मानव  विकास सूचकांक

मानव विकास सूचकांक

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मानव विकास सूचकांक और संकेतक: 2018 सांख्यिकीय अद्यतन नामक रिपोर्ट, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा तैयार किया गया है, के अनुसार, (कृपया उपयोग करने के लिए यहां, यहां और यहां क्लिक करें.)

• 2017 में, भारत की मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) रैंकिंग 189 देशों के बीच 130वीं (एचडीआई वेल्यू 0.640), जबकि चीन की रैंकिंग 86वीं (एचडीआई वेल्यू 0.752), श्रीलंका की 76वीं (एचडीआई वेल्यू 0.770), भूटान की 134वीं (एचडीआई वेल्यू 0.612) थी, बांग्लादेश की 136 वीं (मानव विकास सूचकांक (एचडीआई)  वेल्यू 0.608) और पाकिस्तान का 150 वीं (मानव विकास सूचकांक (एचडीआई)  वेल्यू 0.562) रही.

• भारत की मानव विकास सूचकांक (एचडीआई)  रैंकिंग 2016 और 2017 के बीच 129 वें से 130 वें स्थान पर खिसक गई है, जबकि चीन की रैंकिंग समान समय अवधि में जस की तस 86वें स्थान पर रही है.

• 1990 और 2017 के बीच, भारत के लिए औसत वार्षिक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) वृद्धि 1.51 प्रतिशत, चीन 1.51 प्रतिशत, बांग्लादेश 1.69 प्रतिशत, पाकिस्तान 1.23 प्रतिशत और श्रीलंका 0.78 प्रतिशत रही.

• 1990 और 2017 के बीच, भारत की मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) वेल्यू 0.427 से बढ़कर 0.640 हो गई (- 49.9 प्रतिशत की वृद्धि)

• 2017 में, जन्म के समय भारत की जीवन प्रत्याशा 68.8 वर्ष, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष 12.3 वर्ष, और औसत स्कूली शिक्षा के वर्ष 6.4 वर्ष और सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति 2011 पीपीपी में $ 6,353 रही.

• भारत की एचडीआई स्कोर (0.640), साल 2017 के एचडीआई मध्यम मानव विकास समूह के देशों के लिए औसत 0.645 से नीचे है, लेकिन दक्षिण एशिया के देशों के लिए औसत 0.638 से ऊपर है.

• 2017 के लिए भारत का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई)  0.640 था. हालांकि, जब असमानता के स्तर पर वेल्यू जोड़ी जाती है, तो एचडीआई 0.468 तक गिर जाता है, एचडीआई आयाम सूचकांकों के वितरण में असमानता के कारण 26.8 प्रतिशत का नुकसान होता है. बांग्लादेश और पाकिस्तान के एचडीआई क्रमशः 24.1 प्रतिशत और 31.0 प्रतिशत की असमानता के कारण नुकसान दिखाते हैं. मध्यम एचडीआई देशों के लिए असमानता के कारण औसत नुकसान 25.1 प्रतिशत था और दक्षिण एशिया के लिए यह 26.1 प्रतिशत था. भारत के लिए मानव असमानता का गुणांक 26.3 प्रतिशत था.

• भारत में जीनी गुणांक (आय असमानता को मापने का आधिकारिक सूत्र, जो शून्य और 100 के बीच भिन्न होता है, शून्य के साथ पूर्ण समानता और 100 पूर्ण असमानता को दर्शाता है) 35.1 था जबकि चीन का 42.2 था और भूटान 38.8 था.

• 2017 में भारत में महिलाओं का एचडीआई वेल्यू पुरुषों के 0.683 से विपरीत 0.575 था.

• 2017 में, भारत के लिंग विकास सूचकांक - पुरुष एचडीआई के मुकाबले महिला एचडीआई का अनुपात यानि जीडीआई वेल्यू - 0.841 था, जो चीन (जीडीआई वेल्यू 0.955), नेपाल (जीडीआई वेल्यू 0.925), भूटान (जीडीआई वेल्यू 0.893), श्रीलंका (जीडीआई वेल्यू 0.935) और बांग्लादेश (जीडीआई वेल्यू 0.881) से कम है.

• 2017 के दौरान, भारत ने लैंगिक असमानता सूचकांक के संदर्भ में 127वां (GII वेल्यू 0.524) जबकि चीन 189 देशों में से 36वें (GII वेल्यू 0.152) स्थान पर रहा. इसकी तुलना में, बांग्लादेश (GII वेल्यू 0.542) और पाकिस्तान (GII वेल्यू 0.541) क्रमशः इस सूचकांक पर 134 वें और 133 वें स्थान पर थे.

• 2017 में, भारत में मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 174 था जबकि चीन में यह 27 था. मातृ मृत्यु अनुपात एक निश्चित समयावधि के दौरान प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों के दौरान मातृ मृत्यु की संख्या है.

• साल 2017 में, चीन के 24.2 प्रतिशत के मुकाबले भारत में लगभग 11.6 प्रतिशत संसदीय सीटों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व है. दक्षिण एशिया और अरब देशों में यह क्रमश: 17.5 और 18 प्रतिशत है, जबकि लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और ओईसीडी देशों में यह 29 प्रतिशत है.

• दक्षिण एशिया में 20 और 24 वर्ष की आयु के बीच की 29 प्रतिशत महिलाओं का विवाह उनके 18वें जन्‍मदिन से पहले हो गया था.

• भारत में 39.0 प्रतिशत वयस्क महिलाएं (25 वर्ष और उससे अधिक) 2010-17 की अवधि के दौरान अपने पुरुष समकक्षों के 63.5 प्रतिशत की तुलना में कम से कम कुछ माध्यमिक शिक्षा तक पहुंचीं.

• भारत में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर (15 वर्ष और उससे अधिक) 27.2 प्रतिशत थी जबकि पुरुष श्रम शक्ति भागीदारी दर 78.8 प्रतिशत थी. चीन में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 61.5 प्रतिशत और पुरुष श्रम शक्ति भागीदारी दर 76.1 प्रतिशत थी. श्रम शक्ति भागीदारी दर को श्रम बल में प्रति 100 व्यक्ति (जनसंख्या पर) की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है.

• 2006-2016 की अवधि के दौरान वैधानिक पेंशन की आयु के अनुपात के रूप में वृद्धावस्था पेंशन प्राप्तकर्ता भारत में 24.1 प्रतिशत थे, जबकि चीन में यह आंकड़ा 100.0 प्रतिशत था.

• सब सहारन अफ्रीका में औसतन प्रति शिक्षक प्राइमरी स्‍कूल में 39 विद्यार्थी हैं, जबकि दक्षिण एशिया में प्रति शिक्षक 35 विद्यार्थी हैं. किन्‍तु ओईसीडी देशों और पूर्व एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र में और यूरोप तथा मध्‍य एशिया में प्राइमरी स्‍कूल में प्रति शिक्षक औसतन 16-18 विद्यार्थी हैं. ओईसीडी देशों और पूर्व एशिया तथा प्रशांत में प्रत्‍येक 10,000 लोगों पर औसतन क्रमश: 29 और 28 चिकित्‍सक हैं, जबकि दक्षिण एशिया में केवल 8 और सब सहारन अफ्रीका में 2 भी नहीं हैं.

• वैश्विक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) रैंकिंग में शीर्ष पांच देश नॉर्वे (0.953), स्विट्जरलैंड (0.944), ऑस्ट्रेलिया (0.939), आयरलैंड (0.938) और जर्मनी (0.936) हैं.

• नीचे के पांच देश बुरुंडी (0.417), चाड (0.404), दक्षिण सूडान (0.388), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (0.367) और नाइजर (0.354) हैं.

• दक्षिण एशिया: विकासशील क्षेत्रों में दक्षिण एशिया में मानव विकास सूचकांक की वृद्धि सबसे तेज रही है. 1990 से 45.3 प्रतिशत वृद्धि हुई है. इस अवधि के दौरान जीवन की संभावना 10.8 वर्ष की गति से बढ़ी है और बच्‍चों के लिए स्‍कूल में पढ़ने के अनुमानित वर्षों में 21 प्रतिशत वृद्धि हुई है. असमानताओं के कारण मानव विकास सूचकांक में करीब 26 प्रतिशत क्षति हुई है. मानव विकास सूचकांक के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच सबसे व्‍यापक 16.3 प्रतिशत का अंतर दक्षिण एशिया में है.

एचडीआई क्‍या है:

मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) को 1990 में पहली मानव विकास रिपोर्ट में विकास के समग्र मानक के रूप में अपनाया गया था. जिसने राष्‍ट्रीय प्रगति के विशुद्ध आर्थिक आकलन को चुनौती दी. इसमें 189 देश और क्षेत्र शामिल हैं. मार्शल आइलैंड को पहली बार शामिल किया गया है. कोरिया लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्‍य, मुनाको, नाउरू, सान मारिनो, सामोलिया और टुवालू के लिए मानव विकास सूचकांक की गणना नहीं की जा सकी. 2018 सांख्‍यकीय उन्‍नयन में प्रस्‍तुत मानव विकास सूचकांक रैंकिंग और स्‍तरों की तुलना इसीलिए पिछली मानव विकास रिपोर्ट में प्रकाशित मानव विकास सूचकांक रैंकिंग और स्‍तरों से सीधे नहीं की जा सकती.

 

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