 0.938) और बांग्लादेश (GDI वेल्यू 0.895) से कम है.
 
• 2018 के दौरान, भारत लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) के संदर्भ में 162 देशों में 122 वें (GII वेल्यू 0.501) स्थान पर था, जबकि चीन 162 देशों में से 39 वें (GII वेल्यू 0.163) स्थान पर था. इसकी तुलना में, बांग्लादेश (GII वेल्यू 0.536) और पाकिस्तान (GII वेल्यू 0.547) क्रमशः इस सूचकांक में 129 वें और 136 वें स्थान पर थे.
 
• 2018 में भारतीय संसद में लगभग 11.7 प्रतिशत सीटें भारतीय महिलाओं के पास थीं, जबकि चीन में 24.9 प्रतिशत महिलाएं संसद की सदस्या थीं.
 
• 2010-2018 के दौरान, उच्च और मध्यम प्रबंधन स्तर की नौकरियों में भारतीय महिलाओं की हिस्सेदारी 13.0 प्रतिशत, बांग्लादेश में 11.5 प्रतिशत, श्रीलंका में 25.6 प्रतिशत, नॉर्वे में 33.5 प्रतिशत, यूनाइटेड किंगडम में 34.2 प्रतिशत और संयुक्त राज्य अमेरिका में 40.5 प्रतिशत थी.
 
• 2010-2018 के दौरान, भारत का सैन्य खर्च (अर्थात, सशस्त्र बलों पर सभी मौजूदा और पूंजीगत खर्च, जिसमें शांति सेना शामिल हैं; रक्षा मंत्रालय और रक्षा परियोजनाओं में लगे हुए अन्य सरकारी एजेंसियां; अर्धसैनिक बल, यदि इन्हें सैन्य अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है;) भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में 2.4 प्रतिशत था. वही 2010-2018 के दौरान यह सैन्य खर्च, चीन में 1.9 प्रतिशत, पाकिस्तान में 4.0 प्रतिशत, बांग्लादेश में 1.4 प्रतिशत, श्रीलंका में 1.9 प्रतिशत, यूनाइटेड किंगडम में 1.8 प्रतिशत और अमेरिका में 3.2 प्रतिशत था.
 
• 2010-18 की समयावधि में भारत में अपने 63.5 प्रतिशत पुरुष समकक्षों की तुलना में सिर्फ 39.0 प्रतिशत वयस्क महिलाएं (25 वर्ष और उससे अधिक) ही किसी भी तरह की माध्यमिक शिक्षा हासिल कर पाई हैं.
 
• साल 2018 में भारत में 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर (labour force participation rate-LFPR) 23.6 प्रतिशत थी जबकि पुरुषों की श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) 78.6 प्रतिशत थी. चीन में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) 61.3 प्रतिशत और पुरुषों की श्रम शक्ति भागीदारी दर 75.9 (LFPR) प्रतिशत थी. श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) को श्रम बल में प्रति 100 व्यक्ति (जनसंख्या पर) की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है.
 
• प्रत्येक 100,000 नवजातों को जन्म देने के दौरान, 174.0 महिलाएं गर्भावस्था से संबंधित कारणों से मर जाती हैं; और 15-19 वर्ष की महिलाओं में प्रति 1,000 महिलाओं पर किशोर जन्म दर 13.2 जन्म थी.
 
गरीबी और असमानता
 
• पिछले दशक में बहुआयामी गरीबी के मोर्चे पर भारत की महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, अभी भी 27.9 प्रतिशत भारतीय बहुआयामी गरीबी की गिरफ्त में हैं.
 
• आय आधारित गरीबी के मुकाबले बहुआयामी गरीबी 6.7 प्रतिशत अधिक है. इसका मतलब है कि आय आधारित गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले व्यक्ति अभी भी स्वास्थ्य, शिक्षा और / या अच्छे जीवन यापन से वंचित हो सकते हैं.
 
• भारत की कुल आबादी का 27.9 प्रतिशत (373,735000 यानी 37.37 करोड़) गरीब हैं, जबकि 19.3 प्रतिशत (258,002000 यानी 25.8 करोड़ लोग) अतिरिक्त लोगों को बहुआयामी गरीबी के रूप में वर्गीकृत किया गया है. 
 
• 2005/2006 और 2015/2016 के बीच भारत में 27.1 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी रेखा से बाहर हुए हैं. औसतन, सबसे गरीब राज्यों और सबसे गरीब समूहों ने तीव्र गति से प्रगति की है.
 
• मानव विकास संकेतकों में सुधार के बावजूद भी समानांतर असमानताएं हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग मानव विकास संकेतकों में समाज के बाकी हिस्सों से काफी कमजोर हैं, जिनमें शिक्षा प्राप्ति और डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक इन समूहों की पहुंच शामिल है. ये समूह सदियों से अपमान और बहिष्कार का सामना कर रहे हैं. आधुनिक भारत ने इन समूहों के लिए सकारात्मक कार्रवाई, सकारात्मक भेदभाव और आरक्षण नीतियों के माध्यम से असमानताओं का निवारण करने का प्रयास किया है.
 
• 2005/06 के बाद से मानव विकास के बुनियादी क्षेत्रों में असमानताओं में कमी आई है. उदाहरण के लिए, शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समूह पाँच या अधिक वर्ष शिक्षा पाने वाले लोगों के अनुपात में शेष आबादी के साथ बराबरी की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी तरह, मोबाइल फोन के उपयोग और उत्थान में समानता की ओर अग्रसर हैं.
 
• मानव विकास के संवर्धित क्षेत्रों में असमानताओं में वृद्धि हुई है, जैसे कि कंप्यूटरों की पहुंच और 12 या अधिक वर्षों तक शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में असमानताएं बढ़ी हैं. 2005/2006 में जो समूह को अधिक सशक्त थे, वे सबसे अधिक मजबूत हुए हैं, और हाशिए पर रहने वाले समूह आगे तो बढ़ रहे हैं लेकिन तुलनात्मक दृष्टि से प्रगति के बावजूद और पिछड़ रहे हैं.
 
• 2010-2017 के दौरान, भारत का जीनी(Gini) गुणांक (आय असमानता का आधिकारिक मापतंत्र, जो शून्य और 100 के बीच भिन्न होता है, 0 पूर्ण समानता दर्शाती है और 100 पूर्ण असमानता की ओर इशारा करती है) 35.7 था, जबकि चीन का 38.6 था, बांग्लादेश का 32.4, पाकिस्तान का 33.5, श्रीलंका का 39.8 और भूटान का 37.4 था.
 
• कई देशों में सार्वजनिक तौर पर टैक्स का डेटा उपलब्ध नहीं है. ऐतिहासिक तौर पर प्रशासनिक टैक्स डेटा की उपलब्धता किसी देश में धन या इनकम टैक्स के अस्तित्व से संबंधित रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 1913 में और भारत में 1922 में जब टैक्स सिस्टम लागू हुआ, तभी से टैक्स के आंकड़ों को सार्वजनिक कर प्रकाशित किया जाने लगा। इस तरह की जानकारी टैक्स प्रशासन के लिए टैक्स दरों को ठीक से प्रशासित करने के लिए और करदाताओं को टैक्स नीति के बारे में सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन सरकारें कभी-कभी सार्वजनिक रूप से डेटा जारी करने को तैयार नहीं होती हैं. 
 
• प्रत्येक डेटा स्रोत की सीमाओं से निपटने के लिए एक तरीका विभिन्न प्रकार के स्रोतों से डेटा को इकट्ठा करना है, विशेष रूप से सर्वेक्षण डेटा के साथ प्रशासनिक टैक्स डेटा को जोड़ना.
 
• शीर्ष 10 प्रतिशत की आय हिस्सेदारी के आधार पर आय असमानता 1980 के बाद से अधिकांश क्षेत्रों में अलग-अलग दरों पर बढ़ी है। रूसी संघ में वृद्धि चरम पर थी, जो 1990 में सबसे अधिक समान देशों में से एक था (कम से कम इस मापक के अनुसार) वह केवल पांच वर्षों में सबसे असमान में से एक बन गया। आय असमानता में वृद्धि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी स्पष्ट रूप से देखी गई, हालांकि रूसी संघ जितनी तेज नहीं चीन में, एक बार तेजी से वृद्धि के बाद, 2000 के दशक के मध्य में असमानता स्थिर होने लगी. शीर्ष 10 प्रतिशत को संयुक्त राज्य में 47 प्रतिशत आय, चीन में 41 प्रतिशत और भारत में 55 प्रतिशत आय प्राप्त हुई.
 
• यूरोपियन यूनियन 34 प्रतिशत के साथ शीर्ष 10 प्रतिशत शेयर प्रीटेक्स आय के आधार पर सबसे समान क्षेत्र के रूप में है. मध्य पूर्व सबसे असमान है, शीर्ष 10 प्रतिशत में प्रीटेक्स आय का 61 प्रतिशत है.
 
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य
 
• मानव विकास की वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पांच स्थान हैं: नॉर्वे (0.954), स्विट्जरलैंड (0.946), आयरलैंड (0.942), जर्मनी (0.939) और हांगकांग (0.939).
 
• निचले पांच हैं: बुरुंडी (0.423), दक्षिण सूडान (0.413), चाड (0.401), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (0.381) और नाइजर (0.377).
 
• मानव विकास में पुरुषों की तुलना में महिलाएं कमतर स्तर पर हैं. ये लिंग अंतराल कम एचडीआई स्कोर वाले देशों में बढ़ता जाता है. दुनिया भर में, महिलाओं की औसत मानव विकास सूचकांक पुरुषों की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. वैश्विक स्तर पर कई देशों में महिलाओं और पुरुषों के बीच एचडीआई का अंतर महिलाओं की कम आय और कम शिक्षा के कारण है.
 
• मानव विकास सूचकांक में लैंगिक भेद उन कम मानव विकास वाले देशों के समूह में ज्यादा गहरा है जहां महिलाओं का मानव विकास सूचकांक पुरुषों की तुलना में 14.2 प्रतिशत कम है. वही दूसरी ओर, बेहतर मानव विकास सूचकांक समूह वाले देशों में, औसतन, लिंग भेद 2.1 प्रतिशत है.
 
• जेंडर असमानता सूचकांक द्वारा मापी गई महिलाओं और पुरुषों के बीच सशक्तिकरण की खाई कम हो रही है, लेकिन बहुत धीमी गति से. संसदीय प्रतिनिधित्व (24.1 प्रतिशत सीटें) और जन्म दर (किशोर उम्र में प्रति 1000 महिलाओं पर 42.9 जन्म) में थोड़े-बहुत सुधार हुए हैं, लेकिन आर्थिक सशक्तीकरण की खाई अभी भी बनी हुई है (महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर) अभी भी पुरुषों की तुलना में 27 प्रतिशत अंक कम है.
 
• शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन यापन में मानव विकास लाभ का असमान वितरण सभी के लिए मानव विकास प्राप्त करने के लिए एक चुनौती बना हुआ है. असमानता समायोजित सूचकांक (आईएचडीआई) से पता चलता है कि 2018 में जब एचडीआई संकेतकों में असमानताओं को ध्यान में रखा गया तो विश्व स्तर पर मानव विकास की प्रगति 20 प्रतिशत तक गिर गई थी.
 
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