शिक्षा

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2005 से हर साल, वार्षिक शिक्षा रिपोर्ट-असर (ASER) ने स्कूलिंग की स्थिति और ग्रामीण भारत में 5-16 आयु वर्ग के बच्चों की बुनियादी पढ़ने और अंकगणितीय कार्यों को करने की क्षमता पर रिपोर्ट तैयार की है. वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के दस साल बाद, 2016 में, असर (ASER) एक वैकल्पिक-वर्ष चक्र में बदल गया, जिसके तहत असर अपनी रिपोर्ट हर दूसरे वर्ष (2016, 2018 और 2020 में अगला) तैयार करता है; और वैकल्पिक वर्षों में असर बच्चों के स्कूली शिक्षा और सीखने के एक अलग पहलू पर केंद्रित होकर कार्य करता है. 2017 में आई, ASER की रिपोर्ट, 'बियॉन्ड बेसिक्स', 14-18 आयु वर्ग में युवाओं की क्षमताओं, अनुभवों और आकांक्षाओं पर केंद्रित थी.
 
2019 में, असर (ASER 2019) ने शुरुआती वर्षों में महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने का प्रयास करते हुए, स्कूली शिक्षा की स्थिति के साथ-साथ 4-8 आयु वर्ग के छोटे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण विकास संकेतकों पर काम किया है.
 
शुरुआती सालों यानी 0-8 वर्ष की आयु को दुनियाभर में, मानव जीवन चक्र में संज्ञानात्मक, शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. अनेकों रिसर्च दर्शाती हैं कि इन वर्षों के दौरान बच्चों की मजबूत नींव सुनिश्चित करने के लिए स्कूल और घेरलू जीवन में वातावरण और सिखाने की उचित व्यवस्था मौलिक हैं, जिनकी बिनाह पर उनके भविष्य की नींव टिकी है. हालाँकि, कई निम्न-और मध्यम-आय वाले देशों की तरह भारत में, इस संबंध में बहुत कम सबूत मिलते हैं कि क्या छोटे बच्चों की प्राथमिक सुविधाओं तक पहुँच है? और क्या उनको ऐसे मूलभूत कौशल और योग्यताएं दी जा रही हैं जो स्कूली और बाद के जीवन में उन्हें सफलता प्राप्त करने में मददगार साबित होंगी. 
 
ASER 2019 ‘अर्ली इयर्स’ रिपोर्ट इन अनछुए पहलूओं पर ध्यान दिलाने के लिए तैयार की गई है. इसको तैयार करने के लिए, भारत के 24 राज्यों के 26 जिलों में किए गए सर्वेक्षण में कुल 1,514 गांवों, 30,425 घरों और 4-8 साल के आयु वर्ग के 36,930 बच्चों को शामिल किया गया था. सैम्पल के तौर पर प्री-स्कूल या स्कूल से बच्चों की दाखिले की जानकारियां जुटाई गईं. सर्वेक्षण के दौरान, बच्चों के साथ विभिन्न प्रकार के संज्ञानात्मक, प्रारंभिक भाषा और साधारण संख्या गणित; और बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास का आकलन करने के लिए गतिविधियों का सहारा लिया गया. सभी कार्य बच्चों के साथ उनके घरों में एक-एक करके किए जाते थे.
 
असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ (जनवरी 2020 में जारी) के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं, कृपया यहांयहां और यहां क्लिक करें:

प्री-स्कूल और स्कूल में दाखिला पैटर्न
• असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ ने पाया कि 4-8 आयु वर्ग के 90% से अधिक बच्चे किसी न किसी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान में दाखिल हैं. यह अनुपात उम्र के साथ बढ़ता है. सैम्पल जिलों में 4 वर्ष के 91.3% और 8 वर्ष के 99.5% बच्चे शिक्षण संस्थानों में  दाखिल हैं.
 
• हालांकि, हमउम्र बच्चों में उनके दाखिले के मामले में काफी अंतर हैं. उदाहरण के लिए, 5 वर्ष की आयु में, 70% बच्चे आंगनवाड़ियों या प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिल हैं, लेकिन पहले से ही इसी उम्र के 21.6% बच्चे पहली कक्षा में दाखिल हैं. 6 वर्ष की आयु में, 32.8% बच्चे आंगनवाड़ियों या प्री-प्राइमरी कक्षाओं में हैं, जबकि 46.4% बच्चे पहली कक्षा और 18.7% दूसरी कक्षा या उससे बड़ी कक्षा में पढ़ रहे हैं. 
 
• सरकारी संस्थानों में पढ़ रही लड़कियों की ज्यादा संख्या और प्राइवेट संस्थानों में पढ़ रहे लड़कों की ज्यादा संख्या यह दर्शाती है कि इन छोटे बच्चों के बीच भी लड़कों और लड़कियों के मामले में अलग-अलग एडमिशन पैटर्न हैं. जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं ये अंतर बड़े होते जाते हैं. उदाहरण के लिए, 4- और 5- साल के बच्चों के बीच, 56.8% लड़कियां और 50.4% लड़के सरकारी प्री-प्राइमरी या सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि 43.2% लड़कियां और 49.6% लड़के प्राइवेट प्री-प्राइमरी या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं. 6- से 8 साल के सभी बच्चों में 61.1% लड़कियां और 52.1% लड़के एक सरकारी संस्थान में पढ़ रहे हैं.

प्री-स्कूल आयु समूह में बच्चे (आयु 4-5 वर्ष)
राष्ट्रीय नीति की सिफारिश है कि 4 और 5 वर्ष की आयु के बच्चे प्री-प्राइमरी कक्षाओं में होने चाहिए. इस स्तर पर, बच्चों को संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक कौशल के साथ-साथ औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिए आवश्यक नींव समेत कई क्षमताओं और कौशल को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
 
• 5 वर्ष की आयु में, बच्चों से जो अपेक्षा हम करते हैं, उनमें स्कूल एडमिशन के लिए राज्य के मानदंडों के आधार पर देश भर में बहुत भिन्नता है. नतीजतन, एक 5 वर्षीय बच्ची/बच्चा क्या कर रही/रहा है यह काफी हद तक उनके आवासीय क्षेत्र पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए, केरल के त्रिशूर में, 5-वर्षीय बच्चों में से 89.9% प्री-प्राइमरी ग्रेड में हैं और बाकी बचे हुए पहली कक्षा में हैं. लेकिन पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय में, सिर्फ 65.8% बच्चे प्री-प्राइमरी, 9.8% बच्चे पहली कक्षा और 16% दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं. दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के सतना में, 47.7% बच्चे प्री-प्राइमरी, 40.5% बच्चे पहली कक्षा, और 4.1% बच्चे दूसरी कक्षा में हैं.
 
• बाल विकास विशेषज्ञों और अन्य अध्ययनों के अनुसार, 4 वर्ष से 5 वर्ष की आयु में बच्चों में सभी कार्यों को करने की क्षमता में काफी सुधार होता है. संज्ञानात्मक, प्रारंभिक भाषा, प्रारंभिक संख्या और सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा ग्रहण करने में 4 साल के बच्चों की तुलना में 5 साल के बच्चों में अधिक क्षमता होती हैं. उदाहरण के लिए, आंगनवाड़ियों या सरकारी प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला लेने वाले 4-वर्षीय बच्चों में से 31%, 4-टुकड़ा पहेली करने में सक्षम थे, इन संस्थानों में भाग लेने वाले 5-वर्षीय बच्चों में से 45% ऐसा कर सकते थे.
 
• हालांकि, 5 साल की उम्र में, बच्चों को इनमें से अधिकांश कार्यों को आसानी से हल करने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन एक बड़ा अनुपात ऐसा करने में असमर्थ है. कम सुविधा वाले घरों के बच्चे असमान रूप से प्रभावित होते हैं. यद्यपि सभी 4-वर्ष के बच्चों में से लगभग आधे और सभी 5-वर्षीय बच्चों के एक चौथाई से अधिक को आंगनवाड़ियों में भेजा जाता है, लेकिन प्राइवेट संस्थानों में भर्ती हो एलकेजी/यूकेजी कक्षाओं में पढ़ने वाले उनके हमउम्रों की तुलना में आंगनवाड़ी जाने वाले बच्चों का संज्ञानात्मक कौशल और नींव काफी कमजोर है.
 
• क्योंकि ये छोटे बच्चे हैं जो अपना अधिकांश समय घर पर बिताते हैं, इसलिए मुख्य रूप से घरेलू परिवेश की वजह से इन बच्चों में ये अंतर देखने को मिलते हैं. उदाहरण के लिए, प्री-प्राइमरी आयु वर्ग में, जिन बच्चों की माताओं ने आठ या उससे कम वर्षों तक स्कूली शिक्षा ग्रहण की थी, उनमें आंगनवाड़ियों या सरकारी प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला लेने की संभावना अधिक होती है; जबकि उनके हमउम्र बच्चे, जिनकी माताएं ज्यादा पढ़ी-लिखीं होती हैं, उनके प्राइवेट एलकेजी/यूकेजी कक्षाओं में दाखिल होने की अधिक संभावना  होती है.
 
पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे
पहली कक्षा महत्वपूर्ण होती है, जिसमें बच्चे पाठ्यक्रम के उद्देश्यों के अनुसार विषयों को सीखने के लिए औपचारिक स्कूली शिक्षा के घेरे में आते हैं. 
 
• शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE) कहता है कि बच्चों को 5 वर्ष की आयु में पहली कक्षा में दाखिल करना चाहिए. कई राज्य 5 वर्ष की आयु से ज्यादा होने पर कक्षा पहली में दाखिला लेने की अनुमति देते हैं. हालाँकि, कक्षा पहली में प्रत्येक 10 में से 4 बच्चे 5 वर्ष से छोटे या 6 वर्ष से अधिक हैं. कुल मिलाकर, पहली कक्षा में 41.7% बच्चे 6 वर्ष की आरटीई-अनिवार्य आयु के हैं, 36.4% 7 या 8 वर्ष के हैं, और 21.9% 4 या 5 साल के हैं.
 
• पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों का संज्ञानात्मक, प्रारंभिक भाषा, शुरुआती गणित और सामाजिक और भावनात्मक विकास मुक्कमल तौर पर उनकी उम्र से संबंधित है. बड़े बच्चे सभी कार्यों को बेहतरी से करते हैं. उदाहरण के तौर पर पहली कक्षा के समूह को लीजिए,  4 या 5 वर्ष की आयु के बच्चे कक्षा पहली के स्तर का टेक्सट नहीं पढ़ सकते हैं. यह अनुपात उम्र के साथ लगातार बढ़ता जाता है.
 
• सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे प्राइवेट स्कूलों में एक ही ग्रेड के बच्चों की तुलना में उम्र में छोटे हैं. सरकारी स्कूलों में एक चौथाई से अधिक छात्र यानी 26.1% 4 या 5 वर्ष के हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यह आंकड़ा दस प्रतिशत गिरकर 15.7%  है. दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में 30.4% छात्र 7-8 वर्ष के हैं, जबकि निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 45.4% है.
 
• जैसा कि 4- और 5-वर्ष के बच्चों के बीच देखा गया था, पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के संज्ञानात्मक कौशल, शुरुआती भाषा और शुरुआती गणित हल करने की उनकी क्षमता के बीच एक स्पष्ट संबंध दिखाई देता है. उदाहरण के तौर पर पहली कक्षा में पढ़ने वाले जो बच्चे 3 संज्ञानात्मक सवालों को हल कर सकते हैं, उनमें पढ़ने की क्षमता और अपने साथियों की तुलना में मौखिक सवालों को हल करने की अधिक संभावनाएं थी.
 
प्रारंभिक प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा I, II, III) में बच्चे
प्राथमिक विद्यालय के पहले कुछ वर्षों में, बच्चों को पढ़ने और अंकगणितीय क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में बढ़ाना चाहिए, जिससे उनकी नींव मजबूत हो सके. यह महत्वपूर्ण है कि पाठ्यक्रम और कक्षा की गतिविधियों को उनकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाए.
 
• असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ ’के निष्कर्ष बताते हैं कि बच्चों की आयु में भिन्नता पहली कक्षा में सबसे अधिक है और उसके बाद की कक्षाओं में घटती जाती है. लेकिन असर द्वारा दिए गए कार्यों को छोटे बच्चों के मुकाबले बड़े बच्चे बेहतरी से करने में सक्षम थे. उदाहरण के तौर पर, सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे अधिकांश बच्चे या तो 7 या 8 साल के हैं, तीसरी में पढ़ने वाले 8-वर्षीय 53.4% बच्चे पहली कक्षा के स्तर के पाठ पढ़ सकते थे, जबकि 7-वर्ष के केवल 46.1% - बच्चे ही ऐसा कर सकते थे.
 
• निरंतर हरेक कक्षा में बच्चों के कौशल और क्षमताओं में सुधार होता जाता है. लेकिन प्रत्येक कक्षा के पाठ्यक्रम उद्देश्यों में बड़े बदलावों के कारण कक्षा तीसरी तक उनकी प्रारंभिक भाषा और शुरुआती संख्यात्मक परिणाम पाठ्यक्रम की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं मिलते हैं. उदाहरण के तौर पर, प्रथम स्तर के पाठ को पहली कक्षा के 16.2% बच्चे ही पढ़ पाते हैं और जिसमें सुधार के बाद उसी पाठ को कक्षा तीसरी के 50.8% बच्चे पढ़ पाते हैं. इसका मतलब यह है कि पाठ्यक्रम के हिसाब से कक्षा तीसरी के आधे बच्चे पहले से ही कम से कम दो साल पीछे होते हैं.
 
• इसी तरह, कक्षा पहली के 41.1% छात्र 2-अंकीय संख्या को पहचान सकते हैं, जबकि कक्षा तीसरी में 72.2% छात्र ऐसा कर सकते हैं. लेकिन एनसीईआरटी के उद्देश्यों के अनुसार, बच्चों को पहली कक्षा में 99 तक की संख्या को पहचानने में सक्षम होना चाहिए.
 
•  बच्चों के संज्ञानात्मक कौशल और शुरुआती भाषा और शुरुआती गणितीय क्षमताओं के साथ उनके प्रदर्शन का एक मजबूत संबंध है. उदाहरण के तौर पर, कक्षा तीसरी के 63.2% बच्चे, जिन्होंने सभी 3 संज्ञानात्मक कार्यों को सही ढंग से किया, वे प्रथम स्तर पर पढ़ने में सक्षम थे, जबकि 19.9% बच्चे जो तीनों संज्ञानात्मक कार्यों में से एक या एक भी सही ढंग से नहीं कर पाए, वे पढ़ने में भी सक्षम नहीं थे.

नीति
असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ के निष्कर्षों से तीन प्रमुख आशय निकलते हैं.
 
• प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला लेने से पहले आंगनवाड़ियों ने बच्चों के बड़े अनुपात को पोषित किया. इसीलिए, 3 और 4 वर्षीय बच्चों के लिए उपयुक्त पठन-लेखन गतिविधियों को लागू करने के लिए इन केंद्रों की क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है.
 
• असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ के आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि संज्ञानात्मक, प्रारंभिक भाषा, प्रारंभिक संख्या और सामाजिक और भावनात्मक विकास परीक्षणों में बच्चों का प्रदर्शन उनकी उम्र से निकटता से संबंधित है, जिसमें बड़े बच्चे छोटे बच्चों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. कम उम्र के बच्चों को प्राथमिक ग्रेड में दाखिला देना, उनके सीखने के क्रम में बाधा उत्पन्न करता है जिसे दूर करना मुश्किल है.
 
• असर-2019 (ASER 2019) ‘अर्ली इयर्स’ के आंकड़े संज्ञानात्मक कार्यों और प्रारंभिक भाषा और शुरुआती गणीतीय परीक्षणों में बच्चों के प्रदर्शन के बीच एक स्पष्ट संबंध दर्शाते हैं, ऐसे में प्रारंभिक वर्षों में विषय सीखने के बजाय संज्ञानात्मक कौशल को मजबूत करने वाली गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने से बच्चों के भविष्य की शिक्षा में कई लाभ हो सकते हैं. 4 से 8 तक के पूरे आयु समूह को एक निरंतरता और पाठ्यक्रम की प्रगति के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि तदनुसार स्कूलिंग की योजनाएं तैयार की जा सकें. एक प्रभावी और लागू करने योग्य पाठ्यक्रम के लिए, डिजाइनिंग, योजना, संचालन और अंतिम रूप देने जैसी जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखना होगा.
 

Rural Expert


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